6.5 करोड़ की रिपेमेंट प्लान पर सुभाष चंद्रा की सफाई, NCLAT में कहा मुझे बदनाम किया गया
एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने पर्सनल दिवालिया मामले की सुनवाई के दौरान NCLAT में 6.5 करोड़ रुपये की पेमेंट प्लान को लेकर अपनी बात रखी. उनके वकील ने कहा कि 22006 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज दावों के मुकाबले प्रस्तावित प्लान को लेकर चंद्रा को देशभर में बदनाम किया गया.
Highlights
- सुभाष चंद्रा ने 6.5 करोड़ की पेमेंट प्लान को लेकर NCLAT में अपनी बात रखी.
- उनके वकील ने कहा कि चंद्रा को देशभर में बदनाम किया गया.
- चंद्रा पर 22006 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज दावे स्वीकार किए गए हैं.
एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की पर्सनल दिवालिया प्रोसेस से जुड़ा मामला बुधवार को NCLAT में सुनवाई के लिए आया. सुनवाई के दौरान चंद्रा की ओर से पेश वकील सस्मित पात्रा ने कहा कि 6.5 करोड़ रुपये की प्रस्तावित पेमेंट प्लान को लेकर उनके क्लाइंट को पूरे देश में बदनाम किया गया है. यह प्लान 22006 करोड़ रुपये से अधिक के स्वीकार किए गए कर्ज दावों के मुकाबले रखी गई है. वकील ने कहा कि इस मामले में अभी तक कोई अंतिम आदेश नहीं आया है. इसके बावजूद पिछले 15 दिनों से चंद्रा को लेकर मीडिया में कई तरह की बातें कही जा रही हैं.
6.5 करोड़ की प्लान पर क्या बोले वकील
सुभाष चंद्रा की ओर से NCLAT में पेश हुए वकील सस्मित पात्रा ने कहा कि उनके क्लाइंट की छवि को नुकसान पहुंचाया गया है. उन्होंने कहा कि 6.5 करोड़ रुपये की पेमेंट प्लान को 22006 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज दावों के सामने रखकर लगातार प्रचारित किया जा रहा है. वकील ने जोर देकर कहा कि इस मामले में आज की तारीख में कोई अंतिम आदेश मौजूद नहीं है. इसके बावजूद चंद्रा को लेकर देशभर में खराब छवि बनाई गई है. उन्होंने कहा कि इस मामले की वजह से मीडिया ट्रायल जैसी स्थिति पैदा हुई है.
NCLAT ने क्या कहा
चंद्रा के वकील की दलीलों पर NCLAT ने कहा कि वह इस मामले में अपनी शिकायत NCLT के सामने रख सकते हैं. पर्सनल दिवालिया प्रोसेस से जुड़ी कार्यवाही फिलहाल NCLT में चल रही है. ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह चंद्रा के वकील की ओर से रखी गई इस दलील पर कोई आदेश पारित नहीं कर रहा है. दूसरी ओर, क्रेडिटर की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि NCLAT की कार्यवाही का इस्तेमाल मीडिया में बयान देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए. इसके बाद सुनवाई मुख्य कानूनी मुद्दों पर आगे बढ़ी.
5 सदस्यीय NCLT बेंच पर उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान चंद्रा के वकील ने NCLT की 5 सदस्यीय बेंच के गठन पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कंपनीज एक्ट 2013 की धारा 419 की उपधारा 5 का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रावधान का दायरा सीमित है. उनके अनुसार यह प्रावधान NCLT को 5 सदस्यीय बेंच गठित करने का अधिकार नहीं देता. वकील ने यह भी सवाल किया कि 25 अगस्त को NCLT के न्यायिक सदस्य निलेश शर्मा की राय पर ही रोक क्यों लगाई गई. उन्होंने पूछा कि 5 सदस्यीय बेंच ने किस अधिकार के तहत मामले की सुनवाई की और इस प्रक्रिया के पीछे क्या कार्यवाही हुई.
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7 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
NCLAT ने सुनवाई के दौरान कहा कि लेंडर्स की ओर से दायर अपील में 5 सदस्यीय NCLT बेंच के गठन को चुनौती नहीं दी गई है. ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि अगर सुभाष चंद्रा 1 सितंबर के आदेश से प्रभावित हैं तो वह उसे अलग से चुनौती दे सकते हैं. सॉलिसिटर जनरल ने शुरुआत में लेंडर्स की अपील वापस लेने की अनुमति मांगी थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपील को लंबित रखने का फैसला किया. NCLAT ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय कर दी है.
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