लिथियम और निकेल प्रोसेसिंग के लिए ₹3000 करोड़ की इंसेंटिव पॉलिसी का हो सकता है ऐलान, सरकार ने बनाया मेगा प्लान
अप्रैल में माइनिंग सचिव ने कहा था कि सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन वैल्यू सिस्टम को सुरक्षित करने से जुड़ी प्रोसेसिंग पॉलिसी के लिए दो जरूरी खनिजों को शॉर्टलिस्ट किया है. लिथियम और निकेल भारत की EV सप्लाई चेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, खासकर बैटरी निर्माण में इनकी अहम भूमिका होती है.
भारत का केंद्रीय माइनिंग मंत्रालय जल्द ही लिथियम और निकेल की प्रोसेसिंग के लिए इंसेंटिव वाली एक पॉलिसी पेश करने वाला है. न्यूज एजेंसी रायटर्स के अनुसार, इस पॉलिसी पर करीब 3,000 करोड़ रुपये (313.48 मिलियन डॉलर) खर्च किए जाएंगे. जनवरी में रॉयटर्स ने रिपोर्ट दी थी कि इस इंसेंटिव पॉलिसी में लिथियम और निकेल को शामिल किया जाएगा.
दो खनिजों को किया गया शॉर्टलिस्ट
अप्रैल में माइनिंग सचिव ने कहा था कि सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन वैल्यू सिस्टम को सुरक्षित करने से जुड़ी प्रोसेसिंग पॉलिसी के लिए दो जरूरी खनिजों को शॉर्टलिस्ट किया है. हालांकि उन्होंने इसके बारे में और अधिक जानकारी नहीं दी.
लिथियम और निकेल भारत की EV सप्लाई चेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, खासकर बैटरी निर्माण में इनकी अहम भूमिका होती है.
भारत का लक्ष्य 2030 तक
- पैसेंजर कारों में 30% इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी हासिल करना है.
- दोपहिया वाहनों (Two-Wheelers) में 80% इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी हासिल करना है.
मौजूदा समय में
- कारों में EV की हिस्सेदारी लगभग 6 फीसदी है.
- दोपहिया वाहनों में EV की हिस्सेदारी लगभग 9 फीसदी है.
सरकारी प्रोत्साहन (Incentive) पाने के लिए शर्त
- लिथियम प्रोसेसिंग प्लांट की न्यूनतम क्षमता 30,000 मीट्रिक टन होनी चाहिए.
- निकेल प्रोसेसिंग प्लांट की न्यूनतम क्षमता 50,000 मीट्रिक टन होनी चाहिए.
EV सप्लाई चेन के लिए जरूरी है निकेल और लिथियम
भारत की EV सप्लाई चेन के लिए निकेल और लिथियम बहुत जरूरी हैं, खासकर जब बात बैटरियों की आती है. ऐसा इसलिए है क्योंकि नई दिल्ली ने 2030 तक इलेक्ट्रिक कारों की पहुंच को मौजूदा 6 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी और दोपहिया वाहनों के लिए 9 फीसदी से बढ़ाकर 80 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है.
कैसे मिलेगा प्रोत्साहनों का लाभ?
रायटर्स की पहले की रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रोत्साहनों का लाभ उठाने के लिए, लिथियम प्रोसेसिंग प्लांट की न्यूनतम क्षमता 30,000 मीट्रिक टन होनी चाहिए, जबकि निकेल प्लांट की क्षमता कम से कम 50,000 टन होनी चाहिए.
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