अमेरिका ने दी छूट, भारत समेत एशिया की रिफाइनरियां फिर खरीद सकती हैं ईरानी तेल: रिपोर्ट
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच अमेरिका ने ईरानी तेल पर अस्थायी छूट दी है. इस फैसले के बाद भारत समेत एशियाई देश फिर से ईरान से तेल खरीदने की तैयारी में हैं. सप्लाई संकट के बीच यह फैसला वैश्विक तेल बाजार और कीमतों पर बड़ा असर डाल सकता है.
ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव, होर्मुज स्ट्रेट में बाधा और तेल सप्लाई में कमी ने दुनियाभर में कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है. ऐसे हालात में अमेरिका ने बड़ा कदम उठाते हुए ईरानी तेल पर कुछ समय के लिए प्रतिबंधों में ढील दी. अब खबर है कि भारत समेत एशियाई देश फिर से इस तेल की ओर रुख करने पर विचार कर रहे हैं.
भारत फिर खरीद सकता है ईरानी तेल
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की रिफाइनिंग कंपनियां ईरान से तेल खरीदने की तैयारी में हैं. हालांकि, वे अभी सरकार के निर्देश और अमेरिका की तरफ से पेमेंट जैसे नियमों पर स्पष्टता का इंतजार कर रही हैं. हाल ही में भारत ने रूस से तेल की खरीद बढ़ाई थी, लेकिन अब ईरान एक और विकल्प के रूप में सामने आ रहा है.
भारत के अलावा एशिया के अन्य देशों की रिफाइनरियां भी ईरानी तेल खरीदने की संभावनाएं तलाश रही हैं. कई कंपनियां यह जांच कर रही हैं कि क्या वे मौजूदा हालात में बिना किसी बाधा के तेल खरीद सकती हैं.
अमेरिका ने दी अस्थायी छूट
अमेरिका ने 30 दिनों के लिए ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में ढील दी है. यह छूट उन जहाजों पर लागू होगी जिनमें 20 मार्च तक तेल लोड हो चुका है और 19 अप्रैल तक उसे उतारा जाना है. यह इस युद्ध के दौरान तीसरी बार है जब अमेरिका ने ऐसी राहत दी है.
समुद्र में फंसा करोड़ों बैरल तेल
रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 130 से 170 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल समुद्र में जहाजों पर पड़ा है. यह तेल पश्चिम एशिया से लेकर चीन के आसपास के समुद्री इलाकों में फैला हुआ है. इस तेल के बाजार में आने से सप्लाई में सुधार हो सकता है.
एशिया अपनी करीब 60% तेल जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर है. लेकिन हाल में होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने जैसी स्थिति ने सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा दिया है. इसके चलते कई रिफाइनरियां उत्पादन कम करने को मजबूर हो गई हैं.
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चीन बना सबसे बड़ा खरीदार
2018 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से चीन ईरान का सबसे बड़ा ग्राहक बन गया है. चीन की रिफाइनरियां भारी छूट के चलते बड़ी मात्रा में ईरानी तेल खरीदती रही हैं. अब अगर भारत और अन्य देश भी इस बाजार में लौटते हैं, तो तेल व्यापार का संतुलन बदल सकता है.
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