90% तक सस्ती होंगी वजन घटाने की दवाएं, पेटेंट खत्म होते ही मची होड़, फार्मा स्टॉक्स में निवेश का बड़ा संकेत
वजन घटाने की महंगी दवा अब आम लोगों की पहुंच में आ सकती है. सेमाग्लूटाइड का पेटेंट खत्म होते ही कई कंपनियों ने इसके सस्ते जेनरिक लॉन्च कर दिए हैं. कीमतों में 70-90% गिरावट से बाजार में हलचल तेज है, जिसका असर फार्मा कंपनियों और निवेशकों पर भी दिख सकता है.
भारत में वजन घटाने वाली दवाएं तेजी से पॉपुलर हो रही हैं, और ऐसे में इसका बाजार भी तेजी से बदल रहा है. कंपनियां लोगों तक पहुंच बढ़ाने के लिए दवाओं को किफायती बना रही हैं. लंबे समय से महंगी मानी जाने वाली सेमाग्लूटाइड अब आम मरीजों की पहुंच में आने वाली है. दिग्गज कंपनी Novo Nordisk की इस चर्चित दवा का पेटेंट खत्म होते ही कई भारतीय कंपनियां इसके सस्ते जेनरिक वर्जन लॉन्च करने जा रही हैं. कीमत में 70 से 90 प्रतिशत तक की गिरावट इस बाजार को पूरी तरह बदल सकती है, जिसका असर मरीजों के साथ-साथ फार्मा कंपनियों और निवेशकों पर भी दिखेगा.
पेटेंट खत्म, बाजार में खुला मुकाबला
सेमाग्लूटाइड, जिसे भारत में Wegovy ब्रांड नाम से जून 2025 में लॉन्च किया गया था, उसका पेटेंट अब समाप्त हो चुका है. इसके साथ ही घरेलू कंपनियों के लिए इस दवा के जेनरिक वर्जन बनाने का रास्ता साफ हो गया है. शनिवार से ही Dr Reddy’s, Natco Pharma, Eris Lifesciences, Zydus और Alkem जैसी कंपनियां बाजार में अपने प्रोडक्ट उतार रही हैं.
इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, करीब 43 कंपनियां या तो इस दवा के लिए मंजूरी हासिल कर चुकी हैं या फिर पाइपलाइन में हैं. आने वाले महीनों में यह कंपटीशन और तेज होने वाला है.
प्राइस वॉर की आशंका भी
हालांकि बाजार में प्राइस वॉर की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि कंपनियां एक सीमित प्राइस बैंड में ही दवा लॉन्च कर रही हैं. फिर भी, ये कीमतें ओरिजिनल दवा की तुलना में काफी कम हैं.
Natco Pharma ने ‘Semanat’ और ‘Semafull’ नाम से अपने वर्जन लॉन्च किए हैं. मल्टी-डोज वायल की कीमत Novo की दवा से करीब 90% तक सस्ती है, जबकि पेन डिवाइस 72% तक सस्ती बताई जा रही है. Eris Lifesciences ने भी ‘Sundae’ ब्रांड के तहत इसी तरह की कीमतों पर एंट्री ली है. दोनों कंपनियों के बीच पहले से साझेदारी भी है, जो इस सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा को और मजबूत बनाती है.
कैसे काम करती है सेमाग्लूटाइड
सेमाग्लूटाइड मूल रूप से टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए विकसित की गई थी, लेकिन बाद में इसे वजन कम करने में भी बेहद प्रभावी पाया गया. यह GLP-1 receptor agonist दवाओं की कैटेगरी में आती है, जो शरीर में भूख और ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है.
Natco को फरवरी 2026 में CDSCO से इसके जेनरिक वर्जन के लिए मंजूरी मिली थी. कंपनी का दावा है कि उसका वायल फॉर्मेट मरीजों को डोज को कस्टमाइज करने और लागत को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद करेगा. इससे मरीजों की पहुंच और लंबे समय तक इलाज जारी रखने की संभावना बढ़ सकती है.
बाजार में पहले से मौजूद खिलाड़ी
पेटेंट खत्म होने से पहले Emcure Pharmaceuticals ने Novo के साथ साझेदारी में Poviztra नाम से इस दवा को लॉन्च किया था. इसकी शुरुआती कीमत करीब 8,790 रुपये प्रति माह थी, जो Wegovy से 15-20% कम थी. अब नए जेनरिक आने से यह कीमत और नीचे आ सकती है.
निवेशकों के लिए क्या संकेत
इस पूरे घटनाक्रम का असर फार्मा कंपनियों के शेयरों पर भी नजर आ सकता है. सेमाग्लूटाइड के जेनरिक लॉन्च से न सिर्फ हेल्थकेयर सेक्टर में बदलाव आएगा, बल्कि फार्मा कंपनियों के लिए भी यह एक बड़ा ग्रोथ अवसर बन सकता है.
| कंपनी का नाम | शेयर प्राइस (₹) | 52 हफ्ते का निचला स्तर (₹) | 52 हफ्ते का उच्च स्तर (₹) |
|---|---|---|---|
| Eris Lifesciences | 1284 | 1097 | 1910 |
| Emcure Pharmaceuticals | 1478 | 889.90 | 1585 |
| Natco Pharma | 959 | 726 | 1059 |
| Dr. Reddy’s | 1298 | 1020 | 1379 |
