तेल के बाद गैस पर भी आफत! मिडिल ईस्ट संकट से हड़कंप, LNG सप्लाई रुकी तो भारत-चीन समेत इनपर बड़ा असर
Middle East में बढ़ते तनाव के कारण गैस सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है. दुनिया की करीब 20 प्रतिशत LNG स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज से गुजरती है. लेकिन अब इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है. कई LNG जहाजों ने अपनी यात्रा रोक दी है या सुरक्षित जगहों पर खड़े हैं.
Middle East में बढ़ता संकट अब सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि गैस बाजार पर भी बड़ा असर डाल सकता है. यह स्थिति 2022 के बाद गैस बाजार की सबसे बड़ी उथल-पुथल बन सकती है. उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण पूरी दुनिया में गैस की सप्लाई और कीमतें प्रभावित हुई थीं. अब ईरान से जुड़े तनाव ने एक बार फिर ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है. खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज, वहां से गैस की सप्लाई रुकने का खतरा बढ़ गया है. अगर यह रास्ता प्रभावित होता है, तो एशिया और यूरोप दोनों में गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है.
गैस सप्लाई पर बड़ा खतरा
Middle East में बढ़ते तनाव के कारण गैस सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है. दुनिया की करीब 20 प्रतिशत LNG स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज से गुजरती है. लेकिन अब इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है. कई LNG जहाजों ने अपनी यात्रा रोक दी है या सुरक्षित जगहों पर खड़े हैं.
एशिया इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है. कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LNG निर्यातक है और उसका ज्यादातर गैस एशिया जाता है. चीन और भारत जैसे देश कतर से बड़ी मात्रा में गैस खरीदते हैं. अगर सप्लाई रुकती है, तो इन देशों को महंगी गैस खरीदनी पड़ सकती है.
यूरोप भी प्रभावित होगा
यूरोप भी इस संकट से बच नहीं पाएगा. हालांकि यूरोप की निर्भरता कम है, लेकिन वहां गैस का स्टॉक पहले से कम है. अगर सप्लाई कम हुई, तो कीमतों में तेजी आ सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. गैस के दाम अक्सर तेल की कीमतों से जुड़े होते हैं. अगर कच्चा तेल महंगा होगा, तो गैस भी महंगी हो जाएगी.
कई देशों की बढ़ी चिंता
भारत, जापान और चीन जैसे देश पहले से ही विकल्प तलाश रहे हैं. कंपनियां दूसरे सप्लायर से गैस खरीदने की कोशिश कर रही हैं. कुछ देश अपनी डिलीवरी जल्दी कराने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि सप्लाई बनी रहे. अगर यह संकट लंबा चलता है, तो गैस की सप्लाई और उत्पादन दोनों पर असर पड़ सकता है. जहाजों की आवाजाही रुकने से कंपनियों को उत्पादन भी कम करना पड़ सकता है.
