Union Bank of India और Bank of India के मर्जर की तैयारी तेज, 2026 के अंत तक हो सकता है विलय; बनेगा तीसरा सबसे बड़ा बैंक
देश के बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, जहां Union Bank of India और Bank of India के प्रस्तावित मर्जर की प्रक्रिया तेज हो गई है. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों बैंक ड्यू डिलिजेंस और ऑपरेशनल इंटीग्रेशन पर काम कर रहे हैं और यह विलय 2026 के अंत तक पूरा हो सकता है.
Union Bank of India-Bank of India merger: देश के बैंकिंग सेक्टर में एक बार फिर बड़ी हलचल की सुगबुगाहट तेज हो गई है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, Union Bank of India और Bank of India के बीच प्रस्तावित विलय की शुरुआती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. दोनों बैंक फिलहाल ड्यू डिलिजेंस कर रहे हैं, जिसमें इंटरनल प्रोसेस, ऑपरेशनल इंटीग्रेशन और टेक्नोलॉजी सिस्टम का आकलन शामिल है. रिपोर्ट के अनुसार, यह विलय कैलेंडर ईयर 2026 के अंत तक पूरा हो सकता है.
विलय के बाद कितना बड़ा होगा बैंक
विलय पूरा होने पर संयुक्त इकाई देश के सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर लेंडर्स में शामिल हो जाएगी. संयुक्त इकाई वित्त वर्ष 2025 में लगभग 25.4 लाख करोड़ रुपये की एसेट साइज के साथ पब्लिक सेक्टर की दूसरी सबसे बड़ी बैंक बन जाएगी. वहीं, इंडियन स्टेट बैंक और एचडीएफसी बैंक के बाद यह देश की तीसरी सबसे बड़ी बैंक होगी.
एक वरिष्ठ बैंकिंग अधिकारी के अनुसार, सरकार मौजूदा 12 पब्लिक सेक्टर बैंकों की संख्या घटाकर 4 से 5 बड़े और मजबूत पीएसयू बैंकों का ढांचा तैयार करना चाहती है. इसी रणनीति के तहत Union Bank of India और Bank of India का विलय अहम माना जा रहा है.
मार्केट कैपिटलाइजेशन में भी बड़ा उछाल
मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से भी मर्ज हुआ बैंक मजबूत स्थिति में होगा. विलय के बाद बनने वाला बैंक मौजूदा कीमतों पर लगभग 2.13 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप के साथ छठे स्थान पर होगा. यह बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक को पीछे छोड़ देगा. वर्तमान में Union Bank of India और Bank of India क्रमशः पांचवें और छठे सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक हैं.
विलय की राह में क्या हैं चुनौतियां
इस मर्जर में सबसे बड़ी चुनौती टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन को माना जा रहा है, क्योंकि दोनों बैंकों के कोर बैंकिंग सिस्टम में अंतर है और उनके डिजिटल आर्किटेक्चर का इंटीग्रेशन एक जटिल प्रक्रिया साबित हो सकता है. इसके साथ ही ब्रांच नेटवर्क का पुनर्गठन, ह्यूमन रिसोर्सेज की तैनाती और दोनों संस्थानों के ऑपरेशनल कल्चर में तालमेल बैठाना भी बड़ी चुनौती होगा.
फाइनेंशियल पोजिशन में सुधार बना प्लस पॉइंट
हाल के क्वार्टर्स में Union Bank of India और Bank of India दोनों ने अपनी एसेट क्वालिटी में सुधार किया है. इसके अलावा लोअर स्लिपेज, स्ट्रेस्ड अकाउंट्स से रिकवरी और मजबूत कैपिटल बफर्स जैसे पॉजिटिव संकेत मिले हैं, जिससे विलय के लिए माहौल अनुकूल माना जा रहा है.
पहले भी हो चुका है बड़ा बैंक मर्जर
2017 से 2020 के बीच सरकार ने 10 पीएसयू बैंकों को 4 बड़े बैंकों में मर्ज किया था. इसके बाद सरकारी बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई. पॉलिसीमेकर्स लगातार संकेत दे चुके हैं कि आगे भी कम लेकिन मजबूत बैंक बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे. अब पूरे बैंकिंग सेक्टर की नजर इस बात पर टिकी है कि यह मर्जर कब तक और किन शर्तों पर पूरा होता है.
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