मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच रूस की ओर मुड़ा भारत, Reliance ने खरीदा 60 लाख बैरल तेल; सप्लाई सुरक्षित की तैयारी
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और सप्लाई अनिश्चितता के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मार्च डिलीवरी के लिए करीब 60 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदा है. रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रिफाइनरियां वैकल्पिक स्रोतों से सप्लाई सुरक्षित करने में जुटी हैं, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का करीब 40 फीसदी मिडिल ईस्ट से आयात करता है.
Reliance Buys Russia Oil amid Middle East Tension: मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और तेल सप्लाई को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की ओर तेजी से रुख करना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में देश की सबसे बड़ी प्राइवेट रिफाइनरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मार्च डिलीवरी के लिए रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद की है. रायटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने करीब 60 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदा है. यह खरीद ऐसे समय में हुई है जब ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण मिडिल ईस्ट से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में भी अस्थिरता देखी जा रही है.
मिडिल ईस्ट संकट के बीच रूस की ओर झुकाव
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा होता है. देश अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 40 फीसदी हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है, जो मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत तक पहुंचता है. हालांकि मौजूदा जियो पॉलिटिकल टेंशन और युद्ध की स्थिति ने इस मार्ग से आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. ऐसे माहौल में भारतीय रिफाइनरियों ने वैकल्पिक सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी है. सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने समुद्र में पहले से मौजूद कई रूसी तेल कार्गो भी खरीदे हैं, ताकि किसी संभावित आपूर्ति संकट से बचा जा सके.
अमेरिका से मिली अस्थायी राहत
यह खरीद ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने हाल ही में भारत को 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है. यह छूट उन रूसी तेल कार्गो पर लागू है जो 5 मार्च तक जहाजों पर लोड हो चुके थे. इस फैसले के बाद भारतीय कंपनियों को समुद्र में फंसे रूसी तेल कार्गो खरीदने का मौका मिला, जिससे उन्हें तुरंत उपलब्ध सप्लाई मिल सकी.
किस कीमत पर खरीदा गया तेल?
रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रूस के प्रमुख ग्रेड यूराल्स (Urals) क्रूड के कार्गो खरीदे हैं. इन सौदों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क डेटेड ब्रेंट के मुकाबले अलग-अलग स्तर पर तय हुईं. कुछ कार्गो ब्रेंट से लगभग 1 डॉलर की छूट पर खरीदे गए, जबकि कुछ सौदे ब्रेंट के मुकाबले लगभग 1 डॉलर प्रीमियम पर हुए. यह अंतर शिपिंग लागत, डिलीवरी समय और बाजार की मांग जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है. हालांकि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इन सौदों को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
रूस भारत के लिए अहम सप्लायर
2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध लगाए गए थे. इसके बाद रूस ने एशियाई बाजारों, खासकर भारत और चीन को बड़ी मात्रा में रियायती तेल बेचना शुरू किया. इसका फायदा उठाते हुए भारत कुछ ही महीनों में रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया. भारतीय रिफाइनरियों को रियायती कीमतों पर कच्चा तेल मिलने से उनकी लागत भी कम हुई. हालांकि 2026 की शुरुआत में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के दबाव के कारण भारत की कुछ रिफाइनरियों ने रूस से खरीद में थोड़ी कटौती शुरू कर दी थी.
ऊर्जा सुरक्षा बनी सबसे बड़ी प्राथमिकता
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा जियो पॉलिटिकल हालात में भारत की ऊर्जा रणनीति का सबसे अहम लक्ष्य सप्लाई को विविध स्रोतों से सुनिश्चित करना है. मिडिल ईस्ट में युद्ध या तनाव की स्थिति अक्सर तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है, इसलिए भारत लगातार रूस, अमेरिका, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों से भी तेल आयात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट का संकट लंबा खिंचता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक तेल बाजार में और ज्यादा अस्थिरता देखने को मिल सकती है. ऐसी स्थिति में भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत बेहद महत्वपूर्ण हो जाएंगे.
ये भी पढ़ें- बेंगलुरु में होटलों को बंद हुई LPG की सप्लाई, मंगलवार से ठप हो जाएगा कामकाज; लोगों को झेलनी पड़ सकती है परेशानी
