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Silver Prices: फीकी पड़ी चांदी की चमक! इस साल 23% तक गिरे दाम, ये है वजह

2026 में चांदी की कीमत 23 फीसदी गिरकर 58 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है. कच्चे तेल के बढ़ते दाम, मिडिल ईस्ट में ईरान युद्ध और डॉलर की मजबूती के कारण चांदी पर काफी दबाव बना हुआ है. जब तक क्रूड ऑयल सस्ता नहीं होगा तब तक चांदी की दरें सीमित रहने के आसार हैं.

सिल्वर प्राइस Image Credit: Sven Hoppe/picture alliance via Getty Images

Highlights

  • 2026 में चांदी 23 फीसदी नीचे ट्रेड कर चुकी है.
  • जून 2026 में आई 22 फीसदी की गिरावट.
  • 2025 में हुई थी 50 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी.

ऐसा लगता है चांदी की चमक फीकी पड़ गई है, इस साल अब तक चांदी 23 फीसदी नीचे ट्रेड कर चुकी है और आगे इसे बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. अकेले जून में ही चांदी की कीमतों में 22 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है. अभी इसकी कीमत लगभग 58 डॉलर प्रति औंस है, पिछले साल इसमें 50 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अब यह दिसंबर 2025 के लेवल पर आ गई है. चांदी की अब तक की सबसे ज्यादा कीमत 121 डॉलर बनी हुई है, जो जनवरी के आखिर में पहुंची थी.

Silver Price in India: कितनी है कीमत?

भारत में चांदी की कीमत लगभग 2,20,00 प्रति किलोग्राम है, जो हाल ही में ड्यूटी बढ़ने, इम्पोर्ट पर रोक और नए MCX नियमों के बाद इंटरनेशनल कीमतों से पूरी तरह मेल नहीं खाती. चांदी पर दबाव डालने वाली बड़ी मुश्किलें क्या हैं? सच तो यह है कि सोना और चांदी, दोनों कीमती धातुएं, एक बुरे चक्कर में फंस गई हैं. इस चक्कर का सेंटर होर्मुज की खाड़ी है, जहां ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से तेल के जहाज रुकावट से निकलने के लिए संघर्ष कर रहे थे.

बढ़ी तेल की कीमतें

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, तेल की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति को और अधिक बढ़ा देती हैं और अगर यह लंबे समय तक ऊंची रहती है तो यह अर्थव्यवस्था और कंपनियों के लिए बुरा है. ऊंची कीमतें न केवल ईंधन की लागत को प्रभावित करती हैं बल्कि रोजमर्रा के घरेलू सामानों की कीमतों पर भी असर डालती हैं.

86 डॉलर पर ब्रेंट अभी भी ईरान युद्ध से पहले के लेवल से 20 फीसदी ज्यादा ट्रेड कर रहा है. अगर ईरान युद्ध बढ़ता है, तो तेल की कीमतें बढ़ने की सबसे ज्यादा संभावना है, जिससे महंगाई बढ़ेगी. युद्ध शुरू होने के बाद हाल ही में सबसे ज्यादा कीमत 119 डॉलर थी. यह एक रेफरेंस पॉइंट है, इसकी तरफ कोई भी कदम फाइनेंशियल मार्केट के लिए एक ट्रिगर प्वाइंट बन सकता है.

महंगाई का सोने-चांदी से क्या लेना-देना?

महंगाई का चांदी या सोने से क्या लेना-देना है? इसकी एक मजबूत वजह है, US फेडरल रिजर्व ग्लोबल मार्केट पर काफी असर डालता है, क्योंकि तेल, सोना और चांदी जैसी कमोडिटीज़ का इंटरनेशनल लेवल पर डॉलर में ट्रेड होता है. जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो डॉलर मज़बूत होता है, क्योंकि करेंसी की डिमांड बढ़ती है. साथ ही, महंगाई बढ़ती है, जिससे US फेड पर रेट बढ़ाने का दबाव पड़ता है. रेट बढ़ाने से ज्यादा इकॉनमी में लिक्विडिटी कम हो जाती है, उधार लेने की लागत बढ़ जाती है और चीजों और सर्विसेज की कीमतें गिरने लगती हैं.

यूएस फेड की मौजूदा स्थिति

यूएस फेड ने इंटरेस्ट रेट 3.5 फीसदी-3.75 फीसदी पर बनाए रखा है, लेकिन ईरान युद्ध शुरू होने के बाद महंगाई में फिर से बढ़ोतरी के कारण सितंबर में रेट बढ़ने की उम्मीदें बढ़ रही हैं. जून में यूएस सीपीआई एक महीने पहले दर्ज 4.2 फीसदी से गिरकर 3.5 फीसदी हो गई है लेकिन यह तब था जब यूएस और ईरान के बीच सीजफ़ायर की बातचीत शुरू हुई, जिससे तेल की कीमतों में काफी गिरावट आई. तब से, तनाव बढ़ गया है और तेल की कीमतें कुछ समय के लिए 100 डॉलर को भी पार कर गई थीं.

जुलाई की FOMC मीटिंग में 3 सदस्यों ने रेट बढ़ाने के लिए वोट किया, बंटा हुआ वोट यह दिखाता है कि सभी सदस्य रेट रोकने के लिए राजी नहीं हैं. नए फेड चीफ केविन वार्श, मार्केट को आगे की गाइडेंस देने से दूर रह रहे हैं, लेकिन उन्होंने महंगाई कम करने का वादा किया है. अगर तेल नहीं गिरता है, जिससे महंगाई कम नहीं होती है, तो किसी समय यूएस फेड को रेट बढ़ाने होंगे.

इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी से डॉलर मज़बूत होता है, जो 2025 में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट के बाद 2026 में अब तक डॉलर इंडेक्स में 2 फीसदी की बढ़ोतरी में दिखता है. जैसे-जैसे डॉलर मजबूत होता है, सोना और चांदी जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे इन्वेस्टर्स इन कीमती मेटल्स के बजाय डॉलर एसेट्स को पसंद करते हैं.

मौजूदा लेवल के आसपास रह सकती है चांदी की कीमतें

इसलिए, जब तक सितंबर में रेट बढ़ने की उम्मीदें कम नहीं हो जातीं या तेल की कीमतें गिर नहीं जातीं, तब तक चांदी की कीमतें मौजूदा लेवल के आसपास ही रहने की संभावना है. अभी, सोने की कीमत 4055 डॉलर प्रति औंस और चांदी की कीमत 58 डॉलर है, जिससे लंबे समय का औसत सोना-चांदी का रेशियो 60 से 70 फीसदी के बीच बना हुई है.

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