SpiceJet ने दिल्ली हाई कोर्ट में कहा- ‘हम हो सकते हैं तबाह,’ मारन विवाद में ₹144.5 करोड़ तुरंत जमा करने से मांगी राहत

एयरलाइन की ओर से पेश होते हुए, वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सोमवार को जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच को बताया कि स्पाइसजेटके कामकाज और कैश फ्लो पर गंभीर असर पड़ा है.

स्लाइस जेट Image Credit: Tv9

स्पाइसजेट ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि अगर उसे कलानिधि मारन और KAL एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड के साथ चल रहे लंबे विवाद में तुरंत 144.5 करोड़ रुपये जमा करने के लिए मजबूर किया गया, तो वह ‘तबाह’ हो सकती है. इसके लिए उसने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और एविएशन टर्बाइन फ्यूल की बढ़ती कीमतों के कारण पैदा हुई रुकावटों का हवाला दिया.

एयरलाइन की ओर से पेश होते हुए, वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सोमवार को जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच को बताया कि स्पाइसजेटके कामकाज और कैश फ्लो पर गंभीर असर पड़ा है, खासकर खाड़ी देशों की उड़ानों पर लगी पाबंदियों की वजह से.

ध्वस्त हो जाएगी पूरी व्यवस्था

रोहतगी ने अदालत से फंड जुटाने के लिए समय मांगते हुए कहा, ‘पूरा कारोबार ठप पड़ा है. मैं तीन बड़ी एयरलाइनों में सबसे छोटी हूं. अगर जमा न करने के कारण मेरे खाते जब्त कर लिए गए, तो पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी. कम से कम मैं तो जरूर ध्वस्त हो जाऊंगी.’ दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले को 15 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया.

स्पाइसजेट ने 7 अप्रैल को उच्च न्यायालय के उस पूर्व निर्देश के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसमें उसे 14 अप्रैल तक 144.5 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया गया था. एयरलाइन ने तत्काल नकद भुगतान के बजाय गुरुग्राम में एक एकड़ व्यावसायिक संपत्ति गिरवी रखने का भी प्रस्ताव रखा.

रोहतगी ने बताया कि संपत्ति पर कोई भार नहीं है और यह कंपनी के स्वामित्व में है और स्पाइसजेट इसके स्वामित्व विलेख अदालत में जमा करने को तैयार है. उन्होंने कहा कि एयरलाइन ने रियल एस्टेट सलाहकार फर्म सीबीआरई को नियुक्त करके संपत्ति को भुनाने के लिए पहले ही कदम उठा लिए हैं, लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे लेनदेन में कई महीने लग सकते हैं और उसे मजबूरी में संपत्ति नहीं बेचनी चाहिए.

सरकारी पैकेज

रोहतगी ने आगे कहा कि व्यापक एविएशन सेक्टर दबाव में है और संकेत दिया कि सरकार राहत उपायों के साथ हस्तक्षेप कर सकती है.

उन्होंने कहा, ‘मुझे बताया गया है कि सरकार एक पैकेज ला रही है जिससे मुझे सरकारी संप्रभु सुरक्षा पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से ऋण प्राप्त करने का मौका मिलेगा. सरकार एयरलाइंस के लिए गारंटर बनेगी.’

बाधित हो सकता है ऑपरेशन

इसे ध्यान रखते हुए एयरलाइन ने अदालत से जमा की समय सीमा स्थगित करने और अंतरिम सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह किया, यह तर्क देते हुए कि तत्काल प्रवर्तन से परिचालन बाधित हो सकता है, कर्मचारियों और यात्रियों पर असर पड़ सकता है और उसकी वित्तीय स्थिति और खराब हो सकती है.

कुल बकाया रकम

स्पाइसजेट और मारन के बीच लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई विभिन्न अदालतों में कई दौर के मुकदमों से गुजर चुकी है. जनवरी में दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पाइसजेट और उसके प्रमोटर अजय सिंह को 144.5 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया, यह देखते हुए कि पहले के निर्देशों के तहत कुल 194.51 करोड़ रुपये बकाया थे. पहले से जमा किए गए 50 करोड़ रुपये को एडजस्ट करने के बाद, बकाया राशि 144.51 करोड़ रुपये रह गई.

विवाद की शुरुआत

यह विवाद जनवरी 2015 का है, जब एयरलाइन के गंभीर वित्तीय संकट के दौर में मारन और KAL Airways ने SpiceJet में अपनी 58.46% हिस्सेदारी अजय सिंह को ट्रांसफर कर दी थी. इस सौदे के तहत, मारन और KAL Airways ने कन्वर्टिबल वारंट और प्रेफरेंस शेयरों के ज़रिए एयरलाइन में लगभग 679 करोड़ रुपये का निवेश किया था.

बाद में मारन ने आरोप लगाया कि नए मैनेजमेंट ने ये इंस्ट्रूमेंट्स जारी नहीं किए और उन्होंने रिफंड की मांग की, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जजों वाले तीन-सदस्यीय ट्रिब्यूनल के सामने मध्यस्थता की कार्यवाही शुरू हुई. जुलाई 2018 में, ट्रिब्यूनल ने मारन के 1,300 करोड़ रुपये से ज्यादा के हर्जाने के दावे को खारिज कर दिया, लेकिन SpiceJet को वारंट और प्रेफरेंस शेयरों के संबंध में 579 करोड़ रुपये, साथ ही उस पर ब्याज भी वापस करने का निर्देश दिया.

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