IPL में क्या-क्या नहीं कर सकते खिलाड़ी और कोच? RR मैनेजर रोमी भिंडर के फोन विवाद ने खोली सख्त नियमों की परतें

IPL 2026 में रोमी भिंडर का डगआउट में मोबाइल इस्तेमाल करना सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि सख्त एंटी-करप्शन नियमों के उल्लंघन का मामला बन गया. इस घटना ने दिखाया कि टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ी और कोच किन-किन पाबंदियों में बंधे होते हैं और छोटी सी चूक भी बड़ा विवाद खड़ा कर सकती है.

IPL मैच और नियम शर्तें Image Credit: @Money9live

IPL Match and Prohibited Actions: IPL 2026 में राजस्थान रॉयल्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच शुक्रवार, 10 अप्रैल को एक मैच चल रहा था. मैच के बीच ही कैमरा, डगआउट में बैठे RR टीम के मैनेजर रोमी भिंडर पर गया जिसके बाद टूर्नामेंट और उससे जुड़े नियमों की सख्ती को लेकर नई बहस शुरू हो गई. दरअसल दोनों टीम के बीच यह मैच गुवाहाटी में खेला गया जब कैमरे ने उन्हें डगआउट में मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़ लिया. यह एक साधारण हरकत नहीं थी बल्कि सीधे तौर पर BCCI के एंटी-करप्शन प्रोटोकॉल का उल्लंघन बन गया.

सेंसिटिव जोन होता है PMOA

दरअसल IPL में Players and Match Officials Area (PMOA) को बेहद संवेदनशील जोन माना जाता है. यहां किसी भी तरह के बाहरी संपर्क या इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन पर लगभग पूरी तरह रोक है. नियम साफ कहते हैं कि खिलाड़ी, कोच और सपोर्ट स्टाफ मैच शुरू होने से पहले अपने मोबाइल फोन और स्मार्टवॉच जमा कर देते हैं. टीम मैनेजर को फोन रखने की अनुमति जरूर है, लेकिन उसका इस्तेमाल केवल ड्रेसिंग रूम तक सीमित है, डगआउट में नहीं.

क्यों चर्चा में आए रोमी भिंडर?

रोमी भिंडर का मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि वे खिलाड़ियों के बिल्कुल पास बैठकर फोन इस्तेमाल कर रहे थे. वायरल हुए वीडियो में आरआर के स्टार बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी भी भिंडर के साथ बैठे हुए दिख रहे हैं. इससे यह आशंका पैदा होती है कि कहीं कोई बाहरी जानकारी या निर्देश तो साझा नहीं हो रहा था. भले ही यह गलती अनजाने में हुई हो, लेकिन IPL की एंटी-करप्शन यूनिट ऐसी चीजों को हल्के में नहीं लेती. अब रिपोर्ट के आधार पर चेतावनी, जुर्माना या अस्थायी प्रतिबंध जैसे कदम उठाए जा सकते हैं.

कई कड़े नियम हैं लागू

मामला सिर्फ मोबाइल फोन तक सीमित नहीं है. IPL में खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के लिए कई और कड़े नियम लागू हैं. मैच के दिन कोई प्रैक्टिस सेशन या फिटनेस टेस्ट नहीं किया जा सकता. डगआउट में बैठने का भी एक तय तरीका है, कोई भी खिलाड़ी LED विज्ञापन बोर्ड के सामने नहीं बैठ सकता. इतना ही नहीं, मैदान के आसपास अनावश्यक घूमना भी बेंच पर बैठे खिलाड़ियों के लिए मना है. ड्रेसिंग रूम को भी पूरी तरह प्रतिबंधित क्षेत्र माना गया है. यहां परिवार या दोस्तों की एंट्री नहीं होती, यहां तक कि प्रैक्टिस के दिनों में भी नहीं. खिलाड़ियों को अपनी गतिविधियों और मूवमेंट तक सीमित रखना होता है ताकि किसी भी तरह की बाहरी दखलअंदाजी रोकी जा सके.

स्लीवलेस जर्सी या फ्लॉपी हैट- सभी पर नियम

मैदान पर भी अनुशासन की सीमाएं साफ तय हैं. अंपायरों के साथ बदसलूकी, DRS के लिए बाहर से सलाह लेना, या गेंद से छेड़छाड़ जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई होती है. यहां तक कि पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन में क्या पहनना है, यह भी नियमों के दायरे में आता है, स्लीवलेस जर्सी या फ्लॉपी हैट पहनने तक पर रोक है. रोमी भिंडर की घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि IPL सिर्फ एक क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं, बल्कि एक सख्त निगरानी वाला प्रोफेशनल इकोसिस्टम है. यहां छोटी सी लापरवाही भी बड़े सवाल खड़े कर सकती है. ऐसे में सभी टीमों के लिए यह एक चेतावनी है कि नियमों का पालन सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि खेल की विश्वसनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी है.

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