इस ‘सीक्रेट’ रूट से इजरायल को मिल रहा है तेल; दुनिया में हाहाकार पर नेतन्याहू टेंशन फ्री, रूस भी साथ
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया की तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है, लेकिन इजरायल की सैन्य कार्रवाई पर कोई ब्रेक नहीं दिख रहा. सवाल उठता है कि आखिर ईंधन की सप्लाई कहां से हो रही है? क्या इजरायल के पास कोई ऐसा वैकल्पिक रास्ता है जो इस संकट से अछूता है?
दुनिया इस वक्त बारूद के ढेर पर खड़ी है. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करके वैश्विक तेल सप्लाई की गर्दन दबा दी है. हर तरफ हाहाकार है, तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और बड़े-बड़े मुल्क घुटनों पर आकर युद्ध विराम की गुहार लगा रहे हैं. लेकिन इस भीषण संकट के बीच एक सवाल ये भी है – क्या इजरायल पर इस नाकेबंदी का असर दिख रहा है? गाजा से लेकर लेबनान तक उसकी बमबारी थमने का नाम क्यों नहीं ले रही? आखिर इजरायल के टैंकों और लड़ाकू विमानों को ईंधन कहां से मिल रहा है? क्या इजरायल के पास कोई ऐसा ‘जादुई’ सप्लाई रूट है जो ईरान की पहुंच से बाहर है?
रूस और तुर्की के रास्ते ‘लाइफलाइन’
‘ऑयलचेंज इंटरनेशनल’ की नवंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच इजरायल ने करीब 2.12 करोड़ टन कच्चा तेल और रिफाइंड ईंधन हासिल किया है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इजरायल की इस ‘तेल शक्ति’ का 70% हिस्सा उन रास्तों से आ रहा है, जिन पर ईरान का कोई बस नहीं चलता.
इजरायल का सबसे बड़ा सहारा अजरबैजान और कजाकिस्तान बने हुए हैं. अजरबैजान का तेल तुर्की के ‘सेहान’ (Ceyhan) पोर्ट से टैंकरों में भरकर इजरायल पहुंचता है. वहीं, कजाकिस्तान का तेल रूस के ब्लैक सी तट से पाइपलाइन के जरिए सप्लाई होता है. चूंकि ये सप्लाई रूट भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) और ब्लैक सी का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए होर्मुज की खाड़ी बंद होने से इजरायल की सेहत पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता.
इजरायल को कच्चे तेल की आपूर्ति (1 नवंबर 2023 – 1 अक्टूबर 2025)
| मूल देश (Origin Country) | कच्चा तेल (टन में) | शिपमेंट की संख्या |
| तुर्की (अजेरी तेल) | 7,146,417 | 61 |
| रूस (कजाख तेल) | 5,362,251 | 55 |
| गैबॉन | 2,288,858 | 21 |
| नाइजीरिया | 1,112,229 | 12 |
| ब्राजील | 584,041 | 4 |
| कांगो गणराज्य | 391,602 | 3 |
| मिस्र | 335,066 | 8 |
| कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य | 326,210 | 3 |
| अंगोला | 132,142 | 1 |
| इक्वेटोरियल गिनी | 79,400 | 1 |
| रूस (रूसी तेल) | 76,790 | 1 |
| घाना | 68,364 | 1 |
| कुल (TOTAL) | 17,903,370 | 171 |
अमेरिकी जेट फ्यूल और रूसी डीजल का साथ
सिर्फ कच्चा तेल ही नहीं, इजरायल के लड़ाकू विमानों को आसमान में उड़ाने के लिए खास तरह के ईंधन ‘JP-8 जेट फ्यूल’ की जरूरत होती है. ‘ऑयलचेंज इंटरनेशनल’ के मुताबिक, अमेरिका इजरायल का इकलौता और सबसे बड़ा मददगार है, जो विशेष रूप से सैन्य विमानों के लिए यह ईंधन भेज रहा है. टेक्सास की ‘वैलरो रिफाइनरी’ से नवंबर 2025 तक 3.6 लाख टन सैन्य जेट फ्यूल इजरायल भेजा जा चुका है।
दूसरी ओर, रूस भले ही वैश्विक राजनीति में अलग रुख रखता हो, लेकिन इजरायल को रिफाइंड पेट्रोलियम (डीजल और अन्य ईंधन) सप्लाई करने के मामले में वह नंबर वन है. इजरायल के कुल रिफाइंड ईंधन का करीब 45% हिस्सा अकेले रूस से आता है. यही वजह है कि इजरायल की डिफेंस फोर्स (IDF) के पास न तो टैंकों के लिए डीजल की कमी है और न ही जेट्स के लिए ईंधन की.
इजरायल को रिफाइंड पेट्रोलियम की आपूर्ति (1 नवंबर 2023 – 1 अक्टूबर 2025)
| मूल देश (Origin Country) | कच्चा तेल (टन में) | शिपमेंट की संख्या |
| तुर्की (अजेरी तेल) | 7,146,417 | 61 |
| रूस (कजाख तेल) | 5,362,251 | 55 |
| गैबॉन | 2,288,858 | 21 |
| नाइजीरिया | 1,112,229 | 12 |
| ब्राजील | 584,041 | 4 |
| कांगो गणराज्य | 391,602 | 3 |
| मिस्र | 335,066 | 8 |
| कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य | 326,210 | 3 |
| अंगोला | 132,142 | 1 |
| इक्वेटोरियल गुआना | 79,400 | 1 |
| रूस (रूसी तेल) | 76,790 | 1 |
| घाना | 68,364 | 1 |
| कुल (TOTAL) | 17,903,370 | 171 |
ब्राजील का ‘खिलाड़ी’ अंदाज और इटली का कनेक्शन
इस रिपोर्ट में एक और दिलचस्प खुलासा हुआ है. डेटा के मुताबिक, ब्राजील से इजरायल को होने वाली सीधी सप्लाई मार्च 2024 के बाद बंद हो गई थी. लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ दिखावा है. रियो डी जनेरियो ऑयल वर्कर्स यूनियन के मुताबिक, ब्राजील का तेल अब सीधे इजरायल न जाकर पहले इटली की ‘सार्डिनिया रिफाइनरी’ पहुंचता है और वहां से घुमा-फिराकर इजरायल भेज दिया जाता है. यानी पर्दे के पीछे से सप्लाई आज भी जारी है.
इजरायल की इस मजबूती के पीछे एक और बड़ा कारण उसकी रणनीतिक तैयारी है. ‘टाइम्स ऑफ इजरायल’ की मार्च 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इको एनर्जी के सीईओ अमित मोर ने पुष्टि की है कि इजरायल के पास इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मानकों के अनुरूप कम से कम 3 महीने का ‘इमरजेंसी फ्यूल रिजर्व’ हमेशा रहता है. इसी रिजर्व के दम पर इजरायल बिना डरे युद्ध के मैदान में डटा हुआ है.
ईरान की नाकेबंदी और इजरायल की ‘अग्निपरीक्षा’
हालांकि, तस्वीर पूरी तरह गुलाबी भी नहीं है. 28 फरवरी 2026 को जब से अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए हैं, तब से इजरायल के तटों पर हलचल काफी कम हो गई है. मरीन ट्रैफिक के रियल-टाइम डेटा बताते हैं कि हाइफ़ा, अश्दोद और अश्कलोन जैसे बंदरगाहों पर तेल टैंकरों का आना काफी धीमा हुआ है. इसका असर भविष्य में इजरायल की आम जनता की जेब पर पड़ना तय है, क्योंकि पेट्रोल पंपों पर कीमतें बढ़ने वाली हैं.
यह भी पढ़ें: होर्मुज पर बढ़ा तनाव! अमेरिका करेगा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी, तेहरान आने-जाने वाले जहाजों को दी चेतावनी
सवाल उठता है कि क्या ईरान का होर्मुज स्ट्रेट बंद करना बेअसर रहा? जानकारों का कहना है कि ईरान ने दुनिया की सप्लाई तो रोक दी, लेकिन इजरायल ने अपने लिए जो विकल्प (तुर्की, रूस और अमेरिका के जरिए) तैयार किए थे, वे फिलहाल उसे टूटने नहीं दे रहे. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय अदालतों (ICJ) की चेतावनियों के बावजूद, ईंधन की अटूट सप्लाई के दम पर इजरायल के हमले जारी हैं. ईरान के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि जिस तेल को वह हथियार बना रहा है, उसी की दूसरी धारा इजरायल को अजेय बनाए हुए है.
Latest Stories
SCO समिट में PM मोदी ने पाक पर साधा निशाना, आतंकी नेटवर्क को खत्म करने की मांग; डबल स्टैंडर्ड पर चेताया
Anthropic vs Pentagon: AI कंपनी की बड़ी कानूनी जीत, कोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार
US-Iran War: ईरान क्यों जा रहे कतर के प्रधानमंत्री, क्या रुक जाएगा युद्ध?
