भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट, एक हफ्ते में 11.68 अरब डॉलर की कमी; गोल्ड रिजर्व भी घटा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 6 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11.68 अरब डॉलर घटकर 716.81 अरब डॉलर रह गया. इससे पहले यह रिकॉर्ड 728.49 अरब डॉलर तक पहुंच गया था. गिरावट की सबसे बड़ी वजह फॉरेन करेंसी एसेट्स में कमी रही, जबकि गोल्ड रिजर्व, SDR और IMF पोजिशन में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई है.
India Forex Reserve: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व में पिछले सप्ताह तेज गिरावट दर्ज की गई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक 6 मार्च को समाप्त सप्ताह के दौरान देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 11.683 अरब डॉलर घटकर 716.81 अरब डॉलर रह गया. इससे पहले वाले सप्ताह में भारत का फॉरेक्स रिजर्व 4.885 अरब डॉलर बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था.
विदेशी मुद्रा संपत्तियों में सबसे बड़ी कमी
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह फॉरेन करेंसी एसेट्स (Foreign Currency Assets) में आई कमी रही. यह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होता है. रिपोर्टिंग सप्ताह में विदेशी मुद्रा संपत्तियां 9.88 अरब डॉलर घटकर 563.245 अरब डॉलर रह गईं. फॉरेन करेंसी एसेट्स में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य प्रमुख मुद्राओं में रखी गई संपत्तियां भी शामिल होती हैं. इन मुद्राओं के डॉलर के मुकाबले मजबूत या कमजोर होने का असर भी रिजर्व के कुल मूल्य पर पड़ता है.
सोने के भंडार में भी आई गिरावट
इस दौरान भारत के गोल्ड रिजर्व में भी कमी दर्ज की गई. आंकड़ों के मुताबिक देश के गोल्ड रिजर्व का मूल्य 1.612 अरब डॉलर घटकर 130.017 अरब डॉलर रह गया.
SDR और IMF पोजीशन में भी कमी
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से जुड़े विशेष आहरण अधिकार यानी स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) भी कम हुए हैं. रिपोर्टिंग सप्ताह में SDR का मूल्य 146 मिलियन डॉलर घटकर 18.720 अरब डॉलर रह गया. वहीं IMF के साथ भारत की रिजर्व पोजिशन भी थोड़ी कम हुई है. यह 45 मिलियन डॉलर घटकर 4.828 अरब डॉलर पर आ गई.
क्यों अहम होता है फॉरेक्स रिजर्व
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता का अहम संकेतक माना जाता है. यह रिजर्व आयात भुगतान, विदेशी कर्ज चुकाने और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए अहम होता है. भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े विदेशी मुद्रा भंडारों में से एक है, जिससे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में भी देश को वित्तीय सुरक्षा का एक मजबूत आधार मिलता है. हालांकि, हाल के हफ्तों में इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जो वैश्विक मुद्रा बाजार और पूंजी प्रवाह से भी प्रभावित होता है.
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