टाटा ग्रुप विवाद: नोएल टाटा अपने बेटे के साथ पहुंचे कोर्ट, ट्रस्ट्स के वाइस-चेयरमैन के खिलाफ याचिका दायर
Tata Group Controversy: टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन. टाटा और उनके बेटे नेविल टाटा ने मद्रास हाई कोर्ट में टाटा ट्रस्ट्स के वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन के खिलाफ अलग-अलग कैविएट याचिकाएं दायर की हैं. मद्रास हाई कोर्ट में इन कैविएट का दायर होना चौंकाने वाला है.
Highlights
- टाटा ट्रस्ट्स के वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन के खिलाफ याचिकाएं दायर.
- श्रीनिवासन, जो TVS मोटर कंपनी के चेयरमैन एमेरिटस भी हैं.
- टाटा संस के व्यावसायिक और रणनीतिक मामलों में ट्रस्ट की भागीदारी पर सवाल.
Tata Group Controversy: टाटा समूह के भीतर छिड़ा विवाद हर रोज नए रूप लेता जा रहा है. बोर्ड रूप से शुरू हुआ विवाद अब कोर्ट तक पहुंच चुका है. इस बार नोएल टाटा ने कोर्ट का रुख किया है और टाटा ट्रस्ट्स के वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन के खिलाफ याचिकाएं दायर की हैं. सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) के प्रशासन को लेकर चल रहे विवाद के बीच, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन. टाटा और उनके बेटे नेविल टाटा ने मद्रास हाई कोर्ट में टाटा ट्रस्ट्स के वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन के खिलाफ अलग-अलग कैविएट याचिकाएं दायर की हैं.
13 अक्टूबर को दायर की गई इन कैविएट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अगर श्रीनिवासन की ओर से उनके (टाटा परिवार के सदस्यों के) खिलाफ कोई शिकायत आती है, तो कोर्ट कोई भी आदेश देने से पहले टाटा परिवार का पक्ष भी सुने. नोएल टाटा और नेविल टाटा, दोनों ही SDTT के ट्रस्टी हैं.
चौंकाने वाला फैसला
मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि मद्रास हाई कोर्ट में इन कैविएट का दायर होना चौंकाने वाला है, क्योंकि SDTT महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के अधिकार क्षेत्र में आता है. श्रीनिवासन, जो TVS मोटर कंपनी के चेयरमैन एमेरिटस भी हैं, चेन्नई में रहते हैं. कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, ये फाइलिंग उस विवाद के बीच उठाए जा रहे व्यापक कानूनी एहतियाती कदमों का हिस्सा हैं.
नोएल टाटा की क्या है मांग
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि नोएल टाटा, श्रीनिवासन और विजय सिंह द्वारा चैरिटी कमिश्नर के पास दर्ज कराई गई उस शिकायत से जुड़ी सभी कानूनी संभावनाओं को कवर करना चाहते हैं, जिसमें SDTT के प्रशासन और गवर्नेंस की तत्काल जांच की मांग की गई है.
उन्होंने बताया कि कमिश्नर पहले ही सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के कामकाज पर रोक (फ्रीज) लगा चुके हैं, और अब यह चिंता जताई जा रही है कि कहीं SDTT का भी यही हश्र न हो जाए.
गवर्नेंस खामियों का आरोप
चैरिटी कमिश्नर ने नोएल टाटा और अन्य ट्रस्टियों को 19 अक्टूबर तक शिकायत का जवाब देने के लिए कहा है. इस शिकायत में SDTT में गंभीर गवर्नेंस खामियों का आरोप लगाया गया है और टाटा संस के व्यावसायिक और रणनीतिक मामलों में ट्रस्ट की भागीदारी पर सवाल उठाए गए हैं. मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि नोएल टाटा और अन्य ट्रस्टियों ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा था.
केविएट दाखिल करने का मकसद
उन्होंने आगे बताया कि जवाब मिलने के बाद, चैरिटी कमिश्नर ‘महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट’ के अनुसार इन शिकायतों पर फैसला लेंगे. SDTT को छोड़कर, टाटा ट्रस्ट्स ने महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट के तीन प्रावधानों- धारा 41D, 41E और 67 – के तहत महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास 84 ‘केविएट’ (Caveat) दाखिल किए हैं. इनका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ट्रस्ट से जुड़े मामलों में कोई भी आदेश पारित होने से पहले उनका पक्ष सुना जाए.
श्रीनिवासन ने कई मुद्दों पर जताई है चिंता
SDTT के वाइस-चेयरमैन और ट्रस्टी, श्रीनिवासन और सिंह ने कई मुद्दों पर चिंता जताई है. इनमें नोएल टाटा की नियुक्ति और ‘परपेचुअल ट्रस्टी’ (स्थायी ट्रस्टी) के रूप में उनका बने रहना, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन के तौर पर उनके पद का आधार, नेविल टाटा की नियुक्ति, और निर्णय लेने की प्रक्रिया से श्रीनिवासन को बाहर रखा जाना शामिल है. श्रीनिवासन, टाटा संस के बोर्ड में नॉमिनी डायरेक्टर भी हैं.
‘कोड ऑफ सिविल प्रक्रिया’ (Code of Civil Procedure) की धारा 148A के तहत, ‘केविएट’ दाखिल करने से यह सुनिश्चित होता है कि प्रभावित होने वाली पार्टी का पक्ष सुने बिना अदालत कोई एकतरफा अंतरिम राहत न दे दे.
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