अनिल अंबानी को सुप्रीम कोर्ट से झटका, लोन अकाउंट फ्रॉड मामले में नहीं मिली राहत

Anil Ambani: सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सिंगल जज की बेंच से अनुरोध किया कि वह तीन बैंकों द्वारा जारी नोटिसों के खिलाफ अंबानी की याचिका पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी लाए. इससे पहले 6 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसियों को निर्देश दिया था कि वे रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की समय-सीमा के भीतर, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करें.

अनिल अंबानी Image Credit: Getty image

Anil Ambani: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उद्योगपति अनिल अंबानी की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें बैंकों को उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खातों को ‘धोखाधड़ी’ (Fraudulent) के तौर पर वर्गीकृत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई थी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची व विपुल एम. पंचोली की बेंच ने अंबानी को यह अनुमति दी कि वे बैंकों द्वारा खातों को धोखाधड़ी घोषित करने के लिए जारी किए गए ‘कारण बताओ नोटिस’ के संबंध में हाई कोर्ट की एकल-न्यायाधीश बेंच के समक्ष अपनी कानूनी चुनौती को आगे बढ़ा सकते हैं.

तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सिंगल जज की बेंच से अनुरोध किया कि वह तीन बैंकों द्वारा जारी नोटिसों के खिलाफ अंबानी की याचिका पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी लाए. SC ने यह आदेश अनिल अंबानी द्वारा दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पारित किया. अनिल अंबानी ने हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच द्वारा 23 फरवरी को दिए गए आदेश को चुनौती दी थी.

इससे पहले, डिवीजन बेंच ने सिंगल जज बेंच के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया था, जिसने उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खिलाफ उनके बैंक खातों को ‘धोखाधड़ी’ के रूप में वर्गीकृत करने के लिए शुरू की गई कार्यवाही पर रोक लगा दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को दिए थे आदेश

इससे पहले 6 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसियों को निर्देश दिया था कि वे रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की समय-सीमा के भीतर, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करें. यह निर्देश 23 मार्च को EAS सरमा द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान दिया गया था. मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली एक बेंच ने, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल थे, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा जमा की गई स्टेटस रिपोर्ट का संज्ञान लिया.

ED ने कोर्ट को बताया कि RAAG से जुड़े कई मामलों की जांच के लिए 12 फरवरी, 2026 को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था. इस SIT में ED के वरिष्ठ अधिकारी, फॉरेंसिक विश्लेषक और बैंकिंग संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हैं. ED की रिपोर्ट के अनुसार, आठ मामलों में जांच शुरू हो चुकी है और कई दस्तावेज पहले ही जब्त किए जा चुके हैं.

एजेंसी ने एक संदिग्ध ‘प्रोजेक्ट हेल्प’ की ओर भी इशारा किया, जिसके तहत कथित तौर पर ऐसे क़र्जदाताओं के जरिए दिवालियापन की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिनका इस मामले से कोई सीधा संबंध नहीं था. इसमें आगे दावा किया गया कि लगभग 2,983 करोड़ रुपये के दावों का निपटारा सिर्फ 26 करोड़ रुपये में कर दिया गया, जिससे संभावित वित्तीय गड़बड़ी की आशंकाएं पैदा हो गई हैं.

CBI ने अपनी रिपोर्ट में कही थी ये बात

CBI ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सात मामलों की जांच सक्रिय रूप से चल रही है, जिनमें पांच हालिया FIR भी शामिल हैं. एजेंसी ने बताया कि अकेले एक मामले में ही कथित तौर पर 2,223 करोड़ रुपये का गलत नुकसान हुआ है, जबकि सभी मामलों को मिलाकर कुल दावों की रकम लगभग 73,006 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. एजेंसी सरकारी कर्मचारियों की भूमिका और वित्तीय संस्थानों के साथ उनकी संभावित मिलीभगत की भी जांच कर रही है.

बुधवार 15 अप्रैल को एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने CBI द्वारा दर्ज कई ECIRs के आधार पर, PMLA मामले के तहत चल रही जांच में अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बाफना को गिरफ्तार किया है.

यह भी पढ़ें: अनिल अंबानी के दो करीबी को ED ने किया गिरफ्तार, मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जांच एजेंसी ने लिया एक्शन

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