ट्रंप को मिलेगी रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने की शक्ति, US हाउस ने आगे बढ़ाया बिल
मंगलवार शाम को हाउस में 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' ने एक प्रक्रियात्मक बाधा पार कर ली, जब दो डेमोक्रेटिक सांसदों ने रिपब्लिकन के साथ मिलकर वोट किया. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजे जाने से पहले इस बिल को हाउस से मंजूरी मिलनी जरूरी है.
Highlights
- ईरान पर पहले से लगे प्रतिबंधों को भी बढ़ाएगा.
- दो डेमोक्रेटिक सांसदों ने रिपब्लिकन के साथ मिलकर वोट किया.
- बुधवार को हाउस में इस बिल पर अंतिम वोटिंग हो सकती है.
अमेरिका एक बार फिर से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की तरफ बढ़ा है. अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इससे संबंधित बिल को आगे बढ़ाने के लिए वोट किया है. यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों (जैसे भारत) पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार देगा जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं, साथ ही ईरान पर पहले से लगे प्रतिबंधों को भी बढ़ाएगा.
आज हो सकती है फाइनल वोटिंग
मंगलवार शाम को हाउस में ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ ने एक प्रक्रियात्मक बाधा पार कर ली, जब दो डेमोक्रेटिक सांसदों ने रिपब्लिकन के साथ मिलकर वोट किया. उम्मीद है कि बुधवार को हाउस में इस बिल पर अंतिम वोटिंग होगी.
रिपोर्ट के अनुसार, रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव को कई अन्य कानूनों के साथ, 214-211 वोटों से मंजूरी मिल गई. इस नतीजे ने हाउस में डेमोक्रेटिक नेताओं को हैरान कर दिया.
अमेरिकी सीनेट से मिल चुकी है मंजूरी
सोमवार को हाउस की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ सदस्य और डेमोक्रेटिक कांग्रेसी ग्रेगरी मीक्स ने इस बिल का विरोध किया. उनका तर्क था कि इससे राष्ट्रपति ट्रंप को बिना किसी रोक-टोक के टैरिफ लगाने का बेहिसाब अधिकार मिल जाएगा.
पिछले महीने, अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के अंतर से इस बिल को मंजूरी दी थी. इस कानून का मकसद न सिर्फ रूस के नेताओं और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाना है, बल्कि उन जहाजों के ‘शैडो फ्लीट’ (गुप्त बेड़े) पर भी रोक लगाना है, जो तेल की डिलीवरी पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मॉस्को की मदद करते हैं.
अमेरिका का मानना है कि रूस का कच्चा तेल व्यापार यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए फंड जुटाने में मदद कर रहा है.
चीन और भारत पर टैरिफ लगाने का अधिकार
इस बिल में ट्रंप को चीन और भारत समेत रूस के प्रमुख तेल व्यापारिक साझेदारों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है. 7 अगस्त को सीनेट द्वारा पारित बिल के वर्शन में रूस के व्यापारिक साझेदारों के नाम नहीं हैं, बल्कि मात्रा के हिसाब से तेल और गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों का जिक्र है.
कीव को समर्थन देने के लिए दबाव
यह वोटिंग ऐसे समय में हो रही है जब यूक्रेन-समर्थक समूहों ने वॉशिंगटन में लॉबिंग की कोशिशें तेज कर दी हैं. ‘अमेरिकन कोएलिशन फॉर यूक्रेन’ द्वारा आयोजित ‘यूक्रेन एक्शन समिट’ चल रही है, जिसका मकसद अमेरिकी सांसदों पर कीव को लगातार समर्थन देने के लिए दबाव बनाना है.
राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजे जाने से पहले इस बिल को हाउस से मंजूरी मिलनी जरूरी है. हाउस में गुरुवार से शुरुआती अवकाश शुरू होने वाला है और उम्मीद है कि मध्यावधि चुनावों के बाद 9 नवंबर को इसकी बैठक फिर से होगी.
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