चीनी की कीमतों में उछाल से बढ़ेगा ग्राहकों का खर्च, त्योहारी सीजन में जश्न मनाना और गिफ्ट देना होगा महंगा
Sugar Price Hike: आने वाले महीनों में भी कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं. आगे क्या होगा, यह चीनी की नई सप्लाई और उत्पादन लागत (इनपुट कॉस्ट) में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा. कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब भारत में त्योहारी सीजन की शुरुआत हो रही है.
Highlights
- खाद्य महंगाई दर सालाना आधार पर 7.7 फीसदी हो गई.
- चीनी ने उपभोक्ताओं के लिए जश्न मनाने और उपहार देने का खर्च बढ़ा दिया है.
- सितंबर में चीनी की कीमतों में सालाना आधार पर 29.8% की बढ़ोतरी हुई.
Sugar Price Hike: त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में चीनी की कीमतें आसमान छू रही हैं. इस वजह से मिठाइयां, कैंडी और डेजर्ट महंगे हो रहे हैं. महंगी चीनी ने उपभोक्ताओं के लिए जश्न मनाने और उपहार देने का खर्च बढ़ा दिया है. त्योहारी मांग बढ़ने के साथ ही निर्माताओं पर भी दबाव बढ़ गया है. विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीनों में भी कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं. आगे क्या होगा, यह चीनी की नई सप्लाई और उत्पादन लागत (इनपुट कॉस्ट) में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा.
चीनी की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी?
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में चीनी, कन्फेक्शनरी और डेजर्ट में महंगाई दर सालाना आधार पर 13.8 फीसदी तक पहुंच गई, जो अगस्त में 10.9% और जनवरी में 3.4% थी. सितंबर में चीनी की कीमतों में सालाना आधार पर 29.8% की बढ़ोतरी हुई, जबकि अगस्त में यह 24.3% थी.
ईटी के अनुसार, क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक पूनम उपाध्याय ने कहा, ‘यह बढ़ोतरी चीनी सहित मुख्य कच्चे माल की बढ़ती लागत को दर्शाती है. उन्होंने आगे कहा कि त्योहारी मांग ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है’
मिठाइयों की महंगाई दर
सितंबर में तैयार मिठाइयों (जो दूध से नहीं बनी हैं) में महंगाई दर बढ़कर 9.4% हो गई, जो अगस्त में 7.3% थी. वहीं, कैंडी की कीमतों में 11.5% की बढ़ोतरी हुई, जबकि पिछले महीने यह 6% थी. रेडीमेड भोजन और अन्य खाद्य उत्पादों में महंगाई दर 9.6% से बढ़कर 10% हो गई, और नमकीन में यह 3% से बढ़कर 3.4% हो गई.
कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब भारत में त्योहारी सीजन की शुरुआत हो रही है. अक्टूबर में नवरात्रि, दुर्गा पूजा और दशहरा के साथ त्योहारों का सिलसिला तेज हो जाता है और दिवाली के आसपास यह अपने चरम पर पहुंच जाता है, जिससे मिठाइयों, कन्फेक्शनरी और स्नैक्स की मांग बढ़ जाती है.
खाद्य महंगाई में उछाल
कुल मिलाकर, खाद्य महंगाई अगस्त के 6 फीसदी से बढ़कर सालाना आधार पर 7.7 फीसदी हो गई, जबकि खुदरा महंगाई 4.8% से बढ़कर 5.54% पर पहुंच गई. आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीजों की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं, क्योंकि अनियमित बारिश से कृषि उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा है.
कब आ सकती है कीमतों में नरमी?
पूनम उपाध्याय ने कहा कि कि गन्ने की पेराई का आने वाला सीजन आपूर्ति में सुधार ला सकता है, लेकिन कीमतों में कमी कब और कितनी आएगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बाजार में नया माल कितनी जल्दी पहुंचता है और चीनी का वास्तविक उत्पादन कितना होता है. उन्होंने यह भी कहा कि कम बारिश के कारण गन्ने की पैदावार को लेकर चिंताएं हैं, जिसका असर उत्पादन पर पड़ सकता है.
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