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पंचायत की खाली जमीन से होगी कमाई, गांवों में खुलेंगे EV चार्जिंग स्टेशन; सरकार ने CESL से मिलाया हाथ

पंचायती राज मंत्रालय ने CESL के साथ समझौता किया है. इसके तहत पंचायत की जमीन पर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे. इनसे ग्राम, ब्लॉक और जिला पंचायतों को कमाई का नया जरिया मिलेगा. मंत्रालय जगहों की पहचान और निगरानी करेगा, जबकि CESL स्टेशन लगाने, चलाने और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी.

इलेक्ट्रिक व्हीकल Image Credit: Getty Images

Highlights

  • पंचायत की जमीन पर EV चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे.
  • इससे ग्राम, ब्लॉक और जिला पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने के मौके बनेंगे.
  • CESL स्टेशन लगाने, चलाने और रखरखाव का काम संभालेगी.

गांवों में पंचायत की जमीन से अब कमाई का नया रास्ता खुल सकता है. केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन बनाने के लिए Convergence Energy Services Limited (CESL) के साथ समझौता किया है. इसके तहत पंचायत की जमीन पर चार्जिंग स्टेशन और बैटरी बदलने की सुविधा विकसित की जाएगी. इससे गांव, ब्लॉक और जिला पंचायतों को कमाई का नया जरिया मिलेगा. साथ ही, गांवों में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.

यह समझौता केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह की मौजूदगी में हुआ. मंत्रालय के मुताबिक, इस साझेदारी से देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पंचायतों के लिए अपनी कमाई बढ़ाने के नए मौके बनेंगे.

पंचायत की जमीन पर बनेंगे चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन

इस योजना के तहत पंचायत परिसरों और राज्य व राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे उपयुक्त जगहों पर EV चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे. इन सुविधाओं का इस्तेमाल दोपहिया, तिपहिया, चारपहिया और मध्यम व भारी व्यावसायिक वाहन कर सकेंगे.

इससे गांवों और शहरों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग सुविधाओं का दायरा बढ़ाने में मदद मिलेगी. अभी तक EV से जुड़ी सुविधाएं मुख्य रूप से शहरी इलाकों में ज्यादा देखने को मिलती हैं.

मंत्रालय और CESL की क्या होगी जिम्मेदारी?

इस योजना में दोनों पक्षों की अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की गई हैं. पंचायती राज मंत्रालय राज्यों के पंचायती राज विभागों के साथ मिलकर उपयुक्त जगहों की पहचान और उनकी निगरानी का काम करेगा.

वहीं, CESL स्टेशन लगाने से जुड़े काम संभालेगी. इसमें जगह का आकलन, मांग का अनुमान, उपकरणों की आपूर्ति, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग, स्टेशन शुरू करना और उनके संचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी शामिल है. CESL, Energy Efficiency Services Limited (EESL) की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है. EESL बिजली मंत्रालय के तहत काम करती है.

पंचायतों को कैसे होगा फायदा?

सरकार का मकसद पंचायत की जमीन को ऐसी संपत्ति में बदलना है, जिससे नियमित कमाई हो सके. चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन से मिलने वाला राजस्व पंचायतों की अपनी आय यानी Own Source Revenue (OSR) बढ़ाने में मदद कर सकता है. इस कमाई का इस्तेमाल गांवों में नागरिक सुविधाओं, स्थानीय बुनियादी ढांचे और सामुदायिक कल्याण से जुड़े कामों में किया जा सकेगा.

Model OSR Rules से भी पंचायतों की कमाई बढ़ाने की तैयारी

पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने हाल ही में Model Panchayat Tax, Rates and Fees Rules जारी किए हैं. इन्हें Model OSR Rules भी कहा जाता है. इन नियमों का मकसद पंचायतों के लिए पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से अपनी आय जुटाने का ढांचा तैयार करना है.

मंत्रालय और CESL पंचायत स्तर पर मौजूद सार्वजनिक संपत्तियों का इस्तेमाल स्वच्छ और हरित गांव बनाने, टिकाऊ ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने और पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए भी करेंगे. इसके अलावा, गांवों में EV चार्जिंग की सुविधा बढ़ने से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में मदद मिल सकती है. इससे ग्रामीण इलाकों में कार्बन उत्सर्जन कम करने के सरकार के प्रयासों को भी बढ़ावा मिलेगा.

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