रुपये में ऐतिहासिक गिरावट, डॉलर के मुकाबले पहली बार 95 के नीचे; नहीं काम आ रही RBI की कोशिश
मार्च महीने में अब तक (शुक्रवार तक), घरेलू करेंसी में 4 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है. इसके चलते, यह पिछले सात वर्षों में अपने सबसे खराब मंथली प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है. सोमवार की सुबह रुपये में तेजी देखने को मिली थी और ये 130 पैसे के करीब उछला था.
सोमवार को भारतीय रुपया एक नए ऐतिहासिक निचले स्तर पर गिरकर आ गया. शुरुआती बढ़त के बावजूद रुपये में यह गिरावट इसलिए आई क्योंकि इकोनॉमिक फंडामेंटल फैक्टर्स करेंसी के पक्ष में नहीं थे. रुपया पहली बार 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से नीचे गिरकर 95.20 प्रति डॉलर पर आ गया है. इस तरह दिन भर में इसमें 0.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
मार्च महीने में अब तक (शुक्रवार तक), घरेलू करेंसी में 4 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है. इसके चलते, यह पिछले सात वर्षों में अपने सबसे खराब मंथली प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है. शुक्रवार को, इसमें लगभग 1 फीसदी की गिरावट आई और यह 94.84 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया.
रिजर्व बैंक ने बनाया नया नियम
सोमवार की सुबह रुपये में तेजी देखने को मिली थी और ये 130 पैसे के करीब उछला था. लेकिन बढ़ते कारोबार के साथ इसने बढ़त गंवा दी और 95 रुपये के लेवल से नीच चल गया. रुपये में आ रही गिरावट को कंट्रोल करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकों के लिए नया नियम बनाया है. अब बैंकों को डॉलर में अपनी ओपन पोजीशन 100 मिलियन डॉलर के भीतर ही रखनी होगी. इसका मतलब है कि बैंक ज्यादा मात्रा में डॉलर रिजर्व नहीं रख पाएंगे.
इस फैसले के बाद रुपया 93.59 प्रति डॉलर तक मजबूत हुआ था. लेकिन दिन के कारोबार के बाद ऐसा लग रहा है कि रिजर्व बैंक की कोशिश असफल हो गई. इस स्थिति में साफ नजर आ रहा है कि रिजर्व बैंक को रुपये की गिरावट को रोकने के लिए और अधिक कदम उठाने होंगे.
बैंकों ने कम की डॉलर होल्डिंग्स
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट से पता चला है कि शुक्रवार देर रात बैंकों की ऑनशोर पोजीशन्स पर नई सीमाएं लगाने के RBI के कदम के कारण, बैंकों ने घरेलू बाजार में अपनी डॉलर होल्डिंग्स को कम किया और साथ ही नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) बाजार में अपनी पोजीशन्स बढ़ाईं.
बड़े एक्सपोजर को देखते हुए, जिसका अनुमान 25 अरब डॉलर से 35 अरब डॉलर के बीच है, इस एडजस्टमेंट ने ऑनशोर डॉलर/रुपया दर को NDF दर से काफी नीचे धकेल दिया.
कंपनियों ने ऑनशोर बाजार में डॉलर खरीदकर और उन्हें NDF सेगमेंट में बेचकर इस आर्बिट्रेज के मौके का फायदा उठाया, जिससे रुपये की बढ़त सीमित हो गई और अलग-अलग बाजारों में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला.
इसके साथ ही, बड़े कॉर्पोरेट्स की ओर से अपनी नजदीकी देनदारियों को हेज करने के लिए आयातकों की मजबूत मांग ने भी दबाव डाला, जिससे रुपया अपनी शुरुआती बढ़त गंवा बैठा. बाजार खुलने पर रुपया 1% से अधिक उछलकर 93.60 पर पहुंच गया था.
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