अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जंग में फूंक दिए ₹3.21 लाख करोड़, दर्जनों जेट भी नष्ट; अब तक नहीं मिली सफलता
एक रिपोर्ट में सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध में 33.4 अरब डॉलर (लगभग 3.21 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए हैं. अमेरिका को अपने सपोर्ट विमानों के मामले में भी नुकसान उठाना पड़ा. शायद सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा MQ-9 रीपर से जुड़ा है.
Highlights
- नुकसान सिर्फ विमानों तक ही सीमित नहीं था.
- अमेरिकी राजनयिक ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा.
- युद्ध मेरिका के लिए कहीं अधिक महंगा और मुश्किल साबित हुआ है.
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को छह महीने से अधिक का समय हो गया है. दोनों दी देश अभी तक किसी भी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं. अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जंग में बड़े पैमाने पर अपने संसाधन झोंक दिए हैं, लेकिन अभी तक वो कोई ठोस सफलता हासिल नहीं कर सका है. इस बीच एक रिपोर्ट में सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध में 33.4 अरब डॉलर (लगभग 3.21 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए हैं.
22 अरब डॉलर के हथियारों का इस्तेमाल
पेंटागन के एक निगरानी अधिकारी ने बताया है कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध में 33.4 अरब डॉलर (लगभग 3.21 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए हैं. इस दौरान 22 अरब डॉलर से ज्यादा के हथियार इस्तेमाल हुए, दर्जनों विमान खो गए या क्षतिग्रस्त हो गए और सैकड़ों इमारतों को नुकसान पहुंचा है.
हथियारों के भंडार पर दबाव
रक्षा विभाग के इंस्पेक्टर जनरल की एक रिपोर्ट में इस अभियान के दौरान हुए नुकसान का पहला आधिकारिक ब्यौरा दिया गया है. यह रिपोर्ट 28 फरवरी से 30 जून तक की अवधि को कवर करती है और इससे अमेरिका के हथियारों के भंडार पर पड़ रहे दबाव का भी पता चलता है.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार इन खबरों को खारिज किया था कि महीनों की लड़ाई के बाद अमेरिका को गोला-बारूद की कमी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन रक्षा विभाग ने हथियारों के भंडार को फिर से भरने में ‘रणनीतिक इन्वेंट्री की कमी’ और ‘औद्योगिक आधार की बाधाओं’ को स्वीकार किया है.
उपकरणों का नुकसान
रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान अमेरिका ने इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद पर लगभग 22 अरब डॉलर खर्च किए. इसके अलावा, उपकरणों के नुकसान से 3.7 अरब डॉलर का नुकसान हुआ और अन्य खर्चों में 7.4 अरब डॉलर और जुड़ गए. साथ दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, कुल सैन्य खर्च 33.4 अरब डॉलर रहा.
अमेरिका के दर्जनों विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए
नुकसान में अमेरिका के कुछ सबसे महत्वपूर्ण विमान शामिल थे, जिनमें फाइटर जेट और हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर से लेकर हेलीकॉप्टर और बिना पायलट वाले निगरानी प्लेटफॉर्म तक शामिल हैं.
कम से कम चार F-15E फाइटर जेट नष्ट हो गए. इनमें से तीन को 1 मार्च को कुवैत के ऊपर ‘फ्रेंडली फायर’ (अपनी ही सेना की गोलीबारी) में मार गिराया गया था और एक अन्य अप्रैल में ईरान के ऊपर लड़ाई के दौरान खो गया था. मार्च में ईरानी गोलीबारी से कम से कम एक F-35A स्टील्थ फाइटर क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि कम से कम एक A-10 ग्राउंड-अटैक विमान भी मार गिराया गया.
एरियल-रीफ्यूलिंग टैंकर भी नष्ट हुए
अमेरिका को अपने सपोर्ट विमानों के मामले में भी नुकसान उठाना पड़ा. कम से कम सात KC-135 एरियल-रीफ्यूलिंग टैंकर क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए, जबकि सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर एक E-3 सेंट्री एयरबोर्न अर्ली-वॉर्निंग विमान क्षतिग्रस्त हो गया.
अन्य विमानों के नुकसान में एक HH-60W हेलीकॉप्टर, एक MQ-4C ट्राइटन निगरानी विमान और एक AH-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर शामिल थे. ईरान में कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ठीक न हो पाने लायक माने जाने के बाद चार AH-6 हेलीकॉप्टर नष्ट कर दिए गए.
30 रीपर ड्रोन नष्ट हुए
शायद सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा MQ-9 रीपर से जुड़ा है. कुल 30 रीपर ड्रोन नष्ट हो गए, जिससे उस अभियान की लागत और बढ़ गई जो मुख्य रूप से निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमलों पर निर्भर था. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी निगरानी और अटैक ड्रोन पर और हमले करने का दावा किया और कहा कि तेहरान ने अमेरिका के एक सबमर्सिबल (पानी के नीचे चलने वाले वाहन) को कब्जे में ले लिया है.
अमेरिका के सैकड़ों ठिकाने क्षतिग्रस्त हुए
नुकसान सिर्फ विमानों तक ही सीमित नहीं था. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि ईरानी हमलों से कुवैत, बहरीन, कतर, UAE, सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों इमारतें और संरचनाएं क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गईं. निगरानी संस्था ने नुकसान का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया.
अमेरिकी लॉजिस्टिक्स ऑपरेशंस को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अभियान के दौरान और उससे पहले पर्याप्त नेवल बेस और सपोर्ट पोर्ट बनाना एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि पोर्ट तक पहुंचने और बेड़े को फिर से जरूरी सामान पहुंचाने में मुश्किलें आ रही थीं.
लॉजिस्टिक्स सपोर्ट की समस्या
लॉजिस्टिक्स सपोर्ट को डिएगो गार्सिया ले जाने से एक और समस्या खड़ी हो गई. रिपोर्ट में CENTCOM के हवाले से कहा गया, ‘लॉजिस्टिक्स सपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर को डिएगो गार्सिया ले जाने में दूरी एक समस्या थी, क्योंकि समुद्र में लंबी यात्रा के कारण लॉजिस्टिक्स साइकिल 14 से 18 दिन का हो जाता था.’
ईरानी हमलों से इलाके में अमेरिकी राजनयिक ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा. निगरानी संस्था ने इराक, कुवैत, सऊदी अरब और UAE में अमेरिकी राजनयिक ठिकानों को हुए नुकसान का अनुमान 184 मिलियन डॉलर लगाया. कई क्षेत्रीय राजधानियों में लोगों को वापस बुलाने के आदेश और यात्रा पर लगी पाबंदियों के कारण निर्माण कार्य में देरी से वाशिंगटन को भी हर महीने लगभग 24.5 मिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा.
इराक सबसे अधिक प्रभावित
इराक पर इसका सबसे अधिक असर पड़ा. अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि जून के आखिर तक इराक में उसके मिशन पर 600 से अधिक हमले हुए, जिससे लगभग 157 मिलियन डॉलर का खर्च आया.
एर्बिल में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की कई इमारतों को नुकसान पहुंचा, जबकि बगदाद में अमेरिकी दूतावास को भी नुकसान हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक, बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास बगदाद डिप्लोमैटिक सपोर्ट सेंटर को भारी नुकसान पहुंचा.
कुवैत में कुवैत सिटी स्थित अमेरिकी दूतावास ने क्षेत्रीय तनाव, हमलों और दूतावास की सुविधाओं को हुए नुकसान के कारण 5 मार्च को कामकाज रोक दिया. इसका अनुमानित खर्च लगभग 14.75 मिलियन डॉलर था.
3 मार्च को रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ईरान के दो ड्रोन गिरे, जिससे लगभग 11.5 मिलियन डॉलर का भौतिक नुकसान हुआ. दुबई में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की एक यूटिलिटी बिल्डिंग को भी नुकसान पहुंचा, जिसकी लागत लगभग 1,20,000 डॉलर आंकी गई.
ईरान ने अपनी हार के दावों का मजाक उड़ाया
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने उन दावों पर भी तंज कसा जिनमें कहा गया था कि संघर्ष के दौरान ईरान बेबस हो गया था. X पर एक पोस्ट में, अरागची ने पेंटागन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कल्पना और हकीकत के बीच अंतर बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना के सैकड़ों ठिकानों को उड़ा दिया गया और दर्जनों विमान जलकर खाक हो गए. उन्होंने आगे कहा कि यह तो बस शुरुआत है और चेतावनी दी कि तेहरान सही समय पर और जानकारी देगा.
ये आंकड़े उन शुरुआती दावों के बिल्कुल उलट हैं जिनमें कहा गया था कि यह संघर्ष जल्दी खत्म हो जाएगा. ट्रंप ने बार-बार कहा था कि युद्ध कुछ ही हफ्तों तक चलेगा, लेकिन बाद में कहा कि यह नवंबर के मध्यावधि चुनावों के ठीक बाद खत्म हो सकता है.
नहीं दिख रहे युद्ध खत्म होने के आसार
इसलिए, पेंटागन की निगरानी संस्था के आंकड़े एक ऐसे संघर्ष की ओर इशारा करते हैं जो प्रशासन के शुरुआती बयानों की तुलना में अमेरिका के लिए कहीं अधिक महंगा और मुश्किल साबित हुआ है. बातचीत न होने और कोई स्पष्ट कूटनीतिक सफलता न दिखने के कारण, युद्ध के खत्म होने के भी कोई आसार नहीं दिख रहे हैं.
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