फ्यूल प्राइस फ्रीज का असर! OMCs ने रिफाइनर्स पर डाला बोझ, पेट्रोल-डीजल पर बढ़ते नुकसान को बांटने की तैयारी
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और घरेलू फ्यूल प्राइस फ्रीज के बीच OMCs ने रिफाइनर्स को कम भुगतान करने का फैसला किया है. इससे MRPL, CPCL जैसी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है. जानें क्या है पूरा मामला.

OMC RPT Discount Refiners Petrol Diesel: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने एक बड़ा कदम उठाया है. पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों को लंबे समय से स्थिर रखने के चलते बढ़ते नुकसान को नियंत्रित करने के लिए अब ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) रिफाइनर्स को कम कीमत पर भुगतान करेंगी. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जबकि भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं.
पीटीआई ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा है कि OMCs ने 16 मार्च से लागू व्यवस्था के तहत पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें तय करते समय इंपोर्ट कॉस्ट के मुकाबले भारी डिस्काउंट लागू किया है. कुछ मामलों में यह छूट 60 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच रही है. इसका सीधा असर उन रिफाइनिंग कंपनियों पर पड़ेगा, जो अपनी कमाई के लिए पूरी तरह बाजार आधारित कीमतों पर निर्भर हैं.
रिफाइनरियों पर बढ़ेगा बोझ!
दरअसल, OMCs जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम- रिफाइनरियों से ईंधन खरीदकर उसे बाजार में बेचती हैं. लेकिन जब खुदरा कीमतें स्थिर रहती हैं और कच्चा तेल महंगा हो जाता है, तो इन कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में अब उन्होंने रिफाइनरी ट्रांसफर प्राइस (RTP) को कम करके रिफाइनर्स को कम भुगतान करने का फैसला किया है, ताकि नुकसान का बोझ कुछ हद तक बांटा जा सके.
क्या कहते हैं आंकड़े?
आंकड़ों के अनुसार, मार्च के दूसरे पखवाड़े में डीजल पर करीब 22.34 रुपये प्रति लीटर का डिस्काउंट लागू किया गया, जिससे RTP घटकर 63,007 रुपये प्रति किलोलीटर रह गया. वहीं अप्रैल के पहले पखवाड़े में यह छूट और बढ़ाकर 60,239 रुपये प्रति किलोलीटर कर दी गई, जिससे RTP 86,004 रुपये प्रति किलोलीटर पर आ गया. इसी तरह एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) और केरोसीन पर भी भारी कटौती की गई है, जिससे रिफाइनर्स की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा.
किस पर पड़ेगा इसका असर?
इस कदम का सबसे ज्यादा असर स्टैंडअलोन रिफाइनर्स, जैसे MRPL, CPCL और HMEL पर पड़ने की आशंका है, क्योंकि इनके पास खुद का बड़ा रिटेल नेटवर्क नहीं है और ये अपनी ज्यादातर बिक्री OMCs को ही करती हैं. इसके उलट, IOC, BPCL और HPCL जैसी इंटीग्रेटेड कंपनियां रिफाइनिंग और मार्केटिंग दोनों से जुड़ी होने के कारण इस दबाव को कुछ हद तक बैलेंस कर सकती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह डिस्काउंट प्राइवेट रिफाइनर्स जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी पर भी लागू होता है, तो उनके मार्जिन पर भी असर पड़ सकता है. भारत में करीब 90 फीसदी पेट्रोल पंप OMCs के नियंत्रण में हैं, जिससे वे कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखती हैं.
RTP डिस्काउंट से राहत मिलेगी
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें सैद्धांतिक रूप से बाजार आधारित हैं, लेकिन व्यवहार में 2022 से इनमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो OMCs को नुकसान उठाना पड़ता है, जबकि कीमतें गिरने पर उन्हें फायदा होता है. मौजूदा हालात में, सरकार LPG की तरह ऑटो फ्यूल पर कंपनियों को कोई सब्सिडी नहीं देती, जिससे दबाव और बढ़ जाता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 तक OMCs को पेट्रोल पर करीब 24.40 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 104.99 रुपये प्रति लीटर का अंडर-रिकवरी झेलना पड़ रहा है. ऐसे में RTP पर डिस्काउंट लागू करना एक तरह से पूरे सिस्टम में इस वित्तीय बोझ को बांटने की कोशिश है.
इनके लिए बड़ी चुनौती भी
हालांकि, इस कदम से बाजार में कीमत निर्धारण की पारदर्शिता और फ्री-मार्केट सिस्टम पर सवाल भी उठ सकते हैं. खासतौर पर स्वतंत्र रिफाइनर्स के लिए यह फैसला चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि उनकी कमाई सीधे बाजार कीमतों पर निर्भर करती है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि वैश्विक तेल बाजार और जियोपॉलिटिकल हालात किस दिशा में जाते हैं, क्योंकि उसी के आधार पर भारत में ईंधन की कीमतों और कंपनियों की कमाई पर असर तय होगा.
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