कॉर्पोरेट जगत में बढ़ने लगी हैं मुश्किलें! रिलायंस ने कीं 90000 कम भर्तियां, कंपनियों को क्या डर सता रहा?

देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल Reliance Industries ने वित्त वर्ष 2026 में अपनी भर्ती की रफ्तार धीमी कर दी है. कंपनी ने पिछले साल की तुलना में करीब 90,000 कम नए कर्मचारियों को नौकरी पर रखा.

रिलायंस में भर्ती क्यों घटी Image Credit: Money9 Live

देश के सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) की हायरिंग रफ्तार में इस साल बड़ी सुस्ती देखने को मिली है. रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पिछले साल की तुलना में वित्त वर्ष 2026 में करीब 90,000 कम नए कर्मचारियों को नौकरी पर रखा है. कंपनी की नई भर्तियों में यह एक बहुत बड़ी गिरावट है. यह आंकड़ा कॉर्पोरेट जगत की स्थिति को दर्शाने के लिए पर्याप्त है.

कितनी होती थी हायरिंग

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक रिलायंस इंडस्ट्रीज समूह के कुल कर्मचारियों की संख्या 4.19 लाख से अधिक हो चुकी है. कंपनी ने इस वित्त वर्ष में 1 लाख से ज्यादा नए कर्मचारियों की भर्ती की है. लेकिन जब इसकी तुलना पिछले वित्त वर्ष (2024-25) से की जाती है, जहां कंपनी ने 1.9 लाख से अधिक नए लोगों को ऑनबोर्ड किया था, तो नई भर्तियों में आई यह भारी गिरावट बिल्कुल साफ नजर आती है.

AI और ऑटोमेशन से शिफ्ट हुआ कंपनी का फोकस

कंपनी की नई भर्तियों में आई इस कमी को बाजार के बदलते मिजाज से जोड़कर देखा जा रहा है. उद्योग जगत में अब पारंपरिक नौकरियों के बजाय नई तकनीकों को प्राथमिकता दी जा रही है. रिलायंस की वार्षिक रिपोर्ट में भी इस बात का साफ जिक्र है कि कंपनी का पूरा ध्यान इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी से जुड़ी भर्तियों पर केंद्रित रहा है.

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विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों में नई भर्तियों की रफ्तार कम होना एक व्यापक वैश्विक और आर्थिक बदलाव का हिस्सा है. इसके पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारण माने जा रहे हैं:

  • AI का बढ़ता इस्तेमाल: कंपनियां अब बड़े पैमाने पर नई भर्तियां करने के बजाय अपने मौजूदा कर्मचारियों को नई तकनीकों में अपस्किल कर रही हैं.
  • भूमिकाओं में बदलाव: मौजूदा वर्कफोर्स के रोल को तकनीक के हिसाब से फिर से री-डिजाइन किया जा रहा है.
  • वैश्विक चुनौतियां: दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई-चेन से जुड़े संकट ने भी कंपनियों को फूंक-फूंक कर कदम रखने पर मजबूर किया है.
  • आर्थिक माहौल: वैश्विक स्तर पर मंदी और तंग व्यापक आर्थिक परिस्थितियों की वजह से देश-विदेश की बड़ी कंपनियां अपने खर्चों और मैनपावर को बेहद नियंत्रित रख रही हैं.