तेल संकट के बीच क्या ऐसा भी हो सकता है? डेली केवल खरीद पाएं इतना पेट्रोल, हर माह ना मिले LPG, सरकार के पास है ये ‘अचूक बाण’
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई प्रभावित होने के बीच भारत सरकार ने गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए Essential Commodities Act, 1955 लागू किया है. इसके तहत PNG, CNG और LPG को प्राथमिकता दी जाएगी. अब सवाल यह है कि जरूरत पड़ने पर सरकार पेट्रोल-डीजल और गैस की खरीद पर भी राशनिंग या लिमिट तय कर सकती है? आइये जानते हैं.
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण गैस सप्लाई प्रभावित होने के बीच भारत सरकार ने देश में एसेंशियल कमोडिटी एक्ट (Essential Commodities Act) 1955 लागू किया है ताकि गैस की सप्लाई बिना रुकावट जारी रह सके. वहीं, क्रूड ऑयल के संकट को देखते हुए पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अगले दो महीनों तक सरकारी विभागों के ईंधन भत्ते में 50% की कटौती कर दी है. इसके अलावा बसों और एंबुलेंस को छोड़कर 60% सरकारी वाहनों को सड़कों से हटा दिया गया है. अब सवाल यह है कि क्या भारत में भी सरकार गैस व डीजल-पेट्रोल पर राशनिंग लगा सकती है?
क्या कदम उठाया गया?
सरकारी आदेश के मुताबिक, अब कुछ सेक्टरों को प्राथमिकता के आधार पर नेचुरल गैस की सप्लाई दी जाएगी. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आई हैं. घरेलू PNG, CNG, LPG उत्पादन और पाइपलाइन कंप्रेसर फ्यूल के लिए 100% सप्लाई जारी रहेगी.
क्या है Essential Commodities Act, 1955?
Essential Commodities Act, 1955 ऐसा कानून है जिसे इस उद्देश्य से बनाया गया था कि अगर किसी जरूरी वस्तु की सप्लाई रुक जाए तो आम लोगों के दैनिक जीवन पर असर न पड़े. यह कानून केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि वह जरूरी वस्तुओं (जैसे खाद्य पदार्थ, उर्वरक, दवाइयां और ईंधन) के उत्पादन, सप्लाई, वितरण, व्यापार और कारोबार को नियंत्रित या सीमित कर सके. इस कानून का इस्तेमाल जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम कमी को रोकने के लिए किया जाता है. केंद्र सरकार अधिसूचना जारी कर इस सूची में जरूरत के अनुसार नई वस्तुएं जोड़ या हटा सकती है.
आवश्यक वस्तुओं में क्या-क्या शामिल
| क्रमांक | आवश्यक वस्तु (Essential Commodity) |
|---|---|
| 1 | उर्वरक (Fertilisers) |
| 2 | खाद्य पदार्थ, जिनमें खाद्य तिलहन और खाद्य तेल शामिल हैं |
| 3 | पूरी तरह कपास से बना हैंक यार्न (Hank Yarn) |
| 4 | पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पाद |
| 5 | कच्चा जूट और जूट वस्त्र |
| 6 | खाद्य फसलों के बीज |
| 7 | पशु चारा (Cattle Fodder) |
| 8 | फल और सब्जियां |
| 9 | दवाइयां (Drugs) |
2020 में हुआ संसोधन
साल 2020 में संसद ने इस कानून में संशोधन किया था जिसके तहत केंद्र सरकार की शक्तियों को सीमित कर दिया गया. संशोधन के बाद केंद्र सरकार अब अनाज, दालें, आलू, प्याज, खाद्य तिलहन और खाद्य तेल जैसे कृषि उत्पादों को केवल असाधारण परिस्थितियों में ही नियंत्रित कर सकती है. इन असाधारण परिस्थितियों में युद्ध, अकाल, असाधारण महंगाई या गंभीर प्राकृतिक आपदा जैसी स्थितियां शामिल हैं.
इसके अलावा संशोधन में यह भी प्रावधान किया गया कि किसी कृषि उत्पाद पर स्टॉक लिमिट तभी लगाई जा सकती है, जब बागवानी उत्पादों की रिटेल कीमत में 100% की वृद्धि या नॉन-पेरिशेबल कृषि खाद्य पदार्थों की रिटेल कीमत में 50% की बढ़ोतरी हो जाए.
अभी यह कानून क्यों लागू किया गया?
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक देश है. पिछले साल देश में करीब 33.15 मिलियन मीट्रिक टन LPG की खपत हुई थी. भारत की LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है और 80% से ज्यादा LPG आयात हॉर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है हालिया संघर्ष के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है जिससे सप्लाई पर असर पड़ा है.
इस कानून के तहत सरकार को क्या अधिकार मिलते हैं?
इस कानून की धारा 3 केंद्र सरकार को जरूरी वस्तुओं के उत्पादन, सप्लाई और वितरण को नियंत्रित करने की व्यापक शक्तियां देती है. इसके तहत सरकार जरूरत पड़ने पर किसी वस्तु के उत्पादन या रिफाइनिंग को नियंत्रित या सीमित कर सकती है. सरकार सप्लाई चेन को भी नियंत्रित कर सकती है और तय कर सकती है कि देश के अलग-अलग राज्यों में जरूरी वस्तुओं का वितरण कैसे किया जाएगा. इसके अलावा सरकार जरूरत पड़ने पर जरूरी वस्तुओं की कीमत तय कर सकती है या अधिकतम कीमत (प्राइस कैप) लागू कर सकती है ताकि बाजार में कीमतों की अस्थिरता से आम लोगों की पहुंच प्रभावित न हो. इस कानून के तहत सरकार व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और रिटेलर्स के लिए स्टॉक लिमिट भी तय कर सकती है ताकि जमाखोरी को रोका जा सके.
क्या गैस-तेल पर सरकार लगा सकती है राशनिंग?
पश्चिम एशिया में जारी टेंशन के बीच सरकार ने यह कदम गैस की जमाखोरी रोकने और सभी उपभोक्ताओं को समान रूप से सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की रीफिल बुकिंग के नियमों में बदलाव करते हुए 25 दिन का इंटर बुकिंग पीरियड लागू किया है. यानी अब उपभोक्ता एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेंडर 21 दिन के बजाय 25 दिन बाद ही बुक कर सकेंगे.
ऐसे में अगर ऑयल या तेल संकट गहराता है तो सरकार एसेंशियल कमोडिटी एक्ट के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल कर गैस और पेट्रोल की खरीदारी पर राशनिंग लगा सकती है. ऐसे में सरकार हर दिन कोई कितने लीटर पेट्रोल-डीजल खरीदेगा यह तय कर सकती है. इसी तरह कोई परिवार हर महीने कितने गैस सिलेंडर खरीद सकता है इस पर भी सरकार लिमिट लगा सकती है.
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