मार्केट क्रैश में कैसे टिके रहें? क्या है राकेश झुनझुनवाला का गोल्डन रूल, दमानी ने बताई 1987 क्रैश की कहानी
इसी प्रोग्राम में Madhusudan Kela ने भी झुनझुनवाला को याद किया. कठिन समय में झुनझुनवाला की बात निवेशकों को काफी भरोसा देती थी. केला ने कहा कि 2008 Global Financial Crisis और COVID-19 Pandemic जैसे दौर निवेशकों के लिए बेहद मुश्किल थे.
शेयर बाजार में उतार-चढाव आम बात है, लेकिन कठिन समय में निवेशक का रवैया ही तय करता है कि वह लंबे समय में सफल होगा या नहीं. दिग्गज निवेशक रमेश दमानी ने हाल ही में बताया कि उन्होंने दिवंगत निवेशक राकेश झुनझुनवाला से बाजार को लेकर सबसे अहम सबक क्या सीखा? Bombay Stock Exchange के सदस्य रहे दमानी ने एक प्रोग्राम में कहा कि झुनझुनवाला हमेशा भारत की ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा रखने की सलाह देते थे, चाहे बाजार कितना भी कमजोर क्यों न हो. दमानी ने कहा कि राकेश झुनझुनवाला से मैंने एक बात सीखी कि भारत को लेकर हमेशा बुलिश रहो. वे हमेशा कहते थे कि भारत के भविष्य को लेकर निराश या नेगेटिव मत बनो.
1987 का क्रैश और बाजार की सच्चाई
दमानी ने बताया कि बाजार के शुरुआती अनुभव निवेशक की सोच को लंबे समय तक प्रभावित करते हैं. उन्होंने 1987 के बड़े बाजार क्रैश को याद किया जब Dow Jones Industrial Average एक ही दिन में करीब 20 प्रतिशत गिर गया था. उन्होंने कहा कि 1987 में मैं 28 साल का था जब डाउ एक ही सेशन में 20 प्रतिशत गिर गया था. ऐसे अनुभव निवेशकों को यह समझाते हैं कि बाजार में अस्थिरता हमेशा बनी रहती है. बाजार 10 प्रतिशत गिरे या 60 प्रतिशत, नुकसान होना कभी अच्छा नहीं लगता. पैसा खोना किसी को भी पसंद नहीं होता.
बाजार हमेशा ऊपर नहीं जाता
दमानी ने यह भी कहा कि निवेशकों को यह समझना चाहिए कि बाजार हमेशा तेजी में नहीं रह सकता. बाजार हमेशा ऊपर नहीं जा सकता; पेड़ आसमान तक नहीं बढ़ते. सफल निवेश का असली राज धीरे-धीरे कंपाउंडिंग के जरिए संपत्ति बनाना है. लंबी अवधि का निवेश समय के साथ पूंजी को बढ़ाता है, और यही निवेश का सबसे मजबूत तरीका है.
बाजार गिरने की वजह सिर्फ कच्चा तेल नहीं
मौजूदा बाजार हालात पर बात करते हुए दमानी ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता सही है, लेकिन बाजार की गिरावट की वजह सिर्फ यही नहीं है. उनका कहना था कि जियो-पॉलिटिक टेंशन और ऊर्जा बाजार में उतार चढ़ाव जैसे कई कारण बाजार को प्रभावित करते हैं.
संकट के समय शांत रहने की सलाह
इसी प्रोग्राम में Madhusudan Kela ने भी झुनझुनवाला को याद किया. कठिन समय में झुनझुनवाला की बात निवेशकों को काफी भरोसा देती थी. केला ने कहा कि 2008 Global Financial Crisis और COVID-19 Pandemic जैसे दौर निवेशकों के लिए बेहद मुश्किल थे. जब किसी संकट का अंत साफ दिखाई नहीं देता, तब निवेशकों में सबसे ज्यादा घबराहट होती है. लेकिन कुछ समय बाद वही हालात निवेश के अवसर बन जाते हैं.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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