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कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने की तैयारी! कैबिनेट ने मंजूर की ‘समुद्र मंथन’ योजना

केंद्र सरकार ने ₹84,084 करोड़ की 'समुद्र मंथन' योजना को मंजूरी दी है. इसका उद्देश्य गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज तेज करना, ऊर्जा कंपनियों को प्रोत्साहन देना और कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करना है.

समुद्र मंथन योजना Image Credit: ai/canva

Highlights

  • समुद्र मंथन योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिली
  • गहरे समुद्र में तेल-गैस खोज तेज होगी
  • योजना पर ₹84,084 करोड़ खर्च किए जाएंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की महत्वाकांक्षी ‘समुद्र मंथन योजना’ (नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम) को मंजूरी दे दी गई. इस योजना पर ₹84,084 करोड़ खर्च किए जाएंगे. इसका उद्देश्य गहरे और अति-गहरे समुद्र में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को तेज करना और दुनिया की बड़ी ऊर्जा कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करना है.

क्या है समुद्र मंथन योजना?

इस योजना का मकसद गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज करने वाली कंपनियों का वित्तीय जोखिम कम करना है. दरअसल, डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में खोज करना बेहद महंगा और जोखिम भरा होता है. इसमें भारी निवेश के साथ भूगर्भीय अनिश्चितताएं भी रहती हैं.

सरकार दे सकती है लागत का 50% तक सहयोग

पहले सामने आए प्रस्ताव के मुताबिक, सरकार खोजी कुओं (Exploratory Wells) की ड्रिलिंग पर होने वाले खर्च का 50% तक वापस कर सकती है. इसके अलावा 3D सिस्मिक सर्वे के खर्च में भी आंशिक आर्थिक सहायता देने की योजना है. हालांकि, योजना की अंतिम शर्तों और नियमों की विस्तृत जानकारी जल्द ही पेट्रोलियम मंत्रालय जारी करेगा.

ONGC ने शुरू कर दी है खोज

इस योजना के तहत ONGC ने इसी महीने महानदी बेसिन में अपना पहला डीपवॉटर खोजी कुआं (Exploratory Well) शुरू किया है. इससे साफ है कि सरकार इस दिशा में पहले से ही काम शुरू कर चुकी है.

क्यों जरूरी है यह योजना?

भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल (Crude Oil) विदेशों से आयात करता है. सरकार का लक्ष्य घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना है. अगर देश में नए तेल और गैस भंडार मिलते हैं, तो इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आयात बिल भी कम हो सकता है.

डीपवॉटर खोज क्यों है महंगी?

गहरे समुद्र में सिर्फ एक खोजी कुएं की ड्रिलिंग पर ही करीब ₹1,000 से ₹1,200 करोड़ तक का खर्च आता है. वहीं, अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में यह लागत इससे भी कई सौ करोड़ रुपये अधिक हो सकती है. यही वजह है कि निजी और विदेशी कंपनियां ऐसे प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले सरकारी प्रोत्साहन चाहती हैं.

18 ब्लॉकों की नीलामी जारी

सरकार फिलहाल ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम (OALP) के तहत 18 डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉकों की नीलामी कर रही है. इन ब्लॉकों के लिए बोली लगाने की अंतिम तारीख 17 सितंबर तक बढ़ा दी गई है. उम्मीद है कि तब तक इस योजना के तहत मिलने वाले प्रोत्साहन भी लागू हो जाएंगे.

कैबिनेट ने और भी बड़े फैसले लिए

समुद्र मंथन योजना के अलावा केंद्रीय कैबिनेट ने PM-KISAN योजना को 2030-31 तक जारी रखने, प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना और संशोधित खेलो इंडिया योजना समेत कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है. इन फैसलों का उद्देश्य कृषि, ऊर्जा और खेल जैसे प्रमुख क्षेत्रों को मजबूत करना है.

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