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Current Account Deficit: जुलाई में करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़कर 7 अरब डॉलर, ट्रेड डेफिसिट ने बढ़ाई चिंता

भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट जुलाई 2026 में बढ़कर 7 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल इसी महीने 3.2 अरब डॉलर था. RBI के मुताबिक, मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 31.7 अरब डॉलर पहुंच गया. जुलाई में इंपोर्ट 76.8 अरब डॉलर और एक्सपोर्ट 45.1 अरब डॉलर रहा. हालांकि, सर्विसेज सरप्लस बढ़कर 17.6 अरब डॉलर हुआ.

भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट जुलाई 2026 में बढ़कर 7 अरब डॉलर हो गया.

Highlights

  • जुलाई 2026 में करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़कर 7 अरब डॉलर हुआ.
  • पिछले साल जुलाई में करंट अकाउंट डेफिसिट 3.2 अरब डॉलर था.
  • मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 31.7 अरब डॉलर पहुंचा.

भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट में जुलाई 2026 में बड़ा इजाफा हुआ है. जुलाई में करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़कर 7 अरब डॉलर हो गया. पिछले साल जुलाई में यह 3.2 अरब डॉलर था. यानी एक साल में इसमें 3.8 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट का बढ़ना है. हालांकि, सर्विसेज सरप्लस और कैपिटल इनफ्लो से देश को कुछ राहत मिली है.

मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट बढ़ा

RBI के आंकड़ों के मुताबिक,, जुलाई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट 31.7 अरब डॉलर रहा. पिछले साल जुलाई में यह 28.2 अरब डॉलर था. यानी ट्रेड डेफिसिट में 3.5 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. जुलाई में देश का इंपोर्ट बढ़कर 76.8 अरब डॉलर हो गया. वहीं एक्सपोर्ट 45.1 अरब डॉलर रहा. इंपोर्ट में तेज बढ़ोतरी का सीधा असर ट्रेड डेफिसिट पर पड़ा.

इंपोर्ट बढ़ा, एक्सपोर्ट में भी तेजी

जुलाई 2026 में भारत का इंपोर्ट 76.8 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 65.6 अरब डॉलर था. यानी इंपोर्ट में 11.2 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई. दूसरी तरफ एक्सपोर्ट भी 37.4 अरब डॉलर से बढ़कर 45.1 अरब डॉलर हो गया. एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी के बावजूद इंपोर्ट ज्यादा रहने से मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट बढ़ गया. यही करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने की सबसे बड़ी वजह बनी.

सर्विसेज सेक्टर से मिली राहत

मर्चेंडाइज ट्रेड में बढ़ते घाटे के बीच सर्विसेज सेक्टर से भारत को राहत मिली है. जुलाई में नेट सर्विसेज सरप्लस बढ़कर 17.6 अरब डॉलर हो गया. पिछले साल जुलाई में यह 16.4 अरब डॉलर था. जुलाई में सर्विसेज एक्सपोर्ट 38.3 अरब डॉलर रहा. वहीं सर्विसेज इंपोर्ट 20.6 अरब डॉलर रहा. इससे मर्चेंडाइज ट्रेड में बढ़े घाटे का कुछ असर कम करने में मदद मिली.

कैपिटल अकाउंट में आया बड़ा इनफ्लो

जुलाई 2026 में कैपिटल अकाउंट में 27.7 अरब डॉलर का नेट इनफ्लो दर्ज हुआ. पिछले साल जुलाई में यह सिर्फ 3.5 अरब डॉलर था. विदेशी निवेश से भी देश को मजबूत सपोर्ट मिला. जुलाई में नेट FDI इनफ्लो 7.3 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल 4.5 अरब डॉलर था. FPI में भी जुलाई में 4.1 अरब डॉलर का नेट इनफ्लो आया, जबकि पिछले साल 2.5 अरब डॉलर का आउटफ्लो हुआ था.

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अप्रैल से जुलाई तक भी बढ़ा घाटा

अप्रैल से जुलाई 2026 की अवधि में भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट 11.2 अरब डॉलर रहा. पिछले साल इसी अवधि में यह 6.6 अरब डॉलर था. यानी चार महीने की अवधि में भी करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ा है. हालांकि, इसी अवधि में कैपिटल अकाउंट में 23.9 अरब डॉलर का नेट इनफ्लो रहा. ओवरऑल बैलेंस 12.7 अरब डॉलर के सरप्लस में रहा, जो पिछले साल 4.8 अरब डॉलर था.