HSBC का भारत में अमीर क्लाइंट्स को ग्रोथ के लिए बढ़ावा देने पर जोर, बैंक का है छोटे शहरों में पहुंचने का प्लान
ग्रोथ की इस कोशिश से HSBC का मुकाबला ICICI बैंक लिमिटेड और कोटक महिंद्रा लिमिटेड जैसे बड़े लोकल राइवल्स से सीधे तौर पर होगा, जो भारत के तेजी से बढ़ते वेल्थ मार्केट में अपनी जगह बनाना चाहते हैं.
Highlights
- बैंक भारत में निवेश बढ़ाने की योजना बना रहा है.
- देश में विदेशी बैंकों में स्टैंडर्ड चार्टर्ड का नेटवर्क सबसे बड़ा है.
- पिछले चार साल में HSBC का मॉर्गेज पोर्टफोलियो तीन गुना हो गया है.
HSBC होल्डिंग्स Plc का लक्ष्य भारत के प्राइवेट-सेक्टर बैंकों को चुनौती देना है. उसे उम्मीद है कि देश में अमीर ग्राहकों और दुनिया भर से जुड़े नागरिकों की बढ़ती संख्या उसकी ग्रोथ के अगले चरण को बढ़ावा दे सकती है, क्योंकि वह छोटे शहरों में अपनी पहुंच बढ़ा रही है. लंदन बेस्ड यह बैंक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था में तीन क्षेत्रों- वेल्थ (संपत्ति प्रबंधन), ट्रांजैक्शन बैंकिंग और जिसे HSBC के इंडिया CEO हितेंद्र दवे ग्लोबिलिटी कहते हैं, पर जोर दे रहा है.
इसके लिए वह अपने इंटरनेशनल नेटवर्क का इस्तेमाल करके ऐसे क्लाइंट्स की जरूरतों को पूरा कर रहा है जिनका बिजनेस और संपत्ति कई देशों में फैली हुई है.
टॉप 5 के बैंकों में शामिल होने का लक्ष्य
मुंबई स्थित एग्जीक्यूटिव ने एक इंटरव्यू में वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस का जिक्र करते हुए कहा, ‘हमारा लक्ष्य 2030 तक भारत के टॉप चार या पांच प्राइवेट बैंकों में से एक बनना है.’
ग्रोथ की इस कोशिश से HSBC का मुकाबला ICICI बैंक लिमिटेड और कोटक महिंद्रा लिमिटेड जैसे बड़े लोकल राइवल्स से सीधे तौर पर होगा, जो भारत के तेजी से बढ़ते वेल्थ मार्केट में अपनी जगह बनाना चाहते हैं. फिर भी, इस मार्केट में काम करना मुश्किल है, क्योंकि घरेलू बैंक अपना दायरा बढ़ा रहे हैं, जबकि सीनियर बैंकरों द्वारा शुरू की गई कंपनियां क्लाइंट्स और टैलेंट के लिए मुकाबला कर रही हैं, जिससे रिलेशनशिप मैनेजरों की सैलरी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है.
बैंक भारत में बढ़ा रहा कारोबार
HSBC, स्टैंडर्ड चार्टर्ड Plc और बार्कलेज Plc उन कुछ विदेशी बैंकों में शामिल हैं, जो भारत में अपना वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस बढ़ा रहे हैं, जबकि कुछ ग्लोबल बैंकों ने यहां से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं. सिटीग्रुप इंक. ने अपनी इंडियन कंज्यूमर बैंकिंग यूनिट एक्सिस बैंक लिमिटेड को बेच दी, जबकि कोटक ने इस साल भारत में डॉयचे बैंक AG के रिटेल और वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस को खरीदने का समझौता किया.
अमीर ग्राहकों पर फोकस
विदेशी बैंकों को अपने घरेलू राइवल्स की तुलना में ब्रांच खोलने पर अधिक सख्त नियमों का सामना करना पड़ता है, जिससे देश भर में नेटवर्क बनाना मुश्किल हो जाता है. UK के इस बैंक की यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब ग्रुप CEO जॉर्जेस एल्हेडेरी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि बैंक भारत में निवेश बढ़ाने की योजना बना रहा है और अमीर ग्राहकों पर अधिक ध्यान दे रहा है.
कंपनी की योजना अगले दो साल में भारत के 34 शहरों में अपनी ब्रांच की संख्या मौजूदा 34 से बढ़ाकर 46 करने की है, ताकि छोटे शहरों में भी अपनी पहुंच बढ़ाई जा सके. नई जगहों में पूर्व में भुवनेश्वर, पश्चिम में राजकोट, उत्तर में जालंधर और दक्षिण में मैसूरु शामिल हैं. देश में विदेशी बैंकों में स्टैंडर्ड चार्टर्ड का नेटवर्क सबसे बड़ा है, जिसकी 80 ब्रॉन्च हैं.
कैसे ग्राहकों को टारगेट करता है बैंक?
छोटे शहरों में अमीर लोगों की बढ़ती संख्या की ओर इशारा करते हुए डेव ने कहा, ‘हम भारत के मेट्रो शहरों से आगे बढ़कर एक वेल्थ फ्रैंचाइजी बना रहे हैं.’ HSBC का प्राइवेट बैंक आम तौर पर उन ग्राहकों को टारगेट करता है जिनके पास निवेश करने लायक कम से कम 2 मिलियन डॉलर की संपत्ति होती है.
डेव ने भारतीय अमीरों की अगली पीढ़ी को अधिक ‘ग्लोबल’ बताया, क्योंकि ज्यादा भारतीय विदेशों में पढ़ाई और काम कर रहे हैं, इंटरनेशनल बिजनेस बना रहे हैं और दुनिया भर में निवेश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘हम उन ग्राहकों के लिए खास तौर पर मददगार हो सकते हैं जिनकी फाइनेंशियल जिंदगी, बिजनेस और संपत्ति कई देशों में फैली हुई है.
मिल रहा है फायदा
कंपनी के विस्तार का फायदा भी मिल रहा है. HSBC हाल ही में एक खास फॉरेन-एक्सचेंज स्वैप प्रोग्राम के तहत भारत के बड़े प्रवासी समुदाय को लोन देने वाला सबसे बड़ा बैंक बनकर उभरा है, जिसने तीन महीनों में GIFT सिटी से 10.9 अरब डॉलर का लोन दिया. ICICI बैंक 8.4 अरब डॉलर के साथ दूसरे नंबर पर रहा.
HSBC अमीर ग्राहकों के साथ रिश्ते मजबूत करने के लिए प्रीमियम क्रेडिट कार्ड और बड़े मॉर्गेज (होम लोन) का भी इस्तेमाल कर रहा है. इसके प्रीमियम कार्ड की सालाना फीस 110,000 रुपये (1,147 डॉलर) तक हो सकती है, जबकि पिछले चार साल में इसका मॉर्गेज पोर्टफोलियो तीन गुना हो गया है.
बकाया मॉर्गेज में इजाफा
बैंक के अनुसार, 31 मार्च तक बकाया मॉर्गेज एक साल पहले की तुलना में 25% बढ़कर 257 अरब रुपये हो गया, क्योंकि बैंक ने प्रीमियम घरों के लिए बड़े लोन पर ध्यान केंद्रित किया. डेव ने कहा कि ट्रांजैक्शन बैंकिंग इस रणनीति का एक और अहम हिस्सा है, जिसमें बैंक कंपनियों को पेरोल प्रोसेस करने, फॉरेन-एक्सचेंज पेमेंट करने, डिविडेंड बांटने और लिक्विडिटी मैनेज करने में मदद करता है.
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