छोटे प्राइवेट जेट में कितना होता है ईंधन, एक घंटे में 200 गैलन तक खपत, इसलिए बन जाता है आग का गोला
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के प्राइवेट जेट के बारामती में दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद देशभर में विमानन सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. लैंडिंग के दौरान तकनीकी खराबी के कारण विमान रनवे से फिसलकर खेत में जा गिरा, जिसके बाद आग और धुएं का गुबार उठता दिखा. इस हादसे के बाद सवाल उठता है कि प्राइवेट जेट में कितना फ्यूल होता है.
Ajit Pawar private jet crash: महाराष्ट्र समेत देश के लिए बुधवार की सुबह बेहद खराब रही है. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान लैंडिंग के दौरान बारामती में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. अजित पवार आज मुंबई से बारामती के लिए जा रहे थे, इसी दौरान प्लेन दुर्घटनाग्रस्त हो गया. वे एक छोटे प्राइवेट जेट से यात्रा कर रहे थे. बारामती हवाई अड्डे के रनवे पर उतरते समय विमान में तकनीकी खराबी आ गई. पायलट विमान पर कंट्रोल नहीं रख सका. इसके बाद विमान रनवे से फिसलकर पास के खेत में जा गिरा. विमान क्रैश होते ही बड़ी मात्रा में धुएं का गुबार उठा और आग लग गई. अब सवाल उठता है कि आखिर प्राइवेट जेट में कितना फ्यूल होता है और प्राइवेट जेट में किस तरह के फ्यूल का इस्तेमाल किया जाता है.
प्राइवेट जेट में प्रति घंटा कितना तेल लगता है
प्राइवेट जेट आम तौर पर प्रति घंटा 50 से 500 गैलन तेल की खपत करते हैं, हालांकि यह मॉडल और साइज पर निर्भर करता है. छोटे जेट आमतौर पर प्रति घंटे लगभग 100 से 200 गैलन ईंधन का उपयोग करते हैं, जबकि बड़े जेट प्रति घंटे 300 से 500 गैलन ईंधन की खपत कर सकते हैं. लंबी उड़ानों में स्वाभाविक रूप से अधिक ईंधन की खपत होती है और तेज हवाओं के कारण भी ईंधन की खपत बढ़ सकती है.
कितनी क्षमता का होता है फ्यूल टैंक
छोटे जेट विमानों का उपयोग अक्सर छोटी यात्राओं के लिए किया जाता है. इनमें आमतौर पर 500 से 3,000 पाउंड तक ईंधन भरा जा सकता है. ईंधन की बचत के कारण ये कम दूरी की उड़ानों के लिए एक अच्छा विकल्प होते हैं. मध्यम आकार के जेट अधिक आराम और अधिक दूरी प्रदान करते हैं.
इनमें लगभग 3,500 से 6,000 पाउंड ईंधन ले जाया जा सकता है, जो इन्हें देश भर में लंबी यात्राओं के लिए उपयुक्त बनाता है. भारी जेट विमानों में विशाल केबिन होते हैं और ये लंबी दूरी तय कर सकते हैं. इन जेट विमानों में 10,000 से 20,000 पाउंड तक ईंधन भरा जा सकता है. ये अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए लोकप्रिय होते हैं.
कौन से तेल का होता है इस्तेमाल
प्राइवेट जेट आमतौर पर Jet A या Jet A-1 फ्यूल से चलते हैं. ये हाई क्वालिटी वाले, केरोसिन आधारित ईंधन होते हैं, जिन्हें टरबाइन इंजनों के लिए डिजाइन किया गया है. इनकी खपत छोटे जेट विमानों के लिए लगभग 60 से 90 गैलन प्रति घंटा से लेकर बड़े और लंबी दूरी के जेट विमानों के लिए 300 से 500 गैलन प्रति घंटा तक होती है. ईंधन की लागत में उतार-चढ़ाव बना रहता है और ऑपरेशनल खर्च में इसका बड़ा हिस्सा होता है.
क्या प्राइवेट जेट में यात्रियों को इंश्योरेंस होता है
प्राइवेट जेट में यात्रियों का इंश्योरेंस होता है, लेकिन यह इंश्योरेंस सरकारी नियमों पर नहीं, बल्कि पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करता है. विमान मालिक ‘पैसेंजर लायबिलिटी इंश्योरेंस’ के तहत विमान, चालक दल और यात्रियों को कवर करने वाला एविएशन इंश्योरेंस खरीदते हैं, जो मृत्यु या चोट की स्थिति में परिवारों को मुआवजा देता है.
कितना मिलता है मुआवजा
मुआवजे की शर्तें तय नहीं होतीं और यह पॉलिसी के अनुसार अलग-अलग होती हैं. कुछ चार्टर कंपनियों में मुआवजे की सीमाएं तय होती हैं, जबकि वीआईपी यात्राओं में अधिक मूल्य वाले कवर होते हैं. भारत में मुआवजा आम तौर पर 50 लाख रुपये से 2 करोड़ रुपये तक होता है, लेकिन कुछ मामलों में इससे अधिक भी हो सकता है.
फ्लाइट क्रैश के बाद क्यों बन जाता है आग का गोला
फ्लाइट क्रैश के बाद आग का गोला बनने की सबसे बड़ी वजह एयरक्राफ्ट में मौजूद भारी मात्रा में फ्यूल होती है. विमान के पंखों और बॉडी के अंदर फ्यूल टैंक लगे होते हैं. क्रैश के समय तेज रफ्तार और जोरदार टक्कर से ये टैंक फट जाते हैं और फ्यूल चारों तरफ फैल जाता है. जैसे ही यह फ्यूल किसी भी चिंगारी, गर्म इंजन पार्ट या घर्षण से पैदा हुई गर्मी के संपर्क में आता है, तुरंत आग पकड़ लेता है और आग का बड़ा गोला बन जाता है.
दूसरी अहम वजह है फ्यूल का केरोसिन बेस्ड होना. Jet A और Jet A-1 जैसे फ्यूल बेहद ज्वलनशील होते हैं. क्रैश के दौरान फ्यूल हवा के साथ मिलकर एयरोसोल जैसी स्थिति बना लेता है. इस हालात में जरा सी चिंगारी भी विस्फोट जैसी आग को जन्म दे सकती है. इसके अलावा, विमान के इंजन, ब्रेक सिस्टम और रनवे से रगड़ भी इतनी गर्मी पैदा कर देते हैं कि आग तुरंत भड़क उठती है.
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