इंडिगो जैसा संकट, टेलीकाम, ई-कॉमर्स में हो जाए तो कौन बनेगा बंधक….कभी सोचा है फिर क्या होगा?

अफरातफरी का आलम ऐसा है कि जैसे कि एयरपोर्ट पर लॉकडाउन लग गया हो. जी हां ये सब देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के मिसमैनेजमेंट से हो रहा है. वो भी एक ऐसी लापरवाही के लिए जिसकी जिम्मेदार वह खुद है.साफ है कि किसी भी सेक्टर में एकाधिकार खतरनाक हो सकता है और जिस तरह इंडिगो के कस्टमर बंधक बन गए, वैसा ही हाल दूसरी सेवाओं के कस्टमर के साथ कभी भी हो सकता है.

इंडिगो संकट सरकार के लिए सबक Image Credit: Money9live

Indigo Crisis Explained Monopoly effect on other sectors: देश के हर कोने के बड़े शहरों पर ऐसा ही माहौल है. लाखों हवाई यात्री बेबस हैं. अफरातफरी का आलम ऐसा है कि जैसे कि एयरपोर्ट पर लॉकडाउन लग गया हो. जी हां ये सब देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के मिसमैनेजमेंट से हो रहा है. वो भी एक ऐसी लापरवाही के लिए जिसकी जिम्मेदार वह खुद है. क्योंकि जिस नियम को लागू नहीं कर पाने की वह दुहाई दे रही है. वह FDTL नियम जनवरी 2024 में DGCA द्वारा ऐलान किया गया था और उसे लागू करने का, उसके पास करीब-करीब 2 साल का समय था. तो फिर इंडिगो की लापरवाही का खामियाजा यात्री क्यों भुगत रहे हैं. कभी आपने सोचा कि इंडिगो किस वजह से ऐसी लापरवाही कर पाई. तो इसकी वजह है कि कंपनी का एविएशन इंडस्ट्री में एकाधिकार. जी हां हर रोज करीब 2100 विमान का संचालन करने वाली इंडिगो की बाजार में 60 फीसदी हिस्सेदारी रखती है.

इसका मतलब यह हुआ कि घरेलू एयरलाइन बाजार में उड़ने वाला हर दूसरा विमान इंडिगो का है. मतलब कंपनी के पास देश की एविएशन इंडस्ट्री की चाबी है. जिसे वह जब चाहे ऐठ सकती है. और उसका खामियाजा यात्रियों को ही उठाना पड़ेगा. क्योंकि एयरपोर्ट पर उनको ही बंधक बनना पड़ा है. पैसे उनके फंसे हैं. और अगर वह दूसरी टिकट बुक कराते हैं तो उसके लिए उन्हें हजारों रुपये एक्स्ट्रा चुकाने पड़ रहे हैं. ये यात्री ही है जो अपनी बेटी, पति, बाप और परिवार के दूसरों लोगों के लिए बदहवास होकर एयरपोर्ट पर जानवर जैसे हालात में फंसे हुए हैं.

इंडिगो के इस रवैये पर देश में एक रुपये में हवाई सफर करने का सपना दिखाने वाले एयर डक्कन के फाउंडर कैप्टन गोपीनाथ ने एक लेख में यहां तक लिखा है कि कई रूट पर तो एक साधारण इकोनॉमी सीट की कीमत 1 लाख रुपये तक पहुंच गई! ऐसा लग रहा था मानो IndiGo सरकार से कह रही हो, अगर आप ये नियम लागू करेंगे, तो हम उड़ानें रोक देंगे और पूरे सिस्टम में अफरा-तफरी फैला देंगे. गोपीनाथ ने लिखा है कि IndiGo ऐसा कैसे कर पाई? क्योंकि वह बहुत बड़ी है.और इसी ताकत का नतीजा था कि आखिरकार सरकार ही झुकी और उसने FDTL नियमों को टाल दिया.

इसके पीछे सरकार ने दलील दी कि यह यात्रियों के भले के लिए है, लेकिन सच यह है कि उसके पास और कोई विकल्प नहीं था. देश भर के एयरपोर्ट जंगल जैसे बन गए. अब सरकार ने बढ़ते संकट को देखते हुए किराए की अधिकतम सीमा से लेकर रिफंड फटाफट करने जैसे सख्त निर्देश इंडिगो को दिए हैं. लेकिन इस फौरी राहत में यात्रियों की सुरक्षा अनदेखी हो गई. क्योंकि FDTL (Flight Duty Time Limitations) नियम इसलिए लागू किए गए थे. ताकि पायलटों को उड़ान से पहले पर्याप्त आराम मिल सके और वे सुरक्षित उड़ान भर सकें. इस बीच हमें नहीं भूलना चाहिए अभी जून में अहमदाबाद से लंदन जा रही एयरइंडिया का क्रैश जैसे भीषणा हादसे का सामना भारतीय एयरलाइन इंडस्ट्री कर चुकी हैं. जिसमें 240 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी.

Jio-Airtel हो जाएं ठप

अब जरा सोचिए इंडिगो जैसी क्राइसिस अगर टेलीकॉम सेक्टर में हो जाए. जहां पर Jio और Airtel एकछत्र राज करती हैं. जिनके पास 78 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं और वह देश के 80 फीसदी कस्टमर को कंट्रोल करती हैं. ऐसे में अगर इन दोनों कंपनियों के सामने ऐसा कोई संकट आ गया तो क्या होगा.

अमेजन-फ्लिपकार्ट हो जाएं ठप

इसी तरह सोचिए अगर अमेजन, फ्लिपकार्ट में से कोई अगर सर्विस नहीं दे पाएं तो क्या होगा. इन दोनों को भी इंडिगो जैसा ही हाल है. ई-कॉमर्स सेक्टर में अमेजन और फ्लिपकार्ट की 80 फीसदी के करीब हिस्सेदारी है. तो अगर इंडिगो जैसी क्राइसिस यहां हो जाए तो क्या होगा..

साफ है कि किसी भी सेक्टर में एकाधिकार खतरनाक हो सकता है और जिस तरह इंडिगो के कस्टमर बंधक बन गए, वैसा ही हाल दूसरी सेवाओं के कस्टमर के साथ कभी भी हो सकता है.

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