मेड इन इंडिया होंगे ये 100 प्रोडक्ट, आयात भरोसे नहीं चलेगी गाड़ी; सरकार ने बनाया 6 स्पेशल ग्रुप
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने 6 सेक्टर-विशेष ग्रुप का गठन किया है. इन ग्रुप का लक्ष्य ऐसे 100 प्रोडक्ट की पहचान करना है, जिनका भारत में उत्पादन नहीं होता या मांग के मुकाबले कम होता है. फार्मास्युटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव, एनर्जी और डिफेंस सहित कई क्षेत्रों को इस पहल में शामिल किया गया है.

Domestic Manufacturing India: भारत को घरेलू उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे प्रोडक्ट की पहचान करने के लिए 6 सेक्टर-विशेष कार्य समूहों का गठन किया है, जिनका घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाया जा सके. इन समूहों का लक्ष्य ऐसे 100 प्रोडक्ट की पहचान करना है, जिनके आयात पर भारत वर्तमान में काफी निर्भर है और जिन्हें देश में ही बड़े पैमाने पर बनाया जा सकता है. सरकार का मानना है कि इन उत्पादों के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने से न केवल आयात बिल कम होगा, बल्कि घरेलू उद्योगों को मजबूती मिलेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी.
किन क्षेत्रों के लिए बनाए गए हैं समूह
ET की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा गठित 6 कार्य समूह अलग-अलग रणनीतिक और औद्योगिक क्षेत्रों पर काम करेंगे. इनमें फार्मास्युटिकल्स, बायोटेक और मेडिकल डिवाइसेज, केमिकल्स और पेट्रोकेमिकल्स, टेक्सटाइल्स और फुटवियर, कैपिटल गुड्स, ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, एनर्जी, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर, तथा डिफेंस, एयरोस्पेस और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं.
इन समूहों में वाणिज्य मंत्रालय, DPIIT, नीति आयोग, फार्मास्युटिकल्स विभाग, आर्थिक मामलों का विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्री, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सड़क परिवहन मंत्रालय, मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी और पेट्रोलियम मंत्रालय सहित कई सरकारी विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. इन सभी समूहों की अध्यक्षता DPIIT के सचिव करेंगे.
किन प्रोडक्ट की होगी पहचान
सरकारी सूत्रों के अनुसार, कार्य समूह उन उत्पादों की पहचान करेंगे, जिनका भारत में उत्पादन या तो बिल्कुल नहीं होता है या फिर घरेलू मांग के मुकाबले बहुत कम मात्रा में होता है. ऐसे उत्पादों के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देकर भारत अपनी आयात निर्भरता कम करना चाहता है.
सरकार का उद्देश्य केवल घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करना नहीं है, बल्कि भारत को इन उत्पादों के वैश्विक उत्पादन केंद्र के रूप में भी विकसित करना है. इससे देश की निर्यात क्षमता में भी बढ़ोतरी हो सकती है.
बढ़ता आयात बना चिंता का कारण
सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत का आयात लगातार बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल आयात 7.5 फीसदी बढ़कर 775 अरब डॉलर तक पहुंच गया. बढ़ता आयात विदेशी मुद्रा पर दबाव डालता है और भारतीय मुद्रा के मूल्य को भी प्रभावित कर सकता है.
आंकड़ों के अनुसार, भारत ने पिछले वित्त वर्ष में सबसे ज्यादा आयात कच्चे तेल का किया, जिसकी कुल कीमत 174 अरब डॉलर रही. इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का आयात 116.2 अरब डॉलर, मशीनरी का आयात 61.73 अरब डॉलर और परिवहन उपकरणों का आयात 34.75 अरब डॉलर रहा.
इसी तरह रसायन, प्लास्टिक सामग्री, कोयला, उर्वरक, वनस्पति तेल और खनिजों का आयात भी बड़ी मात्रा में किया गया. सरकार का मानना है कि इनमें से कई क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं.
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