रुपया फिर कमजोर, डॉलर के मुकाबले 95.40 पर बंद; महंगा क्रूड और बाजार की गिरावट बनी वजह
भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 3 पैसे कमजोर होकर 95.40 पर बंद हुआ. महंगे कच्चे तेल, मजबूत डॉलर और घरेलू शेयर बाजार में गिरावट से रुपये पर दबाव रहा. हालांकि, विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने गिरावट को सीमित किया. ब्रेंट क्रूड 2.72 फीसदी बढ़कर 86.05 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया.
भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 3 पैसे कमजोर होकर 95.40 के स्तर पर बंद हुआ. रुपये पर महंगे कच्चे तेल और घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी का दबाव रहा. कारोबार के दौरान रुपया 95.25 से 95.42 के दायरे में रहा. हालांकि, विदेशी निवेशकों की ओर से जारी खरीदारी ने रुपये की गिरावट को सीमित करने में मदद की. बाजार की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर है. आरबीआई 5 अगस्त को ब्याज दरों पर फैसला सुनाएगा.
95.35 पर खुला रुपया
इंटरबैंक फॉरेन करेंसी मार्केट में रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले 95.35 पर खुला. कारोबार के दौरान यह 95.25 के निचले स्तर से लेकर 95.42 के ऊपरी स्तर तक गया. अंत में रुपया 95.40 पर बंद हुआ. सोमवार को भारतीय मुद्रा 95.37 के स्तर पर बंद हुई थी. इस तरह एक कारोबारी सत्र में रुपये में 3 पैसे की गिरावट दर्ज की गई.
महंगा कच्चा तेल बना रुपये पर दबाव
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये पर दबाव बनाया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा 2.72 फीसदी बढ़कर 86.05 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है और डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव आ सकता है.
मजबूत डॉलर और कमजोर बाजार का भी असर
रुपये पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती का भी असर देखने को मिला. डॉलर इंडेक्स 0.13 फीसदी बढ़कर 100.02 पर पहुंच गया. दूसरी ओर घरेलू शेयर बाजार में भी मंगलवार को कमजोरी रही. सेंसेक्स 210.08 अंक गिरकर 78,428.95 पर बंद हुआ. निफ्टी 159.40 अंक की गिरावट के साथ 24,614.90 पर बंद हुआ.
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से मिली राहत
हालांकि, विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने रुपये को कुछ सहारा दिया. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में 922.26 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की. जानकारों के अनुसार विदेशी कैपिटल का फ्लो भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूत करता है और रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकता है.
आरबीआई की बैठक पर बाजार की नजर
अब बाजार की नजर आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर है. तीन दिन की बैठक सोमवार से शुरू हुई है और 5 अगस्त को ब्याज दरों पर फैसला आएगा. बाजार में फिलहाल रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखने की उम्मीद है. जून की बैठक में भी आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था और पश्चिम एशिया में तनाव के असर को देखते हुए सावधानी बरतने का संकेत दिया था.
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