एवरेस्ट नेपाल के लिए सिर्फ पहाड़ नहीं, कमाई की चोटी! करोड़ों की रॉयल्टी और अरबों का टूरिज्म कारोबार, समझिए पूरा हिसाब
एक पर्वतारोही के एवरेस्ट पहुंचने से सिर्फ पहाड़ नहीं चढ़ा जाता, बल्कि नेपाल की अर्थव्यवस्था में पैसा भी उतरता है. हर साल दुनिया भर से लोग माउंट एवरेस्ट फतह करने नेपाल पहुंचते हैं. तो सवाल है कि नेपाल एवरेस्ट से कितना कमाता है? और आखिर नेपाल का पूरा टूरिज्म कारोबार कितना बड़ा है?
Highlights
- सिर्फ एवरेस्ट नहीं, 29 पहाड़ों से 117 करोड़ की रॉयल्टी.
- एवरेस्ट की ताकत सिर्फ उसकी ऊंचाई में नहीं, ग्लोबल अपील में भी है.
- GDP में पर्यटन का योगदान लगभग 6.6% से 6.7% है.
दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ना किसी भी पर्वतारोही के लिए उपलब्धि है, लेकिन नेपाल के लिए यही चढ़ाई एक बड़ा कारोबार है. हर साल दुनिया भर से लोग माउंट एवरेस्ट फतह करने नेपाल पहुंचते हैं. कोई परमिट के लिए पैसा देता है, कोई गाइड और पोर्टर की सेवाएं लेता है, कोई होटल में रुकता है और कोई ट्रैवल एजेंसी के जरिए पूरा मिशन तैयार करता है. एक पर्वतारोही के एवरेस्ट पहुंचने से सिर्फ पहाड़ नहीं चढ़ा जाता, बल्कि नेपाल की अर्थव्यवस्था में पैसा भी उतरता है.
इस साल कहानी और दिलचस्प है. साल 2026 में सिर्फ माउंट एवरेस्ट से नेपाल सरकार को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की रॉयल्टी मिली है. अगर पूरे नेपाल के पर्यटन कारोबार को देखें तो एक साल में विदेशी पर्यटकों से होने वाली विदेशी मुद्रा आय 88.66 अरब नेपाली रुपये तक पहुंच चुकी है. तो सवाल है कि नेपाल एवरेस्ट से कितना कमाता है? और आखिर नेपाल का पूरा टूरिज्म कारोबार कितना बड़ा है?
पहले एवरेस्ट की कमाई समझिए
माउंट एवरेस्ट से नेपाल सरकार को इस सीजन में 1.01 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा की रॉयल्टी मिली है. 7 मई 2026 तक एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए 47 अभियान दल के 464 पर्वतारोहियों को परमिट मिल चुके थे. इन परमिट से सरकार को ठीक-ठीक 1,01,28,23,925 नेपाली रुपये की रॉयल्टी मिली. यानी अकेले एवरेस्ट ने सरकारी खजाने में 100 करोड़ नेपाली रुपये से ज्यादा डाल दिए. डॉलर में यह रकम करीब 7.19 मिलियन अमेरिकी डॉलर बैठती है.
ध्यान रखिए यह सिर्फ रॉयल्टी है. इसमें पर्वतारोहियों के होटल, ट्रांसपोर्ट, गाइड, पोर्टर, ट्रैवल एजेंसियों और दूसरी सेवाओं पर होने वाला खर्च शामिल नहीं है. मतलब एवरेस्ट से पैदा होने वाली वास्तविक आर्थिक गतिविधि सिर्फ सरकार को मिलने वाली रॉयल्टी से कहीं ज्यादा व्यापक है.
एवरेस्ट से नेपाल की कमाई क्यों बढ़ी?
इस कमाई के पीछे एक बड़ा कारण पर्वतारोहण परमिट की फीस में किया गया बदलाव है. नेपाल सरकार ने पर्वतारोहण रॉयल्टी शुल्क में बदलाव किया. इसके बाद एवरेस्ट से मिलने वाली सरकारी रॉयल्टी में बड़ा उछाल देखने को मिला. यानी नेपाल ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को सिर्फ पर्यटन आकर्षण की तरह नहीं देखा, बल्कि उससे मिलने वाले सरकारी राजस्व को भी बढ़ाने की कोशिश की.
सिर्फ एवरेस्ट नहीं, 29 पहाड़ों से 117 करोड़ की रॉयल्टी
अगर आपको लगता है कि नेपाल की पर्वतारोहण कमाई सिर्फ एवरेस्ट तक सीमित है तो तस्वीर थोड़ी बड़ी है. मौजूदा सीजन में नेपाल के 29 अलग-अलग पहाड़ों पर चढ़ाई के लिए 1,072 पर्वतारोहियों को परमिट जारी किए गए. इन सभी पर्वतारोहण अभियानों से नेपाल सरकार को करीब 1.17 अरब नेपाली रुपये की रॉयल्टी मिली. यानी 29 पहाड़ों से करीब 117 करोड़ नेपाली रुपये और इसमें सबसे बड़ा योगदान एवरेस्ट का है.
55 देशों के लोग एवरेस्ट चढ़ने पहुंचे
एवरेस्ट की ताकत सिर्फ उसकी ऊंचाई में नहीं, उसकी ग्लोबल अपील में भी है. इस सीजन 55 देशों के पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट के लिए परमिट लिया. आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका से 76, भारत से 95, ब्रिटेन से 74, जर्मनी से 71 और रूस से 69 पर्वतारोहियों शामिल थे.
नेपाल का टूरिज्म कारोबार
अब एवरेस्ट की कमाई को नेपाल के पूरे पर्यटन कारोबार के सामने रखकर देखिए. नेपाल राष्ट्र बैंक के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024/25 में 11.46 लाख अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों से नेपाल को 88.66 अरब नेपाली रुपये की विदेशी मुद्रा आय हुई. यानी एक तरफ एवरेस्ट से एक सीजन में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की सरकारी रॉयल्टी है, तो दूसरी तरफ पूरे पर्यटन क्षेत्र से एक वित्त वर्ष में करीब 88.66 अरब रुपये की विदेशी मुद्रा आय.
यही अंतर बताता है कि एवरेस्ट नेपाल के टूरिज्म कारोबार का बड़ा चेहरा जरूर है, लेकिन पूरा कारोबार नहीं है.
- नेपाल के कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में पर्यटन का योगदान लगभग 6.6% से 6.7% है.
- यह क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 11.9 लाख (1.19 मिलियन) लोगों को रोजगार देता है, जो देश के कुल रोजगार का 15% से अधिक है.
- पर्यटन देश के लिए विदेशी मुद्रा कमाने के सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक है.
सबसे ज्यादा कमाई कब हुई?
नेपाल में पर्यटन की कमाई पूरे साल एक जैसी नहीं रहती. आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा मासिक आय पर्वतारोहण के पीक सीजन के दौरान देखने को मिलती है. मध्य मार्च से मध्य अप्रैल के बीच 1.24 लाख पर्यटकों से नेपाल को 9.87 अरब नेपाली रुपये की आय हुई.
इसके बाद मध्य अप्रैल से मध्य मई के दौरान 1.05 लाख पर्यटकों से 9.16 अरब रुपये की कमाई हुई. वहीं मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर के दौरान 1.23 लाख पर्यटकों से 9.14 अरब रुपये की विदेशी मुद्रा आय हुई.
यानी नेपाल में पर्यटन का पीक सीजन सीधे कमाई में भी दिखाई देता है.
जुलाई-अगस्त में भी पर्यटन आय बढ़ी
मध्य जुलाई से मध्य अगस्त 2025 के दौरान नेपाल के पर्यटन क्षेत्र ने 5.37 अरब नेपाली रुपये की विदेशी मुद्रा आय अर्जित की. पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह रकम 4.77 अरब रुपये थी. यानी साल-दर-साल इसमें 12.70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. यह बताता है कि नेपाल का पर्यटन कारोबार सिर्फ पर्वतारोहण के पीक सीजन पर टिका हुआ नहीं है.
विदेशी निवेशकों को भी दिख रहा है बड़ा मौका
नेपाल के पर्यटन कारोबार में सिर्फ पर्यटक ही पैसा नहीं ला रहे, निवेशक भी पैसा लगा रहे हैं. Department of Industry के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025/26 में मध्य सितंबर तक 79 पर्यटन इंडस्ट्रीज रजिस्टर हुए. इन उद्योगों ने कुल 6.69 अरब नेपाली रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई. यानी एक महीने के आंकड़ों में ही पर्यटन क्षेत्र के लिए करीब 669 करोड़ नेपाली रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता सामने आई.
विदेशी निवेश में टूरिज्म की हिस्सेदारी भी बड़ी
मध्य अगस्त से मध्य सितंबर 2025 के दौरान नेपाल में विदेशी निवेश वाली 236 इंडस्ट्रीज ने कुल 33 अरब नेपाली रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई. इसमें अकेले पर्यटन क्षेत्र की 79 इंडस्ट्रीज की तरफ से 6.69 अरब रुपये की प्रतिबद्धता थी. यानी कुल विदेशी निवेश करीब 20 फीसदी प्रतिबद्धता पर्यटन क्षेत्र से आई.
यह आंकड़ा बताता है कि नेपाल में टूरिज्म सिर्फ पर्यटकों की संख्या बढ़ाने का कारोबार नहीं है. इसके पीछे निवेश का भी एक बड़ा बाजार तैयार हो रहा है.
एक तरफ दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ने के लिए दुनिया भर के देशों के लोग नेपाल पहुंचते हैं. दूसरी तरफ पूरे साल लाखों विदेशी पर्यटक नेपाल आते हैं. सरकार को पर्वतारोहण से रॉयल्टी मिलती है, पर्यटन से विदेशी मुद्रा आती है और विदेशी निवेशक टूरिज्म उद्योग में पैसा लगाने की प्रतिबद्धता जताते हैं.
यानी नेपाल की असली ताकत सिर्फ उसके पहाड़ नहीं हैं, बल्कि उसने इन पहाड़ों को एक बड़े पर्यटन कारोबार में बदल दिया है. और इस कारोबार का सबसे चमकदार नाम माउंट एवरेस्ट है.
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