तेल संकट के दौर में भारत के लिए खुशखबरी, रूस ने कहा- जारी रहेगी सप्लाई; जंग के बीच राहत!
रूस की बड़ी सरकारी तेल कंपनी Rosneft ने कहा है कि भारत और चीन को रूसी तेल की सप्लाई लगातार जारी रहेगी. कंपनी का कहना है कि दुनिया में चाहे कितनी भी उथल-पुथल क्यों न हो, रूस अपने प्रमुख साझेदार देशों को तेल की आपूर्ति बनाए रखेगा.

Russian oil supplies Continue to India: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. रूस की बड़ी सरकारी तेल कंपनी Rosneft ने कहा है कि भारत और चीन को रूसी तेल की सप्लाई लगातार जारी रहेगी. कंपनी का कहना है कि दुनिया में चाहे कितनी भी उथल-पुथल क्यों न हो, रूस अपने प्रमुख साझेदार देशों को तेल की आपूर्ति बनाए रखेगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण तेल सप्लाई और परिवहन पर असर पड़ा है.
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए स्थिर तेल सप्लाई देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. रूस ने यह भी कहा कि भारत आने वाले वर्षों में दुनिया में ऊर्जा की मांग बढ़ाने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल रहेगा. ऐसे में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत हो सकता है.
रूस ने भारत को दिया भरोसा
- मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक रूस की सरकारी तेल कंपनी Rosneft के प्रमुख इगोर सेचिन ने कहा कि भारत और चीन को रूसी तेल की सप्लाई स्थिर बनी रहेगी.
- उन्होंने कहा कि रूस को वैश्विक सप्लाई चेन से अलग नहीं किया जा सकता और भारत व चीन के साथ उसकी साझेदारी दोनों देशों के लिए फायदेमंद है.
- उनके अनुसार अप्रैल 2022 से अब तक भारत और चीन को रूसी तेल सप्लाई से 40 अरब डॉलर से ज्यादा का आर्थिक लाभ हुआ है.
भारत के लिए क्यों अहम है रूस
साल 2022 में रूस ने रियायती कीमतों पर कच्चा तेल बेचना शुरू किया था. इसके बाद रूस भारत के सबसे बड़े तेल सप्लायर देशों में शामिल हो गया. इससे भारत को कम कीमत पर तेल खरीदने का मौका मिला और आयात लागत को नियंत्रित करने में मदद मिली.
2035 तक तेजी से बढ़ेगी भारत की तेल खपत
- इगोर सेचिन ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2035 तक भारत की तेल खपत लगभग 80 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकती है.
- यह मौजूदा स्तर से करीब 44 प्रतिशत ज्यादा होगी.
- वहीं दुनिया की कुल तेल मांग में केवल 5 प्रतिशत बढ़ोतरी होने का अनुमान है.
पश्चिम एशिया संघर्ष का असर
सेचिन ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में चल रहे तनाव और नए जोखिम भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मुश्किल पैदा कर सकते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थिति भारत को ऊर्जा सुरक्षा के लिए लंबे समय के समाधान तलाशने की प्रेरणा दे सकती है. युद्ध शुरू होने से पहले भारत की 60 से 70 प्रतिशत तेल जरूरत पश्चिम एशिया से पूरी होती थी. लेकिन संघर्ष और रास्तों में रुकावट के बाद भारत ने रूस, वेनेजुएला और अफ्रीकी देशों से तेल खरीद बढ़ा दी है.
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