चाइनीज FDI का खुला दरवाजा, सरकार ने दी बड़ी ढील; बॉर्डर वाले देशों से विदेशी निवेश की राह आसान
केंद्र सरकार ने भारत से जमीन सीमा साझा करने वाले देशों के लिए विदेशी निवेश (FDI) से जुड़े नियमों में बदलाव करने का फैसला किया है. कोविड काल में लागू किए गए सख्त नियमों के बाद अब निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है. इस फैसले से चीन, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे देशों से आने वाले निवेश पर असर पड़ सकता है.
Govt Eases FDI Rules For Border Countries: प्रधानमंत्री की अगुवाई में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की बैठक में विदेशी निवेश से जुड़े नियमों में एक अहम बदलाव किया गया है. सरकार ने उन देशों के लिए फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) से जुड़े नियमों में ढील देने का फैसला किया है जिनकी सीमा भारत से लगती है. इनमें चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान जैसे देश शामिल हैं. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत विदेशी निवेश को आकर्षित करने और निवेश माहौल को ज्यादा लचीला बनाने की कोशिश कर रहा है. सरकार का मानना है कि संशोधित नियमों से निवेश प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और संतुलित बनाया जा सकेगा.
कोविड के दौरान लागू हुआ था सख्त नियम
दरअसल, साल 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान भारत सरकार ने प्रेस नोट-3 जारी किया था. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि आर्थिक मंदी के दौरान विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों का “opportunistic takeover” यानी सस्ते में अधिग्रहण न कर सकें. 22 अप्रैल 2020 को लागू किए गए इस नियम के तहत भारत से जमीन सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले किसी भी निवेश को “ऑटोमैटिक रूट” के बजाय “गवर्नमेंट रूट” के तहत मंजूरी लेनी अनिवार्य कर दी गई थी. इसका मतलब यह था कि ऐसे देशों से निवेश करने वाली कंपनियों या उनके लाभार्थी मालिकों को पहले केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होती थी. 2022 में जारी एक नोटिफिकेशन में भी स्पष्ट किया गया था कि अगर किसी निवेशक का “beneficial owner” ऐसे किसी देश में स्थित है या वह वहां का नागरिक है, तो भी निवेश केवल सरकारी मंजूरी के बाद ही संभव होगा.
किन देशों पर लागू था यह नियम?
यह नियम उन सभी देशों पर लागू होता है जिनकी जमीन सीमा भारत से लगती है. इनमें प्रमुख रूप से चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं. इन देशों से आने वाले निवेश के लिए अब तक सख्त मंजूरी प्रक्रिया लागू थी.
भारत-चीन संबंधों की पृष्ठभूमि
2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था. यह कई दशकों में दोनों देशों के बीच सबसे गंभीर सैन्य टकरावों में से एक था. इसके बाद भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा के मद्देनजर 200 से ज्यादा चीनी मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था. इनमें TikTok, WeChat और Alibaba का UC Browser जैसे लोकप्रिय ऐप्स शामिल थे.
भारत में चीनी निवेश की स्थिति
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भारत में कुल FDI इक्विटी प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी काफी सीमित रही है. अप्रैल 2000 से दिसंबर 2021 के बीच भारत में आए कुल FDI में चीन का हिस्सा लगभग 0.43 फीसदी रहा, जो करीब 2.45 अरब डॉलर के बराबर है. इस आधार पर भारत में निवेश करने वाले देशों की सूची में चीन करीब 20वें स्थान पर रहा. हालांकि निवेश के मामले में चीन की हिस्सेदारी कम है, लेकिन व्यापार के स्तर पर चीन भारत का एक बड़ा साझेदार बना हुआ है.
बीजिंग भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है. वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत का चीन को निर्यात घटकर 14.25 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष 16.66 अरब डॉलर था. इसके विपरीत, चीन से आयात बढ़कर 113.45 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो एक साल पहले 101.73 अरब डॉलर था. इस वजह से भारत का व्यापार घाटा भी बढ़कर 99.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि इससे पहले यह लगभग 85 अरब डॉलर था.
चालू वित्त वर्ष के आंकड़े
अप्रैल से जनवरी 2025-26 के दौरान भारत के चीन को निर्यात में तेज वृद्धि देखने को मिली. इस अवधि में निर्यात लगभग 38.37 फीसदी बढ़कर 15.88 अरब डॉलर तक पहुंच गया. वहीं चीन से आयात भी 13.82 फीसदी बढ़कर 108.18 अरब डॉलर हो गया. इसके चलते इस अवधि में भारत का व्यापार घाटा करीब 92.3 अरब डॉलर रहा. कैबिनेट बैठक में केवल एफडीआई नियमों में बदलाव ही नहीं किया गया, बल्कि कई दूसरे अहम विधायी प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई. सरकार ने IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) संशोधन विधेयक 2025 को भी मंजूरी दी है.
यह संशोधन सेलेक्ट कमेटी की सिफारिशों के आधार पर किया गया है ताकि दिवाला समाधान प्रक्रिया को अधिक सुचारु और प्रभावी बनाया जा सके. इसके अलावा कैबिनेट ने कॉरपोरेट लॉज (संशोधन) विधेयक को भी मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े नियमों को अपडेट करना और व्यावसायिक माहौल को अधिक सरल बनाना है.
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