How Dark Patterns are manipulating consumers | e-commerce के इस जाल में फंस रहे भोले-भाले लोग

डिजिटल शॉपिंग ने लोगों की जिंदगी को आसान जरूर बनाया है, लेकिन इसके साथ एक नई समस्या भी तेजी से सामने आ रही है, जिसे “डार्क पैटर्न” कहा जाता है. डार्क पैटर्न ऐसे डिज़ाइन और ट्रिक्स होते हैं जिनका इस्तेमाल ऐप या वेबसाइट यूजर को बिना समझे कुछ खरीदने या सब्सक्रिप्शन लेने के लिए प्रेरित करने में करते हैं. उदाहरण के तौर पर क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे Zepto और Blinkit पर कई बार छिपे हुए चार्ज, ऑटो-सेलेक्ट सब्सक्रिप्शन या काउंटडाउन टाइमर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है.

ऐसे तरीके उपभोक्ताओं के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं और कई बार लोग बिना जरूरत के भी खरीदारी कर लेते हैं. इसी वजह से भारत में Central Consumer Protection Authority यानी CCPA ने डार्क पैटर्न पर सख्ती दिखानी शुरू कर दी है. नियामकों का कहना है कि ऑनलाइन कंपनियों को पारदर्शिता रखनी होगी और उपभोक्ताओं को साफ-साफ जानकारी देनी होगी. विशेषज्ञों के मुताबिक डिजिटल सुविधा का फायदा तभी है जब उपभोक्ता जागरूक रहें और किसी भी ऑफर या चार्ज को ध्यान से पढ़कर ही फैसला लें.

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