PM मोदी के गोल्ड न खरीदने की अपील के बाद 39% तक महंगा हुआ सोना तो लोगों ने निकाला ये नया तरीका

इस फेस्टिव सीजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना जरूरत के हिसाब से खरीदने की अपील और कीमतों में करीब 39 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी का असर भारतीय ग्राहकों की खरीदारी पर पड़ सकता है. सोने की मात्रा के हिसाब से मांग घटने की उम्मीद है, लेकिन ऊंची कीमतों की वजह से रुपये में कुल खर्च मजबूत रह सकता है. ग्राहक हल्के गहने, कम कैरेट का सोना और पुराने सोने के एक्सचेंज को ज्यादा पसंद कर रहे हैं.

सोने-चांदी Image Credit: Money9 Live

Highlights

  • 24 कैरेट सोना पिछले साल के करीब 11,100 रुपये प्रति ग्राम से बढ़कर करीब 15,500 रुपये प्रति ग्राम हो गया है.
  • ग्राहक हल्के गहने और कम मात्रा खरीद सकते हैं, लेकिन ऊंची कीमतों की वजह से कुल खर्च ऊंचा रह सकता है.
  • गोल्ड एक्सचेंज का चलन बढ़ रहा है, कुछ रिटेलर्स के कारोबार में इसका हिस्सा 45-50 फीसदी तक पहुंच गया है.

Gold Price: भारत में सोने की खरीदारी को लेकर इस फेस्टिव सीजन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना जरूरत के हिसाब से खरीदने की अपील और लगातार बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय ग्राहक कम मात्रा में सोना खरीद सकते हैं. हालांकि, कम ग्राम सोना खरीदने के बावजूद कुल खर्च में बड़ी कमी आने की संभावना नहीं है.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 सितंबर को लोगों से सोना सिर्फ जरूरत के मुताबिक खरीदने की अपील की थी. इससे पहले मई में भी पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच उन्होंने भारतीयों से एक साल तक सोने की खरीदारी से बचने की अपील की थी. इसकी वजह सोने के आयात पर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होना बताई गई थी.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस अपील का असर फेस्टिव सीजन में सोने की मांग पर पड़ सकता है. अक्टूबर और नवंबर में नवरात्रि, धनतेरस और शादी के सीजन के दौरान सोने की खरीदारी बढ़ती है. ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताह यह तय करने में अहम होंगे कि प्रधानमंत्री की अपील का वास्तविक खरीदारी पर कितना असर पड़ता है.

सोना करीब 39% महंगा, ग्राहकों की जेब पर बढ़ा दबाव

सोने की कीमत में पिछले एक साल में करीब 39 फीसदी की तेजी आई है. पिछले साल सितंबर में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 11,100 रुपये प्रति ग्राम थी, जो अब करीब 15,500 रुपये प्रति ग्राम के आसपास पहुंच गई है.

इतनी बड़ी कीमत बढ़ने से ग्राहकों के लिए पिछले साल जितनी मात्रा में सोना खरीदना मुश्किल हो गया है. इसके साथ ही सीमा शुल्क में बढ़ोतरी ने भी खरीदारी का बजट बढ़ा दिया है.

ऐसे में इस फेस्टिव सीजन में सोने की खरीदारी की मात्रा यानी ग्रामेज कम रहने की उम्मीद है, लेकिन रुपये के हिसाब से कुल बिक्री मजबूत रह सकती है.

कम ग्राम सोना, लेकिन बिल रहेगा बड़ा

रिपोर्ट में बताया गया है कि, इस साल ग्राहक कम वजन वाली ज्वेलरी और छोटी मात्रा में सोना खरीदने की तरफ बढ़ रहे हैं. महंगे सोने के बीच ग्राहक अपने बजट को बनाए रखने के लिए हल्के डिजाइन और कम वजन वाले गहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं. इसके अलावा कम कैरेट वाले सोने और पुराने सोने को एक्सचेंज करने का चलन भी बढ़ रहा है. इसका मतलब यह है कि ग्राहक पहले के मुकाबले कम ग्राम सोना लेकर घर जा सकते हैं, लेकिन सोने की ऊंची कीमत की वजह से उनका कुल बिल फिर भी ज्यादा रह सकता है यानी इस बार सोने की खरीदारी का गणित कुछ ऐसा हो सकता है कि वजन कम, लेकिन खर्च ज्यादा.

संगठित ज्वेलर्स को मिल सकता है फायदा

ऊंची कीमतों के बावजूद बड़े और संगठित ज्वेलर्स को छोटे कारोबारियों की तुलना में फायदा मिलने की उम्मीद है. ब्रांड पर भरोसा, हॉलमार्किंग में पारदर्शिता और छोटे शहरों में तेजी से बढ़ता विस्तार बड़े ज्वेलर्स के लिए ग्राहकों को आकर्षित करने में मदद कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, संगठित ज्वेलरी कारोबार की बाजार हिस्सेदारी FY25 के 38 फीसदी से बढ़कर FY28 तक 50 फीसदी पहुंचने का अनुमान है.

इसका मतलब यह है कि भले ही पूरे बाजार में सोने की मात्रा के हिसाब से बिक्री कम हो, लेकिन बड़े और संगठित ज्वेलर्स कुल बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं.

फेस्टिव सीजन में बिक्री बढ़ने की उम्मीद

इंडस्ट्री से मिली जानकारी के मुताबिक, फेस्टिव सीजन में रुपये के हिसाब से ज्वेलरी बिक्री बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन बेचे जाने वाले सोने की मात्रा घट सकती है. एक प्रमुख ज्वेलरी रिटेलर को फेस्टिव सीजन में राजस्व में सालाना 20 से 25 फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद है. हालांकि, ऊंची कीमतों की वजह से यह बढ़ोतरी सोने की ज्यादा मात्रा बिकने के बजाय ऊंचे भाव का नतीजा हो सकती है. ग्राहक बजट के अंदर रहने के लिए हल्के गहने और कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, मई और जून में कमजोर मांग के बाद जुलाई के मध्य से सोने की खरीदारी में सुधार शुरू हुआ. अशुभ अवधि खत्म होने और शादी के सीजन की शुरुआत के साथ मांग में सुधार आया और अगस्त में इसमें और तेजी देखी गई.

शादी और त्योहारों में सोने की मांग पूरी तरह खत्म नहीं होगी

सोने की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में शादी और त्योहारों के दौरान ज्वेलरी खरीदने की परंपरा मजबूत बनी हुई है. इसलिए ऊंची कीमतें लोगों को खरीदारी का तरीका बदलने के लिए मजबूर कर रही हैं, लेकिन मांग को पूरी तरह खत्म नहीं कर रही हैं.

ग्राहक अब ऐसे गहने खरीद रहे हैं जिनका वजन कम हो, डिजाइन ज्यादा उपयोगी हो और एक ही गहने को अलग-अलग मौकों पर पहना जा सके यानी सोने की खरीदारी में कटौती से ज्यादा बड़ा बदलाव खरीदारी के तरीके में देखने को मिल रहा है.

पुराने सोने का एक्सचेंज बना बड़ा सहारा

महंगे सोने के बीच पुराने गहनों का एक्सचेंज ग्राहकों के लिए खरीदारी आसान बनाने वाला महत्वपूर्ण विकल्प बनता जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, KISNA में हर पांच में से एक ग्राहक पुराने सोने को एक्सचेंज करने का विकल्प चुन रहा है. इसके जरिए ग्राहक घर में रखे पुराने सोने की कीमत का इस्तेमाल नए डिजाइन के गहने खरीदने में कर रहे हैं.

एक अन्य बड़े ज्वेलरी रिटेलर के हालिया कारोबार में करीब 45 से 50 फीसदी हिस्सा गोल्ड एक्सचेंज के जरिए आया है, न कि पूरी तरह नए सोने की खरीदारी से.

इससे ग्राहकों को नया सोना खरीदने के लिए पूरी रकम अपनी जेब से खर्च नहीं करनी पड़ती. साथ ही, यह तरीका सोने की नई खरीदारी और आयात पर दबाव कम करने की प्रधानमंत्री की अपील के अनुरूप भी है.

FY26 में सोने का आयात बिल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, FY26 में भारत का सोने का आयात 24 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 71.9 अरब डॉलर हो गया. हालांकि, इसी दौरान सोने का आयातित वॉल्यूम घटकर 721 टन रह गया. यानी आयात बिल बढ़ने की एक बड़ी वजह सोने की कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी रही.

सोने के आयात पर बढ़ता खर्च देश की अर्थव्यवस्था और चालू खाते पर दबाव डाल सकता है. यही वजह है कि सोने की खरीदारी को जरूरत तक सीमित रखने की अपील को अहम माना जा रहा है.

छोटे ज्वेलर्स पर पड़ सकता है ज्यादा असर

फेस्टिव सीजन में छोटे ज्वेलर्स के सामने भी चुनौती रहने की संभावना है. रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे कारोबारियों के लिए कम मात्रा में सोना बिकने के बावजूद बिक्री का मूल्य बढ़ सकता है. एक ज्वेलरी कारोबार के अनुमान के मुताबिक, फेस्टिव सीजन में रुपये के हिसाब से बिक्री में 15 से 23 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि बेचे जाने वाले सोने की मात्रा यानी ग्रामेज घट सकती है.

ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने के बावजूद वे अपने बजट को नियंत्रित कर रहे हैं. यानी ग्राहक पहले जितना ही पैसा खर्च कर रहे हैं, लेकिन उसके बदले कम वजन का सोना खरीद रहे हैं.

सोने में निवेश का तरीका भी बदल रहा

सोने को लेकर भारतीय ग्राहकों की पसंद अब दो हिस्सों में बंटती नजर आ रही है. एक तरफ शादी, त्योहार और पारिवारिक मौकों पर ज्वेलरी की पारंपरिक मांग बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ निवेश के लिए लोग सोने के दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, शुद्ध निवेश के लिए कुछ ग्राहक सिक्के और बार जैसे विकल्पों की तरफ देख रहे हैं. इसके अलावा गोल्ड ईटीएफ और डिजिटल गोल्ड में भी रुचि बढ़ रही है.

ग्राहक अब सिर्फ यह नहीं देख रहे कि कितना सोना खरीदना है, बल्कि यह भी सोच रहे हैं कि उन्हें वास्तव में सोने की कीमतों में निवेश का एक्सपोजर चाहिए या ज्वेलरी खरीदनी है.

आगे क्या रहेगा फोकस?

आने वाले महीनों में नवरात्रि, धनतेरस, दिवाली और शादी का सीजन सोने की मांग के लिए बेहद अहम रहेगा. हालांकि, कीमतों में तेजी, कच्चे तेल की चाल, डॉलर की दिशा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले और भू-राजनीतिक तनाव सोने की कीमतों और ग्राहकों के खरीदारी फैसले को प्रभावित कर सकते हैं.

ऐसे में इस फेस्टिव सीजन में सोने की कहानी सिर्फ ज्यादा या कम खरीदारी की नहीं होगी. असली बदलाव यह होगा कि भारतीय ग्राहक कम वजन, हल्के डिजाइन और पुराने सोने के एक्सचेंज के जरिए अपने बजट में खरीदारी करने की कोशिश करेंगे.

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