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Gold ETF: 1 साल में मिला 12% से ज्यादा रिटर्न, क्या इस दिवाली गोल्ड ETF में निवेश करना रहेगा फायदेमंद?

दिवाली पर सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो गोल्ड ETF भी निवेश का एक विकल्प हो सकता है. पिछले एक साल में कई गोल्ड ETF ने 12 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है. वहीं, अक्टूबर 2026 में गोल्ड ETF में करीब 3300 करोड़ रुपये का निवेश आया. फिजिकल सोने के मुकाबले इसमें मेकिंग चार्ज और लॉकर की चिंता नहीं होती. जानिए गोल्ड ETF कैसे काम करता है और क्या इस दिवाली इसमें निवेश करना सही रहेगा.

पिछले एक साल में कई गोल्ड ETF ने 12 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया.

Highlights

  • पिछले एक साल में कई गोल्ड ETF ने 12 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया.
  • अक्टूबर में गोल्ड ETF में करीब 3,300 करोड़ रुपये का नेट निवेश आया.
  • फिजिकल गोल्ड के मुकाबले गोल्ड ETF में मेकिंग चार्ज और लॉकर की चिंता नहीं होती.

दिवाली और शादी-ब्याह के सीजन में सोना खरीदना भारतीय परिवारों की पुरानी परंपरा रही है. हालांकि, अब सोने में निवेश का तरीका भी बदल रहा है. निवेशक फिजिकल गोल्ड के साथ-साथ गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. इसकी वजह है कि गोल्ड ETF में निवेश करना आसान है और इसमें सोने को रखने या सुरक्षित रखने की चिंता भी नहीं होती. पिछले एक साल में कई गोल्ड ETF ने 12 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है. वहीं, गोल्ड ETF में निवेश और टोटल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में भी बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में सवाल है कि क्या इस दिवाली गोल्ड ETF में निवेश करना सही रहेगा?

गोल्ड ETF में निवेश क्यों बढ़ रहा है?

सोने की कीमतों में पिछले छह महीनों के दौरान करीब 12 फीसदी की गिरावट आई है. कीमतों में इस ठहराव के बावजूद निवेशकों की दिलचस्पी गोल्ड ETF में बनी हुई है. आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड ETF का कुल AUM अप्रैल 2026 में 158400 करोड़ रुपये था, जो अक्टूबर में बढ़कर 191000 करोड़ रुपये हो गया. अक्टूबर में इन फंड्स में करीब 3300 करोड़ रुपये का नेट निवेश आया.

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के ताजा तिमाही आउटलुक के मुताबिक, त्योहारी और शादी-ब्याह के सीजन में सोने की मांग बढ़ने की उम्मीद है. इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों की ओर से अपने स्वर्ण भंडार में सोना जोड़ने का सिलसिला जारी रहने से अगले 12 महीनों में कीमतों को सहारा मिल सकता है.

गोल्ड ETF ने कितना दिया रिटर्न?

पिछले एक साल में गोल्ड ETF ने अच्छा प्रदर्शन किया है. अलग-अलग फंड्स के रिटर्न में थोड़ा अंतर रहा है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, टाटा गोल्ड ETF ने 12.62 फीसदी और क्वांटम गोल्ड ETF ने 12.81 फीसदी का रिटर्न दिया. वहीं, निप्पॉन इंडिया गोल्ड ETF BeES ने 12.58 फीसदी, इनवेस्को गोल्ड ETF ने 12.50 फीसदी और ICICI गोल्ड ETF ने 12.39 फीसदी का रिटर्न दिया है.

20 अक्टूबर 2025 को मनाई गई पिछली दिवाली से लेकर अब तक गोल्ड ETF ने औसतन 9.22 फीसदी का रिटर्न दिया है. इस अवधि में बाजार में कुल 22 गोल्ड ETF मौजूद थे.

वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, 26 अक्टूबर 2026 तक गोल्ड ETF या फंड कैटेगरी ने साल की शुरुआत से अब तक 6.94 फीसदी, एक साल में 18.64 फीसदी, तीन साल में 31.90 फीसदी और पांच साल में 23.15 फीसदी का रिटर्न दिया है.

फिजिकल गोल्ड के मुकाबले गोल्ड ETF के क्या हैं फायदे?

गोल्ड ETF में निवेश का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें फिजिकल सोना रखने की जरूरत नहीं होती. गोल्ड ETF स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड स्कीम होती हैं, जो घरेलू बाजार में सोने की कीमतों को ट्रैक करती हैं. आमतौर पर इसकी एक यूनिट 99.5 फीसदी शुद्धता वाले एक ग्राम सोने के बराबर होती है.

फिजिकल सोने में आभूषण खरीदने पर मेकिंग चार्ज देना पड़ता है. इससे सोने की कुल लागत बढ़ जाती है. इसके अलावा, सोने को सुरक्षित रखने के लिए बैंक लॉकर का खर्च भी उठाना पड़ सकता है. चोरी का डर और बेचते समय कटौती या टेस्टिंग फीस जैसी परेशानियां भी रहती हैं.

इसके मुकाबले गोल्ड ETF की यूनिट निवेशक के डीमैट खाते में रहती है. इसे NSE और BSE पर कारोबारी समय के दौरान खरीदा और बेचा जा सकता है. इसमें निवेशक को फिजिकल सोने की तरह रिजर्व की चिंता नहीं करनी पड़ती. छोटी रकम से भी निवेश की शुरुआत की जा सकती है.

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क्या इस दिवाली गोल्ड ETF में निवेश करना चाहिए?

ऑप्टिमा मनी के फाउंडर और CEO पंकज मथपाल के मुताबिक, सोने को लेकर आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है. इसकी वजह निवेश की मजबूत मांग और कुल सप्लाई में कमी आने की संभावना है. हालांकि, ऊंची ब्याज दरें, बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर में मजबूती से सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है.

निवेशकों के लिए सलाह है कि सोने की कीमतों में तेजी की उम्मीद में एकमुश्त बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए. इसके बजाय अपने मौजूदा पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी और लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए धीरे-धीरे निवेश करने पर विचार किया जा सकता है.