भारत की ग्रोथ पर S&P का भरोसा बढ़ा, पर Moody’s ने जताई चिंता, पश्चिम एशिया संकट को बताया चुनौती
S&P Global ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर FY27 के लिए 7.1% कर दिया, जिससे मजबूत अर्थव्यवस्था के संकेत मिले. हालांकि Moody’s ने चेताया कि तनाव बढ़ने पर भारत की ग्रोथ पर बड़ा असर पड़ सकता है. ऊंची तेल कीमतें महंगाई, ट्रेड डेफिसिट और आर्थिक रफ्तार पर दबाव डाल सकती हैं.
India’s GDP growth prediction: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत के लिए राहत की खबर है. अभी भी देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ने की दिशा में है. यही वजह है कि रेटिंग एजेंसी S&P Global ने भारत की विकास दर को लेकर अपना अनुमान बढ़ाया है, जिससे यह साफ है कि देश की ग्रोथ स्टोरी अभी भी मजबूत बनी हुई है. हालांकि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बढ़ने से भारत को झटका लग सकता है. इस पर मूडीज ने चिंता जताई है.
कितना बढ़ाया ग्रोथ अनुमान?
S&P Global ने FY27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है. यह 40 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी है, जो दर्शाती है कि घरेलू मांग, निवेश और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है. सिर्फ FY27 ही नहीं, एजेंसी ने आगे के वर्षों के लिए भी सकारात्मक तस्वीर पेश की है. FY28 के लिए ग्रोथ अनुमान 7.2% और FY29 के लिए 7% कर दिया गया है. इसका मतलब है कि भारत मिड-टर्म में दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना रह सकता है.
किन कारणों से मजबूत है भारत?
- भारत की ग्रोथ को सपोर्ट करने वाले प्रमुख कारकों में कुछ फैक्टर्स अहम है, जो इस प्रकार है.
- मजबूत घरेलू खपत
- सरकारी कैपेक्स
- डिजिटल इकोनॉमी का विस्तार
- इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश
- बैंकिंग सिस्टम की बेहतर स्थिति
- कॉरपोरेट बैलेंस शीट में सुधार
RBI का रुख रहेगा संतुलित
S&P के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) फिलहाल ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा और न्यूट्रल स्टांस बनाए रखेगा. केंद्रीय बैंक के सामने चुनौती यह है कि वह एक तरफ आर्थिक विकास को सपोर्ट करे, वहीं दूसरी ओर महंगाई को भी नियंत्रण में रखे.
महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका
भारत के आर्थिक ग्रोथ की रफ्तार भले ही बेहतर होने की उम्मीद है. मगर S&P ने चेतावनी भी दी है कि बढ़ती ऊर्जा कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं. FY27 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई 4.3% तक पहुंच सकती है, जो FY26 के अनुमानित 2.5% से काफी ज्यादा है. इसका मुख्य कारण कच्चे तेल और ईधन की कीमतों में संभावित तेजी है.
Moody’s ने जताया बड़ा खतरा
Moody’s Analytics ने भारत के लिए एक बड़ा जोखिम बताया है. एजेंसी के मुताबिक अगर पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव लंबा खिंचता है, तो भारत की अर्थव्यवस्था को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे ज्यादा झटका लग सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की आर्थिक गतिविधि अपने बेसलाइन अनुमान से करीब 4% तक नीचे जा सकती है.
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क्यों है भारत ज्यादा संवेदनशील?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. खासतौर पर कच्चा तेल और गैस का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जो मौजूदा संघर्ष से प्रभावित क्षेत्र हैं. अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो तेल की कीमतें बढ़ेंगी, सप्लाई चेन प्रभावित होगी और आयात बिल बढ़ जाएगा. ऊंची ऊर्जा कीमतों का असर कई स्तरों पर दिख सकता है. इससे महंगाई बढ़ेगी, ट्रेड डेफिसिट चौड़ा होगा, रुपये पर दबाव पड़ेगा और उपभोक्ता खर्च कमजोर हो सकता है, जिससे आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है.