एक CA ने की थी HDFC की शुरुआत, पूर्व IAS की एंट्री से मच गया बवाल, जानें एग्जिट की इनसाइड स्टोरी
HDFC बैंक इन दिनों चर्चा में है, क्योंकि पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे ने निवेशकों को चौंका दिया है. उनके कार्यकाल के बीच दिए गए इस कदम और बैंक पर लगे पुराने आरोपों ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है. हालांकि RBI ने स्थिति सामान्य बताई है, फिर भी निवेशकों के मन में संशय बना हुआ है.
HDFC Bank Controversy Inside Story: HDFC बैंक में इस समय भूचाल मचा हुआ है. देश के प्रमुख प्राइवेट बैंक में यह भूचाल एक इस्तीफे की वजह से आया है. मामला बैंक के पूर्व पार्ट टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे का है. जिसके बाद से बैंक के गवर्नेंस को लेकर सवाल उठने लगे हैं. बढ़ते मामले को देखते हुए आरबीआई को भी इस मामले में दखल देकर यह कहना पड़ा कि बैंक में सब-कुछ ठीक है. लेकिन दो दिन से चल रहे इस मामले ने शेयर बाजार के निवेशकों के भरोसे को भी हिला दिया है. जिस कारण बैंक के शेयर गुरुवार को इंट्राडे में 8.6 फीसदी तक टूटे और शुक्रवार को भी इसमें 2 फीसदी (12:26 PM तक) से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है. अब सवाल उठता है कि पूर्व आईएएस अतनु चक्रवर्ती ने समय से पहले क्यों इस्तीफा दिया. जबकि उनका कार्यकाल मई 2027 तक था. तो आइए जानते हैं इस पूरे मामले की इनसाइड स्टोरी..
क्यों मचा हड़कंप?
बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर अतनु चक्रवर्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. 15 मार्च को दिए अपने इस्तीफे में लिखा कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने कुछ ऐसी चीजें देखीं जो उनके सिद्धांतों से मेल नहीं थीं. इसी कारण उन्होंने तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने का निर्णय लिया.
क्या है विवाद की असली वजह?
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, HDFC और HDFC बैंक के विलय की प्रक्रिया आदित्य पुरी के रिटायर होने (अक्टूबर 2020) के बाद तेज हुई. अतनु चक्रवर्ती इस विलय को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे थे, जबकि मैनेजमेंट इससे हिचक रहा था. बैंक के चेयरमैन और मैनेजमेंट के बीच कई मुद्दों पर मतभेद थे, जिससे उनके रिश्ते तल्ख होते गए. रिपोर्ट के अनुसार, चेयरमैन का दखल जरूरत से ज्यादा था, जिससे मैनेजमेंट को काम करने में दिक्कत हो रही थी. यहां तक कि नियामक (RBI) को भी इस स्थिति की जानकारी थी और संकेत दिए गए थे कि चेयरमैन को रोजमर्रा के फैसलों में ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. इससे यह साफ होता है कि बैंक के अंदर लंबे समय से तनाव चल रहा था.
कौन हैं अतनु चक्रवर्ती?
अतनु चक्रवर्ती मई 2021 में HDFC बैंक के बोर्ड से जुड़े थे. इससे पहले वे वित्त मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्य कर चुके हैं. इसके अलावा, वे विश्व बैंक के बोर्ड में वैकल्पिक गवर्नर रह चुके हैं और नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड के अध्यक्ष भी रहे हैं. वे गुजरात कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं.
कैसे एक CA ने शुरू किया HDFC?
दीपक पारेख के चाचा हसमुखभाई पारेख 1976 में रिटायर हुए. इसके बाद उन्होंने अमेरिका और यूरोप की तर्ज पर भारत में होम लोन का बिजनेस शुरू करने की योजना बनाई. उन्होंने अपनी रणनीति तैयार की और उस समय के वित्त सचिव डॉ. मनमोहन सिंह से मुलाकात की. डॉ. मनमोहन सिंह का मानना था कि भारत में होम लोन का कॉन्सेप्ट नया है और इसके सफल होने की संभावना कम है. इसके बावजूद हसमुखभाई पारेख ने 1977 में HDFC की स्थापना की.
इसके बाद उन्होंने विदेशी बैंक में काम कर रहे अपने भतीजे दीपक पारेख को बुलाया और उन्हें कंपनी की जिम्मेदारी सौंपी. CA दीपक पारेख के पास अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग का अच्छा अनुभव था. उन्होंने कंपनी को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया और इसे देश की एक प्रमुख बैंकिंग संस्था बना दिया.
पहले भी विवादों में रहा है बैंक
पिछले कुछ वर्षों में HDFC बैंक को कई ऑपरेशनल, नियामकीय और गवर्नेंस से जुड़े आरोपों और विवादों का सामना करना पड़ा है. इन घटनाओं ने बैंक की मजबूत वित्तीय स्थिति के बावजूद उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं.
डिजिटल सेवाओं में बाधाएं (2020)
RBI ने बैंक को नए क्रेडिट कार्ड जारी करने और नए डिजिटल प्रोजेक्ट्स शुरू करने से रोक दिया था, क्योंकि डिजिटल सिस्टम में बार-बार तकनीकी समस्याएं आ रही थीं.
ग्राहकों की प्राइवेसी पर सवाल (2021)
ऑटो लोन विभाग पर आरोप लगा कि ग्राहकों को बिना स्पष्ट जानकारी दिए कार लोन के साथ GPS ट्रैकिंग डिवाइस जोड़े जा रहे थे. इस मामले में RBI ने बैंक पर ₹10 करोड़ का जुर्माना लगाया.
रिश्वतखोरी का आरोप (2025)
बैंक के CEO शशिधर जगदीशन के खिलाफ FIR दर्ज हुई. उन पर लीलावती किर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट से जुड़े मामले में ₹2.05 करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप लगा.
दुबई शाखा पर कार्रवाई
Dubai Financial Services Authority (DFSA) ने नियमों के पालन में कमी के कारण बैंक की दुबई शाखा पर नए ग्राहकों को जोड़ने और नई सेवाएं देने पर रोक लगा दी.
वरिष्ठ अधिकारियों का इस्तीफा
कॉरपोरेट बैंकिंग प्रमुख राहुल शुक्ला ने लंबे अवकाश के बाद इस्तीफा दे दिया, जिससे प्रबंधन में अस्थिरता के संकेत मिले. अब अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे ने इन चिंताओं को और बढ़ा दिया है.
बैंक के क्या कहने हैं?
शेयरों में गिरावट और अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में नियुक्त केकी मिस्त्री ने स्पष्ट किया कि कंपनी में किसी तरह की पावर स्ट्रगल की स्थिति नहीं है. हालांकि, उन्होंने माना कि बैंक के अंदर कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद जरूर थे. मिस्त्री ने यह भी कहा कि अगर कोई बात उनके मूल्यों और सिद्धांतों के खिलाफ होती, तो वह 71 वर्ष की उम्र में यह जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करते.
