सिर्फ ₹2 में बिक रहा 22 रुपये किलो वाला केला, अमेरिका-ईरान युद्ध ने महाराष्ट्र के किसानों की तोड़ी कमर
महाराष्ट्र के जलगांव और सोलापुर के केला किसानों पर इस सीजन में आर्थिक संकट गहरा गया है. मध्य पूर्व निर्यात रुकने से कई कंटेनर कोल्ड स्टोरेज में फंसे हैं. निर्यात न होने से फसल घरेलू बाजार में आ रही है, जिससे आपूर्ति बढ़ी और कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है.

Middle East War Impact farmer: पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच गहराया संकट अब सिर्फ हार्मुज, एलपीजी गैस और कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहा है. इसका असर अब किसानों की आमदनी पर भी दिखने लगा है. जहां महाराष्ट्र में केले की खेती किसानों को अच्छा मुनाफा देती थी, वहीं इस बार यह घाटे का सौदा बनती नजर आ रही है. कभी 20 रुपये से ज्यादा कीमत पाने वाली फसल आज औने-पौने दामों पर बिक रही है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के जलगांव और सोलापुर जैसे जिलों के किसानों के लिए, जो राज्य के प्रमुख केला उत्पादक क्षेत्र हैं, यह सीजन एक वित्तीय संकट में बदल गया है. मध्य पूर्व को निर्यात में रुकावट के कारण केले के कई कंटेनर कोल्ड स्टोरेज में फंसे हुए हैं और आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं. शिपमेंट रुकने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए तैयार फसल अब घरेलू बाजार में आ रही है, जिससे कीमतों में भारी गिरावट आई है.
कुछ ही महीनों में आधे से भी कम हुए दाम
रिपोर्ट के मुताबिक, जहां फरवरी में किसानों को 18 से 22 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा था. वहीं मार्च में यह घटकर 8 से 10 रुपये रह गया और अप्रैल में कीमतें गिरकर सिर्फ 2 से 3 रुपये प्रति किलो रह गईं. रिपोर्ट के मुताबिक, सोलापुर के एक किसान ने 10 एकड़ में केले की खेती पर करीब 20 लाख रुपये खर्च किए. अब मौजूदा कीमतों पर उन्हें सिर्फ 2.5 से 3 लाख रुपये मिलने की उम्मीद है यानी करीब 17 लाख रुपये का सीधा नुकसान हुआ है.
मानसिक दबाव से दूसरी फसल उगाने को मजबूर
इस संकट का असर सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि मानसिक भी है. रिपोर्ट के मुताबिक, बारामती के किसानों का कहना है कि इतनी कम कीमत पर फसल बेचने से ट्रांसपोर्ट और मजदूरी की लागत भी नहीं निकलती है. इसलिए कई किसान अपनी खड़ी फसल को रोटावेटर से मिट्टी में मिलाकर दूसरी फसल, जैसे गन्ना, उगाने की तैयारी कर रहे हैं. इसके अलावा किसानों की शिकायत है कि जहां उपभोक्ता बाजार में केले 50 से 60 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं, वहीं उन्हें बेहद कम कीमत मिल रही है.
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