रतन टाटा, साइरस मिस्त्री और एन. चंद्रशेखरन, किसके दौर में सबसे अधिक बढ़ा टाटा समूह का मार्केट कैप?
एन चंद्रशेखरन के चौंकाने वाले ऐलान के बाद से ही टाटा समूह और उसकी कंपनियों का आकलन किया जा रहा है. उनकी तुलना पूर्व के चेयरमैन रहे दिग्गजों से की जा रही है. तो चलिए टाटा संस के पिछले तीन चेयरमैन के कार्यकाल का हिसाब किताब देख लेते हैं.
Highlights
- चंद्रशेखरन को शुरू में पांच साल के लिए नियुक्त किया गया था.
- टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में इजाफा.
- कॉरपोरेट स्ट्रक्चर और मार्केट वैल्यूएशन में बदलाव आया है.
बीते दिन यानी बुधवार से ही टाटा समूह सुर्खियों में हैं और इसके पीछे की वजह टाटा संस के चैयरमैन एन.चंद्रशेखरन का इस्तीफा है. 12 अगस्त को चंद्रशेखरन ने ऐलान कर दिया कि वे टाटा संस के चैयरमैन पद को छोड़ रहे हैं और 20 फरवरी 2027 को अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद समूह को टाटा बाय बोल देंगे. उनके चौंकाने वाले ऐलान के बाद से ही टाटा समूह और उसकी कंपनियों का आकलन किया जा रहा है. उनकी तुलना पूर्व के चेयरमैन रहे दिग्गजों से की जा रही है. तो चलिए टाटा संस के पिछले तीन चेयरमैन के कार्यकाल का हिसाब किताब देख लेते हैं.
रतन टाटा, साइरस मिस्त्री और एन. चंद्रशेखरन
रतन टाटा, साइरस मिस्त्री और एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल के दौरान टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन (m-cap) में काफी बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, इन आंकड़ों को सही संदर्भ में देखना जरूरी है, क्योंकि समय के साथ लिस्टेड टाटा कंपनियों की संख्या, कॉरपोरेट स्ट्रक्चर और मार्केट वैल्यूएशन में बदलाव आया है.
रतन टाटा: 25 मार्च 1991 से 28 दिसंबर 2012 तक
रतन टाटा ने 25 मार्च 1991 को टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला. ACE इक्विटी के डेटा के अनुसार, उस समय टाटा ग्रुप की 10 लिस्टेड कंपनियां थीं. जब 28 दिसंबर, 2012 को टाटा ने पद छोड़ा, तब तक लिस्टेड कंपनियों की संख्या बढ़कर 23 हो गई थी और उनका कुल m-cap 4,72,051.69 करोड़ रुपये था.
लिस्टेड कंपनियों की संख्या डबल हुई
टाटा के कार्यकाल के दौरान मार्केट वैल्यू में आए बदलाव का आकलन करते समय लिस्टेड कंपनियों की संख्या में हुई बढ़ोतरी को ध्यान में रखना जरूरी है. उनके कार्यकाल की शुरुआत में m-cap की तुलना सीधे तौर पर कार्यकाल के अंत में दर्ज 4.72 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े से नहीं की जा सकती, क्योंकि लिस्टेड कंपनियों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई थी.
इसलिए, इस अवधि में ग्रुप के कुल m-cap में हुई बढ़ोतरी में मौजूदा लिस्टेड कंपनियों के वैल्यूएशन में बदलाव और लिस्टेड कंपनियों की संख्या में नई कंपनियों के जुड़ने, दोनों का प्रभाव शामिल था.
साइरस मिस्त्री: 28 दिसंबर 2012 से 24 अक्टूबर 2016 तक
साइरस मिस्त्री ने 28 दिसंबर, 2012 को रतन टाटा की जगह टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला. ACE इक्विटी के अनुसार, उनके कार्यकाल की शुरुआत में 23 लिस्टेड टाटा कंपनियों का कुल m-cap 4,72,051.69 करोड़ रुपये था. जब 24 अक्टूबर, 2016 को मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटाया गया, तब लिस्टेड टाटा कंपनियों का m-cap 8,29,045.55 करोड़ रुपये था.
इन दो मार्केट-कैप आंकड़ों के आधार पर, उनके कार्यकाल के दौरान इसमें लगभग 3.57 लाख करोड़ रुपये या लगभग 75.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. बाद में टाटा संस के बोर्ड ने मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटा दिया और रतन टाटा को अंतरिम चेयरमैन के तौर पर फिर से नियुक्त किया.
कुप्रबंधन का आरोप
मिस्त्री ने बाद में कुप्रबंधन का आरोप लगाया, जबकि टाटा संस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि बोर्ड का उन पर से भरोसा उठ गया है. दिसंबर 2016 में मिस्त्री ने टाटा ग्रुप की कंपनियों के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया.
मिस्त्री परिवार से जुड़ी दो इन्वेस्टमेंट फर्मों, साइरस इन्वेस्टमेंट्स और स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट, ने बाद में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) का रुख किया. उन्होंने मिस्त्री को हटाए जाने को चुनौती दी और माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के उत्पीड़न का आरोप लगाया. यह विवाद कई कानूनी चरणों से गुजरा और आखिरकार 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने मिस्त्री को हटाए जाने के फैसले को सही ठहराया.
एन चंद्रशेखरन: 21 फरवरी 2017 से 12 अगस्त 2026
मिस्त्री को हटाए जाने के बाद, रतन टाटा ने टाटा संस के अंतरिम चेयरमैन के तौर पर काम किया. इसके बाद एक स्थायी उत्तराधिकारी चुनने के लिए एक सिलेक्शन कमेटी बनाई गई. जनवरी 2017 में कमेटी ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के तत्कालीन CEO एन चंद्रशेखरन को टाटा संस का एग्जीक्यूटिव चेयरमैन चुना. उन्होंने 21 फरवरी 2017 को पद संभाला.
चंद्रशेखरन की नियुक्ति से टाटा संस के टॉप मैनेजमेंट में प्रोफेशनल मैनेजमेंट की ओर बदलाव आया, क्योंकि वे टाटा परिवार के सदस्य नहीं थे, बल्कि टाटा के साथ लंबे समय से जुड़े प्रोफेशनल एग्जीक्यूटिव थे.
मार्केट कैप में 184 फीसदी का उछाल
ACE इक्विटी डेटा के अनुसार, जब चंद्रशेखरन ने पद संभाला, तब लिस्टेड टाटा कंपनियों का कुल मार्केट कैप (m-cap) 8,22,504.96 करोड़ रुपये था. 12 अगस्त, 2026 तक यह बढ़कर 23,35,517.65 करोड़ रुपये हो गया. इसका मतलब है कि इस दौरान इसमें लगभग 15.13 लाख करोड़ रुपये या करीब 184 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
चंद्रशेखरन को शुरू में पांच साल के लिए नियुक्त किया गया था और फरवरी 2022 में टाटा संस बोर्ड ने सर्वसम्मति से उन्हें अगले पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त किया, जो 20 फरवरी, 2027 को खत्म होगा.
टाटा ट्रस्ट्स और उत्तराधिकार
रतन टाटा का निधन अक्टूबर 2024 में हुआ. बाद में नोएल टाटा को सर्वसम्मति से टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन नियुक्त किया गया. यह पद टाटा संस की चेयरमैनशिप से अलग है. यह फर्क इसलिए अहम है क्योंकि टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग 66 फीसदी हिस्सेदारी है. टाटा संस मुख्य होल्डिंग कंपनी है और टाटा ग्रुप की बड़ी कंपनियों की प्रमोटर है.
इस बीच, टाटा ग्रुप ने अभी तक टाटा संस के अगले चेयरमैन के नाम का ऐलान नहीं किया है. हालांकि, ग्रुप के पास चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी के बारे में फ़ैसला लेने के लिए अभी भी छह महीने का समय है.
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