अमेरिका पर दिखने लगा ईरान युद्ध का असर, पेट्रोल महंगा होने से बढ़ा ट्रांसपोर्ट खर्च, जानें आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर

ईरान युद्ध का असर अमेरिका में तेजी से दिख रहा है जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. बढ़ती ईंधन लागत के कारण Amazon और पोस्ट सर्वस ने डिलीवरी पर अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लगाने का फैसला किया है. एयरलाइंस और ट्रांसपोर्ट सेक्टर भी महंगे हो रहे हैं.

ईरान युद्ध का असर अमेरिका में तेजी से दिख रहा है. Image Credit: @AI

Iran War Impact: ईरान के खिलाफ जारी युद्ध का असर अब सीधे अमेरिका के आम लोगों पर दिखने लगा है. तेल की कीमतों में तेजी के कारण पेट्रोल और डीजल दोनों महंगे हो गए हैं. इसका असर ट्रांसपोर्ट, ई कॉमर्स और एयरलाइन सेक्टर पर साफ नजर आ रहा है. कंपनियां बढ़ते ईंधन खर्च को ग्राहकों पर डालने लगी हैं. इससे आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है. जानकारों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.

कीमतों में तेज उछाल

अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत बढ़कर 4.09 डॉलर प्रति गैलन हो गई है. यह युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में एक डॉलर से ज्यादा की बढ़ोतरी है. वहीं डीजल की कीमत भी तेजी से बढ़कर 5.53 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है. डीजल का उपयोग खेती, मैन्युफैक्चिरिंग और ट्रांसपोर्ट जैसे कई सेक्टर में होता है. ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से पूरी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है.

डिलीवरी सर्विस हुई महंगी

ई-कॉमर्स कंपनी Amazon ने डिलीवरी पर नया फ्यूल सरचार्ज लगाने का फैसला किया है. कंपनी 17 अप्रैल से थर्ड पार्टी सेलर्स पर 3.5 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाएगी. इससे ऑनलाइन सामान खरीदना महंगा हो सकता है. इसके अलावा पोस्ट सर्विस पर भी असर दिख रहा है. US Postal Service ने पैकेज और एक्सप्रेस मेल पर 8 फीसदी अस्थायी फ्यूल सरचार्ज लगाने का प्रस्ताव दिया है.

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ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर दबाव

ईंधन की कीमत बढ़ने से एयरलाइंस कंपनियां भी टिकट और बैगेज फीस बढ़ा रही हैं. ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने का असर हर सेक्टर में देखने को मिल सकता है. जानकारों का कहना है कि जब ट्रांसपोर्ट महंगा होता है तो इसका असर हर सामान की कीमत पर पड़ता है. यानी आने वाले समय में रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो सकती हैं.

सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा असर

ईरान युद्ध के कारण सप्लाई चेन में भी दिक्कतें आने लगी हैं. होर्मुज स्ट्रेट के प्रभावित होने से तेल सप्लाई बाधित हुई है. इससे ग्लोबल मार्केट में तेल की कमी महसूस की जा रही है. एशिया में इसका असर सबसे पहले दिखा जहां सरकारों को राशनिंग और बचत के उपाय लागू करने पड़े. यूरोप में भी अप्रैल के मध्य तक तेल की कमी की आशंका है.

अमेरिका में असर थोड़ा देर से दिखेगा

कई जानकारों का मानना है कि अमेरिका में इसका पूरा असर थोड़ा देर से दिखेगा. फारस की खाड़ी से तेल को अमेरिका पहुंचने में 35 से 45 दिन लगते हैं. इसलिए अमेरिका आखिरी बाजार होगा जहां इसकी मार पड़ेगी. हालांकि कीमतें अभी से बढ़ रही हैं और आने वाले समय में और बढ़ सकती हैं. कुछ इलाकों खासकर कैलिफोर्निया में ईंधन की कमी भी हो सकती है.

खर्च को लेकर बढ़ी चिंता

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बढ़ती ट्रांसपोर्ट लागत धीरे- धीरे बाकी कीमतों में भी दिखेगी. इससे आम लोगों को ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. पहले से ही महंगाई और जीवनयापन की लागत को लेकर चिंता बनी हुई है. ऐसे में यह स्थिति लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है. अगर युद्ध लंबा चलता है तो आर्थिक दबाव और बढ़ने की संभावना है.

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