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कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाने की तैयारी में OPEC+! क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल?

मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच OPEC+ सितंबर से कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा सकता है. माना जा रहा है कि संगठन रोजाना 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन करेगा. इस फैसले का असर वैश्विक तेल कीमतों और पेट्रोल-डीजल बाजार पर पड़ सकता है.

सऊदी अरब, रूस और OPEC+ के अन्य सदस्य देश

Highlights

  • सितंबर में बढ़ सकता OPEC+ का तेल उत्पादन
  • मिडिल ईस्ट युद्ध से सप्लाई अब भी प्रभावित
  • कच्चे तेल कीमतों पर रहेगा वैश्विक बाजार नजर

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है. ऐसे में सऊदी अरब, रूस और OPEC+ के अन्य सदस्य देश रविवार को होने वाली ऑनलाइन बैठक में सितंबर महीने के लिए कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने पर फैसला ले सकते हैं. माना जा रहा है कि संगठन प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल (188,000 बैरल) अतिरिक्त उत्पादन की घोषणा कर सकता है. पिछले कई महीनों से OPEC+ इसी तरह चरणबद्ध तरीके से उत्पादन बढ़ा रहा है.

ऊर्जा रिसर्च फर्म रिस्टैड एनर्जी के विश्लेषक जॉर्ज लियोन का कहना है कि सितंबर में प्रस्तावित बढ़ोतरी मौजूदा उत्पादन वृद्धि श्रृंखला का आखिरी चरण हो सकती है.

पहले घटाया गया था उत्पादन

साल 2022 के आखिर और 2023 के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को देखते हुए OPEC+ ने तीन चरणों में उत्पादन कम करने का फैसला लिया था. इस दौरान संगठन ने कुल मिलाकर करीब 60 लाख बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन घटा दिया था, ताकि बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना रहे और कीमतों को सहारा मिल सके.

हालांकि, 2025 से सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ाने की रणनीति अपनाई.

सभी सदस्य लक्ष्य तक नहीं पहुंच पा रहे

UBS के विश्लेषक जियोवानी स्टाउनोवो के मुताबिक, कई OPEC+ सदस्य देश उत्पादन क्षमता में आई कमी के कारण अपने तय लक्ष्य के अनुसार तेल नहीं निकाल पा रहे हैं. ऐसे में केवल उत्पादन लक्ष्य बढ़ाने से वास्तविक आपूर्ति में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आएगा.

दूसरी ओर, इराक जैसे कुछ देश उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करना चाहते हैं. फिलहाल OPEC+ सभी सदस्य देशों की अधिकतम टिकाऊ उत्पादन क्षमता का आकलन करने की प्रक्रिया में जुटा है.

युद्ध का असर अब भी जारी

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर तेल आपूर्ति पर साफ दिखाई दे रहा है. ईरान की ओर से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में गतिविधियां प्रभावित होने से खाड़ी देशों के लिए तेल निर्यात बढ़ाना आसान नहीं रहा. वहीं रूस भी यूक्रेन के ड्रोन हमलों के कारण अपने तेल उत्पादन ढांचे पर दबाव झेल रहा है. रूस का लक्ष्य 98 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन का है, लेकिन फिलहाल उसका उत्पादन करीब 90 लाख बैरल प्रतिदिन ही है.

अगले साल नए कोटे पर होगी चुनौती

विश्लेषकों का मानना है कि सितंबर के बाद OPEC+ को अगले साल के लिए नए उत्पादन कोटे तय करने में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, फिलहाल संगठन की एकजुटता बनी हुई है. मई में संयुक्त अरब अमीरात के समूह से बाहर होने के बावजूद OPEC+ उत्पादन और वैश्विक तेल बाजार में संतुलन बनाए रखने की दिशा में काम कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर की बैठक का फैसला आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.

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