अब बोतलबंद पानी हुआ महंगा, पैकेज्ड बोतल की कीमतें 11% तक बढ़ी; ईरान युद्ध से GST कटौती भी बेअसर
ईरान में जारी युद्ध के चलते तेल की कीमतों में उछाल ने भारत में बोतलबंद पानी को महंगा कर दिया है. प्लास्टिक बोतलों और पैकेजिंग लागत बढ़ने से कंपनियों ने दाम 8 फीसदी से 11 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं, जिससे जीएसटी कटौती का फायदा खत्म हो गया है.
Packaged Bottle Price Surge Iran Israel War: ईरान में चल रहे युद्ध का असर अब केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ने लगा है. खास तौर पर बोतलबंद पानी, जो पहले ही करोड़ों लोगों के लिए मजबूरी बन चुका है, अब और महंगा होने वाला है. रायटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्लास्टिक बोतलों और उनके ढक्कनों की कीमतों में तेज उछाल ने पानी की कीमतों को लगभग 11 फीसदी तक बढ़ा दिया है. यह बढ़ोतरी उस राहत को भी खत्म कर रही है, जो कुछ महीनों पहले सरकार ने जीएसटी में कटौती के जरिए दी थी.
तेल की बढ़ती कीमत ने महंगा किया पानी!
तेल की कीमतों में उछाल ने प्लास्टिक बनाने वाले पॉलिमर को महंगा कर दिया है, जो पैकेज्ड बोतल इंडस्ट्री का सबसे अहम हिस्सा है. इसी का असर है कि बिसलेरी जैसी लीडिंग कंपनी, जो बाजार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा कंट्रोल करती है, ने अपने दाम बढ़ा दिए हैं. रायटर्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि अब 1 लीटर की 12 बोतलों का पैक 240 रुपये में मिल रहा है, जो पहले 216 रुपये का था. कंपनी के सीईओ एंजेलो जॉर्ज के कहा कि पैकेजिंग मटेरियल की लागत पिछले कुछ हफ्तों में 70 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई है, जिससे कीमत बढ़ाना जरूरी हो गया. पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की कीमत 20 रुपये पर पहुंच गई है.
बोतल से लेकर ढक्कन और कार्टन बॉक्स तक महंगा
सिर्फ बोतल ही नहीं, बल्कि ढक्कन, कार्टन बॉक्स, लेबल और चिपकने वाले टेप जैसे दूसरे घटकों की कीमतों में भी भारी इजाफा हुआ है. उदाहरण के तौर पर, प्लास्टिक सामग्री की कीमत 50 फीसदी बढ़कर 170 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जबकि बोतल के ढक्कनों की कीमत दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी है. इन सभी कारकों ने मिलकर प्रोडक्शन कॉस्ट को काफी बढ़ा दिया है.
GST कटौती का फायदा खत्म!
इस महंगाई ने सरकार की उस पहल को भी निष्प्रभावी कर दिया है, जिसके तहत सितंबर में बोतलबंद पानी पर टैक्स को 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया गया था. उस समय कंपनियों ने कीमतों में कमी की थी, लेकिन अब बढ़ती लागत के कारण उन्हें फिर से दाम बढ़ाने पड़े हैं. पारले एग्रो और क्लियर प्रीमियम वाटर जैसी कंपनियों ने भी अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में 8 से 11 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है.
कच्चे माल में तेजी ने बढ़ाई टेंशन
1.4 अरब आबादी वाले देश में साफ पानी अब भी एक बड़ी चुनौती है. शोध बताते हैं कि देश का करीब 70 फीसदी भूजल दूषित है, ऐसे में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर पर निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है. यही वजह है कि करीब 5 अरब डॉलर के इस विशाल बाजार में बिसलेरी, कोका-कोला, पेप्सिको, रिलायंस और टाटा जैसी बड़ी कंपनियां अपनी हिस्सेदारी के लिए कंपटीशन कर रही हैं. लेकिन अब यह पूरी इंडस्ट्री कच्चे माल की बढ़ती लागत के दबाव में आ गया है. रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दी गई है कि यह स्थिति कंपनियों के नियंत्रण से बाहर है और वैश्विक परिस्थितियों का सीधा असर है. नतीजतन, आने वाले समय में उपभोक्ताओं को और महंगे पानी का सामना करना पड़ सकता है.
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