7 साल बाद भारत पहुंचा ईरानी तेल, 40 लाख बैरल की डिलीवरी, अमेरिकी छूट का उठाया फायदा
करीब सात साल बाद भारत में ईरानी कच्चे तेल की वापसी हुई है. गुजरात और ओडिशा के बंदरगाहों पर दो सुपरटैंकर पहुंचे हैं, जिनमें करीब 40 लाख बैरल तेल है. यह डिलीवरी अमेरिकी छूट के तहत हुई है, जिससे वैश्विक सप्लाई और भारत की ऊर्जा रणनीति पर असर पड़ सकता है.

करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद भारत में एक बार फिर ईरानी कच्चे तेल की एंट्री हुई है. गुजरात के सिक्का और ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर दो बड़े सुपरटैंकर पहुंचे हैं, जिनमें कुल मिलाकर करीब 40 लाख बैरल कच्चा तेल लाया गया है. यह डिलीवरी अमेरिकी छूट के तहत संभव हुई है और वैश्विक तेल आपूर्ति के बदलते समीकरणों के बीच अहम मानी जा रही है.
दो सुपरटैंकर पहुंचे भारत, करीब 40 लाख बैरल तेल
शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, Felicity नाम का टैंकर गुजरात के सिक्का तट पर लंगर डाले हुए है, जिसमें करीब 20 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल है. यह कार्गो मार्च के मध्य में खार्ग द्वीप से लोड हुआ था.
वहीं दूसरा टैंकर Jaya, ओडिशा के पारादीप बंदरगाह के पास पहुंचा है, जिसमें भी लगभग 20 लाख बैरल तेल है. यह कार्गो फरवरी के अंत में लोड हुआ था.
7 साल बाद क्यों संभव हुआ यह आयात
यह शिपमेंट इसलिए संभव हो पाया क्योंकि अमेरिका ने पिछले महीने एक एक महीने की सीमित छूट (waiver) दी थी. इस छूट के तहत समुद्र में पहले से मौजूद ईरानी तेल को बेचने की अनुमति दी गई थी, ताकि वैश्विक सप्लाई में कमी और बढ़ती कीमतों को काबू किया जा सके. हालांकि यह छूट 19 अप्रैल तक ही वैध है, जिसके बाद स्थिति फिर बदल सकती है.
इन टैंकरों के खरीदारों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि, पारादीप पोर्ट को ऑपरेट करने वाली इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने कम से कम एक शिपमेंट खरीदने की पुष्टि की है.
सिक्का पोर्ट, रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम के लिए एक बड़ा हब है, जहां ये कंपनियां पहले भी ईरानी तेल प्रोसेस करती रही हैं.
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भारत-ईरान तेल संबंध
भारत कभी ईरानी तेल का बड़ा खरीदार था. 2018 में भारत रोजाना करीब 5.18 लाख बैरल ईरानी तेल खरीदता था. लेकिन 2019 में अमेरिकी प्रतिबंध सख्त होने के बाद आयात पूरी तरह बंद हो गया. उस समय ईरान भारत के कुल तेल आयात का 11.5% हिस्सा था. इसके बाद भारत ने पश्चिम एशिया, अमेरिका और अन्य देशों से तेल खरीदना शुरू किया.
यह डिलीवरी ऐसे समय पर आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.