सीजफायर की उम्मीद धुंधली, 1 जून को फिर बढ़े कच्चे तेल के दाम; दुनिया में बढ़ रहा महंगाई का खतरा
ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से वैश्विक तेल बाजार में फिर उथल-पुथल मच गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल सप्लाई बहाल होने की उम्मीद कमजोर पड़ने के बाद ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है.
Crude Oil Price June 1: ईरान में युद्ध खत्म करने के लिए होने वाले शांति समझौते पर सस्पेंस गहराने लगा है. इस अनिश्चितता के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में . ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, छह हफ्ते के निचले स्तर पर गिरने के बाद तेल की कीमतों में यह तेजी देखी जा रही है. शुक्रवार को मध्य-अप्रैल के बाद के सबसे निचले स्तर पर बंद होने के बाद, ब्रेंट क्रूड एक बार फिर तेजी के साथ $93 प्रति बैरल के पार निकल गया है. वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी $89 प्रति बैरल के पर ट्रेड कर रहा है.
तनाव के बीच दांव-पेंच
बीते वीकेंड पर अमेरिका और ईरान के बीच एक ड्राफ्ट एग्रीमेंट को लेकर संदेशों का आदान-प्रदान हुआ. इस समझौते का मकसद सीजफायर को बढ़ाना और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलना है. दोनों देश इस मसौदे में बदलाव चाहते हैं, लेकिन अभी तक किसी ठोस प्रगति के संकेत नहीं मिले हैं.
इससे पहले बाजार में इस बात को लेकर काफी उम्मीदें थीं कि कोई न कोई शांति समझौता हो जाएगा और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से ऊर्जा की सप्लाई फिर से बहाल हो सकेगी. इसी उम्मीद के चलते इस साल पहली बार कच्चे तेल की कीमतों में मासिक गिरावट दर्ज की गई थी. हालांकि, फरवरी के आखिर में शुरू हुए इस युद्ध के बाद से ब्रेंट क्रूड अब तक 25% से ज्यादा महंगा हो चुका है, क्योंकि इस अहम जलमार्ग के बंद होने से तेल बाजार में ऐसा संकट खड़ा हो गया है जिसके बादल जल्द छंटते नहीं दिख रहे हैं.
अपनी ‘रेड लाइन्स’ पर अड़े अमेरिका और ईरान
पश्चिम एशिया और नॉर्थ अफ्रीका (MENA) क्षेत्र के स्वतंत्र अर्थशास्त्री हमजेह अल गाओद के मुताबिक, “ना तो ईरान और ना ही अमेरिका समझौते के लिए झुकने या अपनी ‘रेड लाइन्स’ पर समझौता करने को तैयार हैं. इनमें न्यूक्लियर प्रोग्राम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और प्रतिबंध जैसे मुद्दे शामिल हैं, जो युद्ध से पहले भी जस के तस थे.” ऐसे में तेल की कीमतें राजनीतिक बयानों और जमीनी हालातों के प्रति बेहद संवेदनशील बनी रहेंगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम की बैठक के बाद से इस मुद्दे पर कोई नया बयान नहीं दिया है. हालांकि, तब उन्होंने उम्मीद जताई थी कि वह ईरान के साथ मौजूदा संघर्षविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाने के समझौते का एलान कर सकते हैं.
वहीं, ईरान की सेमी-ऑफिशियल तस्नीम न्यूज एजेंसी का कहना है कि दोनों तरफ से संशोधनों के प्रस्ताव तो दिए जा रहे हैं, लेकिन मुमकिन है कि अंत में दोनों ही पक्ष इन्हें खारिज कर दें और यह डील पूरी तरह टूट जाए.
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लेबनान संकट और जहाजों पर हमले से बढ़ा जोखिम
तनाव के बीच इजरायल ने लेबनान में पिछले 25 वर्षों का सबसे बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया है, क्योंकि ईरान के सबसे मजबूत सहयोगी हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल पर हमले तेज कर दिए हैं. इजरायल इस बातचीत का हिस्सा नहीं है, इसलिए यह साफ नहीं है कि वह लेबनान में अपनी जंग रोकेगा या नहीं.
इस बीच, युद्ध की शुरुआत में फारस की खाड़ी में फंसे गैर-ईरानी तेल टैंकरों में से करीब एक-चौथाई (25%) टैंकर किसी तरह चोरी-छिपे बाहर निकलने में कामयाब रहे हैं. लेकिन शेवरॉन कॉर्प के सीईओ माइक विर्थ के मुताबिक, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजरने वाले कई जहाजों पर हाल के दिनों में हमले हुए हैं, जो यह साफ करते हैं कि शिपिंग कंपनियों के लिए जोखिम अभी भी “बहुत वास्तविक” है.
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