UPI से बड़े मर्चेंट पेमेंट पर लग सकता है चार्ज, आम ग्राहकों के लिए रहेगा फ्री; सरकार ने रखें 2 विकल्प
UPI को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर MDR लागू करने पर विचार कर रही है. वित्त मंत्रालय ने इसके लिए दो विकल्प बताए हैं. पहला, बड़े ट्रांजेक्शन पर MDR लगाना और दूसरा, सरकार की वित्तीय मदद को धीरे-धीरे कम करने के लिए टियर आधारित इंसेंटिव सिस्टम लागू करना है.
Highlights
- सरकार कुछ बड़े UPI लेनदेन पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने पर विचार कर रही है.
- सरकार के सामने 2 विकल्प हैं, जिनमें MDR और टियर आधारित इंसेंटिव सिस्टम शामिल है.
- UPI को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 2000 करोड़ रुपये का बजट रखा है.
UPI से पेमेंट करने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. सरकार UPI के जरिए होने वाले कुछ बड़े लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू करने पर विचार कर रही है. वित्त मंत्रालय ने संसद की वित्तीय मामलों की स्थायी समिति को बताया है कि UPI सिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए दो विकल्पों पर विचार हो रहा है. पहला विकल्प कुछ बड़े लेनदेन या कारोबारियों पर MDR लागू करना है. दूसरा विकल्प सरकार की वित्तीय मदद को धीरे- धीरे कम करने के लिए स्टेपवाइज इंसेंटिव सिस्टम लागू करना है. हालांकि आम ग्राहकों के UPI पेमेंट पर कोई चार्ज लगाने की बात नहीं कही गई है.
UPI पर MDR लागू करने का विकल्प
डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विस के मुताबिर, सरकार कुछ खास और बड़े UPI लेनदेन पर MDR लागू करने की संभावना देख रही है. MDR वह शुल्क है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारियों से लिया जाता है. सरकार का दूसरा विकल्प एक टियर आधारित इंसेंटिव सिस्टम शुरू करना है. इसके जरिए आने वाले कुछ सालों में UPI को दी जाने वाली सरकारी मदद धीरे- धीरे कम की जा सकती है. इसका मकसद UPI सिस्टम को लंबे समय में आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है.
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सरकार पर बढ़ रहा UPI का वित्तीय बोझ
संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, UPI लेनदेन को बढ़ावा देने और जीरो MDR से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने 2000 करोड़ रुपये का बजट रखा है. वहीं, इंडस्ट्री की अनुमानित ऑपरेशनल लागत करीब 20700 करोड़ रुपये है. यानी सरकार की मौजूदा मदद इंडस्ट्री की वास्तविक लागत के मुकाबले काफी कम है. समिति ने कहा है कि यह अंतर UPI सिस्टम की सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेश पर असर डाल सकता है.
UPI पर पहले लगता था MDR
भारत में UPI मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर पहले MDR लागू था. साल 2019 तक कुछ UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लेनदेन की राशि का 0.30 फीसदी तक MDR लिया जाता था. इसके बाद जनवरी 2020 में सरकार ने सभी UPI लेनदेन पर जीरो MDR लागू कर दिया. इसका मकसद डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना और लोगों को कैश के बजाय डिजिटल पेमेंट की ओर ले जाना था. अब सरकार बड़े ट्रांजेक्शन के लिए इस व्यवस्था में बदलाव पर विचार कर रही है.
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