कब शुरू होंगी जेवर एयरपोर्ट से कमर्शियल उड़ानें? सरकार ने बताया पूरा प्लान; इस कंपनी ने दिखाई दिलचस्पी

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से अगले 45-60 दिनों में कमर्शियल फ्लाइट्स शुरू हो सकती हैं. 11,200 करोड़ की लागत से बना यह एयरपोर्ट NCR की कनेक्टिविटी बदलने वाला है. पीएम मोदी ने शनिवार, 28 मार्च को ही नोएडा एयरपोर्ट का उद्घाटन भी किया.

जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन Image Credit: @PTI

Jewar Airport Commercial Flights Timeline: देश के एविएशन सेक्टर के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar Airport) से कमर्शियल फ्लाइट्स की शुरुआत अब ज्यादा दूर नहीं है. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने बताया है कि आने वाले 45 से 60 दिनों के भीतर यहां से उड़ान सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 28 मार्च को इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया.

इंडिगो दिखा रही दिलचस्पी, सुरक्षा तैयारियां अंतिम चरण में

मंत्री नायडू ने जानकारी दी कि एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है. साथ ही, देश की प्रमुख एयरलाइन IndiGo ने यहां से उड़ानें शुरू करने में गहरी रुचि दिखाई है. इससे साफ है कि ऑपरेशन शुरू होते ही यात्री सेवाएं तेजी से विस्तार ले सकती हैं. उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में स्थित यह एयरपोर्ट देश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में से एक है. पहले चरण में इसकी क्षमता सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की है. वहीं, सभी चरण पूरे होने के बाद यह एयरपोर्ट हर साल करीब 7 करोड़ यात्रियों को संभाल सकेगा.

11,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार पहला चरण

एयरपोर्ट के पहले चरण का विकास करीब 11,200 करोड़ रुपये के निवेश से किया गया है. इसका एयरपोर्ट कोड ‘DXN’ रखा गया है. इसका संचालन यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (YIAPL) द्वारा किया जाएगा, जो ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक कंपनी है. यह प्रोजेक्ट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित की गई है.

एडवांस सुविधाओं से लैस एयरपोर्ट

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में 3,900 मीटर लंबा रनवे बनाया गया है, जो बड़े (वाइड-बॉडी) विमानों के संचालन के लिए सक्षम है. इसके अलावा, यहां एडवांस्ड नेविगेशन सिस्टम जैसे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और एडवांस्ड एयरफील्ड लाइटिंग की सुविधा भी दी गई है.

फ्लाइट और कार्गो ऑपरेशन की मजबूत तैयारी

पहले चरण में एयरपोर्ट पर प्रति घंटे करीब 30 उड़ानों को हैंडल करने की क्षमता होगी. यहां 28 एयरक्राफ्ट स्टैंड बनाए गए हैं. साथ ही, कार्गो ऑपरेशन के लिए भी मजबूत व्यवस्था की गई है, जिसकी शुरुआती क्षमता करीब 2.5 लाख टन सालाना होगी. टर्मिनल-1 का क्षेत्रफल करीब 1,37,985 वर्ग मीटर है, जिसमें 48 चेक-इन काउंटर बनाए गए हैं. इसके अलावा, 40 एकड़ से अधिक जमीन में MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सुविधाएं विकसित की जा रही हैं.

Akasa Air के साथ साझेदारी

एयरपोर्ट मैनेजमेंट ने Akasa Air के साथ रणनीतिक साझेदारी भी की है, जिसके तहत यहां MRO सुविधा विकसित की जाएगी. इससे भविष्य में एयरपोर्ट को एक प्रमुख एविएशन हब के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी. गौरतलब है कि इस एयरपोर्ट से उड़ान सेवाएं पहले सितंबर 2024 में शुरू होने की योजना थी, लेकिन अब यह 45-60 दिनों में शुरू होने जा रही हैं. DGCA से हाल ही में एयरोड्रोम लाइसेंस मिलने के बाद अब यह परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है.

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