रूस से भारत का तेल आयात 4 साल के निचले स्तर पर, मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ा झुकाव, क्या कहता है लेटेस्ट डेटा
जनवरी में भारत ने रूस से लगभग 11 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया, जो नवंबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है. भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी घटकर 21.2 फीसदी रह गई, जो अक्टूबर 2022 के बाद सबसे कम है. जनवरी में रूस से आयात दिसंबर की तुलना में 23.5 फीसदी कम रहा.
जनवरी महीने में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 2022 के अंत के बाद सबसे कम दर्ज की गई है. इसी अवधि में मिडिल ईस्ट देशों से तेल आपूर्ति का हिस्सा अपने हाई पर पहुंच गया. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयात करने वाला और उपभोक्ता है. यूक्रेन पर मॉस्को के आक्रमण के बाद पश्चिमी देशों द्वारा ठुकराए गए रियायती रूसी तेल की खरीद बढ़ा रहा था. कुछ महीनों में यह आयात 20 लाख बैरल प्रतिदिन से भी अधिक हो गया था. हालांकि, युद्ध को लेकर प्रतिबंधों और अमेरिका के साथ ट्रेड डील करने के दबाव के कारण भारत को रूसी तेल की खरीद कम करनी पड़ी है.
रूस से आयात में तेज गिरावट
रायटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में भारत ने रूस से लगभग 11 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया, जो नवंबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है. भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी घटकर 21.2 फीसदी रह गई, जो अक्टूबर 2022 के बाद सबसे कम है. जनवरी में रूस से आयात दिसंबर की तुलना में 23.5 फीसदी कम रहा और पिछले वर्ष की तुलना में लगभग एक-तिहाई घट गया.
केप्लर के रिफाइनिंग और मॉडलिंग विभाग के प्रमुख रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोला के अनुसार, फरवरी में आयात औसतन 10 से 12 लाख बैरल प्रतिदिन के बीच रह सकता है, जबकि मार्च में यह घटकर करीब 8 लाख बैरल प्रतिदिन तक आ सकता है. उन्होंने कहा, “फरवरी के आंकड़े समय-निर्धारण के कारण थोड़ा कम दिखाई दे सकते हैं, क्योंकि कुछ महीने के अंत में आने वाले कार्गो की डिलीवरी अगले महीने दर्ज होती है. साथ ही रितोला ने यह भी बताया कि मध्यम अवधि में भारत को रूस से तेल आपूर्ति धीरे-धीरे घटती. दिख सकती है, हालांकि पूरी तरह बंद होने की संभावना नहीं है.
मिडिल ईस्ट की ओर झुकाव
रूसी तेल की कम खरीद की भरपाई के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने मिडिल ईस्ट, दक्षिण अमेरिकी देशों और पश्चिमी देशों से वैकल्पिक ग्रेड की खरीद बढ़ाई है. जनवरी में भारत के कुल तेल आयात में मिडिल ईस्ट देशों की हिस्सेदारी लगभग 55 फीसदी रही, जबकि लैटिन अमेरिकी देशों से आयात का हिस्सा बढ़कर करीब 10 फीसदी पर पहुंच गया, जो पिछले 12 महीनों का हाई है.
अमेरिका का दबाव और ट्रेड डील
अमेरिका ने पहले रूस से तेल खरीद को लेकर भारत के उत्पादों पर टैरिफ दिया था, लेकिन एक अंतरिम ट्रेड डील के तहत अमेरिका ने टैरिफ दर घटाकर 18 फीसदी कर दी और 25 फीसदी का पेनाल्टी हटा लिया. अमेरिका का कहना है कि भारत ने मॉस्को से तेल खरीद रोकने पर सहमति जताई है. ट्रंप प्रशासन चाहता है कि भारत अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से खरीद बढ़ाए.
