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Bharti Shipyard: कभी आर्थिक संकट के कारण बंद हुआ था यह शिपयार्ड, अब जहाज बनाकर ऐसे करेगा इकोनॉमी को बूस्ट

Hazoor Multi Projects अपनी सहायक कंपनी Square Port Shipyard के जरिए महाराष्ट्र के डाभोल में बंद पड़े Bharati Shipyard को दोबारा विकसित कर रही है. कंपनी ने Damen के साथ साझेदारी की है और शिपयार्ड के विस्तार की योजना बनाई है. FY26 में कंपनी ने 579.58 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया. शेयर एक साल में 60% से ज्यादा गिरा, जबकि पांच साल में 574% रिटर्न दिया है.

हुज़ूर मल्टी प्रोजेक्ट्स

Highlights

  • Hazoor Multi Projects ने 2023 में करीब 184.5 करोड़ रुपये में Bharati Shipyard खरीदा था.
  • कंपनी ने शिपयार्ड को अपग्रेड करने के लिए Damen Technical Cooperation BV के साथ MoU किया है.
  • शेयर एक साल में 60% से ज्यादा गिरा है, जबकि पांच साल में करीब 574% रिटर्न दे चुका है.

भारत के पुराने शिपयार्ड में से एक Bharati Shipyard का डाभोल प्लांट एक बार फिर जहाज बनाने के लिए तैयार हो रहा है. महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में स्थित इस शिपयार्ड को Hazoor Multi Projects Ltd अपनी सहायक कंपनी स्क्वायर पोर्ट शिपयार्ड प्राइवेट लिमिटेड के जरिए दोबारा खड़ा कर रही है. कभी आर्थिक संकट के चलते बंद पड़ा यह शिपयार्ड अब फिर से जहाज बनाने लगा है. कंपनी की योजना इसे भारत के पश्चिमी तट पर एक बड़े प्राइवेट शिपबिल्डिंग हब के रूप में विकसित करने की है.

इस कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए कंपनी ने विदेशी शिपबिल्डिंग ग्रुप Damen के साथ भी हाथ मिलाया है. इसके अलावा, शिपयार्ड में नए निवेश के जरिए विस्तार की तैयारी है. कंपनी के इस कारोबार में आगे बढ़ने की खबर ऐसे समय आई है, जब इसके शेयर लंबे समय से दबाव में हैं. हालांकि, लंबी अवधि में शेयर ने निवेशकों को शानदार रिटर्न भी दिया है. ऐसे में कंपनी के शिपबिल्डिंग कारोबार की वापसी और शेयर का प्रदर्शन दोनों निवेशकों के लिए अहम हैं.

2023 में करीब 184.5 करोड़ रुपये में खरीदा था शिपयार्ड

Hazoor Multi Projects की सहायक कंपनी स्क्वायर पोर्ट शिपयार्ड प्राइवेट लिमिटेड के पास महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के डाभोल में मौजूद पूर्व भारती शिपयार्ड का मालिकाना हक है. Square Port ने मई 2023 में दिवालिया प्रक्रिया के तहत हुई नीलामी में इस शिपयार्ड को करीब 184.5 करोड़ रुपये में खरीदा था. Bharati Shipyard ने डाभोल में इस प्लांट को अपने प्रमुख शिपयार्ड के तौर पर विकसित किया था. इसे 1,00,000 DWT तक के जहाज बनाने के लिए डिजाइन किया गया था. लेकिन कंपनी के दिवालिया होने के बाद 2017-18 में यहां काम बंद हो गया था.

यह शिपयार्ड करीब 184 एकड़ में फैला है. यहां 200 मीटर लंबी बर्थ है, जिसे भारत के किसी प्राइवेट शिपयार्ड में सबसे गहरे बर्थ में से एक बताया गया है. अब Hazoor Multi Projects इस पुरानी जगह को दोबारा चालू करने की दिशा में काम कर रही है.

अप्रैल 2024 में मिला पूरा कंट्रोल, फिर शुरू हुआ काम

Hazoor Multi Projects ने अप्रैल 2024 में Square Port Shipyard का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में लिया. इसके बाद शिपयार्ड में जहाज निर्माण का काम दोबारा शुरू करने की दिशा में कदम उठाए गए. 30 मार्च 2025 को यहां एक नए लैंडिंग क्राफ्ट के लिए स्टील कटिंग की गई. यह जहाज ब्रिटेन की एक शिपिंग कंपनी के ऑर्डर पर बनाया जा रहा है. इसके साथ ही शिपयार्ड में निर्माणाधीन जहाजों की संख्या पांच हो गई. अप्रैल 2025 में Square Port ने नीदरलैंड की Damen Shipyards Group की कंपनी Damen Technical Cooperation BV के साथ समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर किए. इस साझेदारी का मकसद शिपयार्ड को अपग्रेड करना और भारतीय व अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए जहाज बनाना है. Square Port के डायरेक्टर फत्तेसिंह पाटिल ने इस साझेदारी को कंपनी के लिए एक अहम पड़ाव बताया.

शिपयार्ड में नए निवेश से विस्तार की तैयारी

साल 2026 में Square Port के कारोबार में बाहरी निवेशकों की दिलचस्पी भी देखने को मिली. मास्टर फाइनेंशियल सर्विसेज ने पहले कंपनी में 3.67 फीसदी हिस्सेदारी 2119 रुपये प्रति शेयर के भाव पर खरीदी थी. इसके बाद अगस्त 2026 में Master Financial Services ने 25.85 करोड़ रुपये का नया इक्विटी निवेश किया. यह निवेश 2176 रुपये प्रति शेयर के भाव पर हुआ. इस सौदे के आधार पर Square Port की इक्विटी वैल्यू करीब 58.5 करोड़ रुपये आंकी गई. Hazoor Multi Projects के पास Square Port में 53.76 फीसदी हिस्सेदारी बनी हुई है. कंपनी के मुताबिक, नए निवेश से शिपयार्ड के विस्तार के लिए पूंजी मिलेगी और मूल कंपनी की बैलेंस शीट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा.

दो चरणों में आगे बढ़ेगा शिपबिल्डिंग कारोबार

कंपनी ने डाभोल शिपयार्ड के विस्तार की योजना दो चरणों में बनाई है. पहले चरण में 150 मीटर तक के जहाज बनाने की क्षमता पर काम होगा. इसमें लैंडिंग क्राफ्ट, ऑफशोर सप्लाई वेसल, मिनी बल्क कैरियर, टग और ड्रेजर जैसे जहाज शामिल हैं. इसके साथ ही शिप रिपेयर का काम भी किया जाएगा. दूसरे चरण में कंपनी की योजना डिफेंस शिप और Handymax तथा Panamax आकार के बल्क, लिक्विड और कंटेनर जहाज बनाने की है. इससे कंपनी भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती है.

भारत में घरेलू स्तर पर जहाज बनाने को बढ़ावा देने की कोशिशों से भी इस कारोबार को आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है. इसके अलावा, कंपनी के शिपबिल्डिंग कारोबार का संबंध उसके एनर्जी बिजनेस से भी है. कंपनी की ऑयल और गैस इकाई Quippo को Oil India से 280 करोड़ रुपये का ड्रिलिंग रिग ऑर्डर मिला है.

इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार से भी मिल रहे ऑर्डर

Hazoor Multi Projects सिर्फ शिपबिल्डिंग कारोबार में ही नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में भी काम कर रही है. कंपनी को Tata Steel से ₹183 करोड़ का ऑर्डर, चेन्नई में 207.45 करोड़ रुपये का कंस्ट्रक्शन ऑर्डर और NHAI के नए टोल कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं. कंपनी ने FY26 में कंसोलिडेटेड आधार पर 579.58 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और 42.69 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया. कंपनी के कुल रेवेन्यू में शिपबिल्डिंग कारोबार की हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी रही.

Hazoor Multi Projects के शेयर का हाल

कंपनी के कारोबार में विस्तार की तैयारी के बीच शेयर बाजार में Hazoor Multi Projects का प्रदर्शन फिलहाल दबाव में है. गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को कंपनी का शेयर 13.83 रुपये पर कारोबार कर रहा था. इसमें 0.07 फीसदी की मामूली तेजी दर्ज की गई. कंपनी का मार्केट कैप 374 करोड़ रुपये है. शेयर का 52 हफ्ते का हाई 39.80 रुपये और लो 13.30 रुपये रहा है. कंपनी का स्टॉक P/E 12.8 और बुक वैल्यू 23 रुपये है. वहीं, इसका ROCE 12 फीसदी और ROE 7.89 फीसदी है. शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है.

5 साल में शेयर ने दिया 574 फीसदी तक का रिटर्न

पिछले एक साल में कंपनी के शेयर पर काफी दबाव रहा है और इसमें 60 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है. हालांकि, लंबी अवधि का प्रदर्शन देखें तो शेयर ने पांच साल में करीब 574 फीसदी का रिटर्न दिया है. यानी हालिया गिरावट के बावजूद पांच साल की अवधि में शेयर का रिटर्न काफी मजबूत रहा है. ऐसे में अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी डाभोल शिपयार्ड को कितनी तेजी से दोबारा विकसित कर पाती है और जहाज निर्माण से होने वाली कमाई में कब बढ़ोतरी होती है. शिपयार्ड की क्षमता, Damen के साथ साझेदारी और नए ऑर्डर कंपनी की आगे की कारोबारी संभावनाओं के अहम पहलू हैं.

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