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पिता की ₹1.5 करोड़ की FD पर बेटे को ₹2.59 करोड़ का टैक्स नोटिस; आखिर क्यों?

HDFC Bank में पिता और बेटे के नाम पर 1.5 करोड़ रुपये की जॉइंट FD थी. इनकम टैक्स विभाग ने पूरी रकम बेटे का अघोषित निवेश मानकर 2.59 करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड बना दी. बेटे ने दावा किया कि पैसा उसके NRI पिता के NRE खाते से आया था. अब मुंबई ITAT ने बैंक दस्तावेजों की दोबारा जांच का आदेश दिया है.

टैक्स नोटिस

Highlights

  • पिता और बेटे के नाम पर HDFC Bank में ₹1.5 करोड़ की जॉइंट FD थी.
  • इनकम टैक्स विभाग ने बेटे पर ₹2.59 करोड़ की टैक्स डिमांड बनाई.
  • ITAT ने बैंक स्टेटमेंट और सर्टिफिकेट की दोबारा जांच करने को कहा है. टैक्स की मांग पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है

बैंक में पिता के साथ जॉइंट फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) होना एक बेटे के लिए बड़ी टैक्स परेशानी बन गया. मामला HDFC Bank में रखी 1.5 करोड़ रुपये की FD से जुड़ा है. इनकम टैक्स विभाग ने पूरी रकम को बेटे का अघोषित निवेश मानते हुए उस पर 2.59 करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड बना दी. बेटे का कहना था कि FD में लगाया गया पूरा पैसा उसके पिता का था और उन्होंने यह रकम अपने Non-Resident External (NRE) खाते से जमा की थी. बेटे का नाम सिर्फ प्रशासनिक सुविधा के लिए जॉइंट होल्डर के तौर पर जोड़ा गया था.

अब मुंबई की इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने इस मामले को दोबारा जांच के लिए असेसिंग ऑफिसर के पास भेज दिया है. ट्रिब्यूनल ने टैक्स अधिकारी को बैंक स्टेटमेंट और सर्टिफिकेट समेत नए दस्तावेजों की जांच करने का निर्देश दिया है.

कैसे ₹1.5 करोड़ की FD पर बन गई ₹2.59 करोड़ की टैक्स डिमांड?

Financial Express की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला असेसमेंट ईयर 2019-20 का है. टैक्सपेयर कौशिक नरोट्टम सोनी उस दौरान NRI थे. उन्होंने भारत में शुरुआत में इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया था. इनकम टैक्स विभाग को अपने Insight Portal के जरिए उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी मिली. इसके आधार पर विभाग ने इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 147 के तहत उनका असेसमेंट दोबारा खोल दिया.

री-असेसमेंट के दौरान असेसिंग ऑफिसर को पता चला कि HDFC Bank में टैक्सपेयर के नाम पर ₹1.5 करोड़ की FD है. अधिकारी ने उनसे इस निवेश के पैसे का स्रोत बताने को कहा. इस पर सोनी ने बताया कि FD उनके पिता नरोट्टम ओधवजी सोनी (Narottam Odhavji Soni) की थी. उनके पिता भी NRI थे और उन्होंने अपने NRE बैंक खाते में रखे पैसों से यह FD बनाई थी. बेटे के मुताबिक, उनका नाम सिर्फ जॉइंट या थर्ड होल्डर के तौर पर जोड़ा गया था, ताकि प्रशासनिक काम और भविष्य में संपत्ति के ट्रांसफर में आसानी रहे.

हालांकि, री-असेसमेंट के दौरान सोनी इस दावे के समर्थन में बैंक के दस्तावेज जमा नहीं कर पाए. असेसिंग ऑफिसर ने इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 133(6) के तहत HDFC Bank को नोटिस भेजकर FD की जानकारी भी मांगी, लेकिन बैंक की ओर से जवाब नहीं मिला.

दस्तावेजों के अभाव में अधिकारी ने पूरी 1.5 करोड़ रुपये की रकम को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 69 के तहत अघोषित निवेश मानकर बेटे की आय में जोड़ दिया. Dispute Resolution Panel ने भी इस जोड़ को बरकरार रखा. इसके बाद 10 दिसंबर 2025 को फाइनल असेसमेंट ऑर्डर जारी किया गया. टैक्स, ब्याज और अन्य लागू शुल्क मिलाकर बेटे पर 2.59 करोड़ रुपये की डिमांड बन गई.

बेटे ने कहा- पिता के NRE खाते से आया था पैसा

टैक्स डिमांड को चुनौती देते हुए सोनी ने मुंबई ITAT का रुख किया. उनका मुख्य तर्क था कि बैंक FD में जॉइंट होल्डर होने का मतलब यह नहीं है कि उसमें जमा पूरा पैसा उसी व्यक्ति का है. उन्होंने कहा कि FD में उनके पिता पहले होल्डर और असली लाभार्थी मालिक (Beneficial Owner) थे. उनका नाम सिर्फ जॉइंट या थर्ड होल्डर के रूप में दर्ज था. उनके मुताबिक, FD बनाने के लिए इस्तेमाल हुई रकम पिता के NRE खाते से आई थी.

सोनी ने यह भी दलील दी कि वह और उनके पिता दोनों संबंधित अवधि में NRI थे. इसलिए उनके अनुसार, यह रकम विदेशी आय से जुड़ी थी और भारत में टैक्स के दायरे में नहीं आनी चाहिए. उन्होंने ट्रिब्यूनल को बताया कि असेसमेंट के दौरान बैंक रिकॉर्ड हासिल करने में देरी हुई थी. FD पुरानी थी और बैंक की भुज शाखा से दस्तावेज जुटाने में समय लगा. वह खुद भी भारत से बाहर रहते थे, जिससे रिकॉर्ड हासिल करना मुश्किल हुआ.

बाद में उन्होंने बैंक से जरूरी दस्तावेज हासिल किए. इनमें 27 मार्च 2025 का बैंक स्टेटमेंट शामिल था. इसमें दिखाया गया था कि 1.5 करोड़ रुपये की FD उनके पिता के NRE खाते से बनाई गई थी. इसके अलावा, बैंक सर्टिफिकेट भी जमा किया गया, जिसमें पिता को पहला होल्डर और बेटे को जॉइंट या थर्ड होल्डर बताया गया था.

ITAT ने क्यों दोबारा जांच के लिए भेजा मामला?

मुंबई ITAT में टैक्स विभाग ने इन नए दस्तावेजों को स्वीकार करने का विरोध किया. विभाग का कहना था कि असेसमेंट के दौरान टैक्सपेयर को पर्याप्त मौके दिए गए थे, लेकिन उन्होंने तब जरूरी दस्तावेज नहीं दिए. विभाग ने यह भी कहा कि अपील के स्तर पर नए सबूतों के जरिए पुराने मामले की कमियां पूरी नहीं की जानी चाहिए.

हालांकि, ट्रिब्यूनल ने माना कि बैंक स्टेटमेंट और सर्टिफिकेट इस विवाद के दो अहम सवालों का जवाब दे सकते हैं. पहला, FD का असली मालिक कौन था और दूसरा, इसमें जमा ₹1.5 करोड़ कहां से आए थे. ITAT ने कहा कि शुरुआती तौर पर ये दस्तावेज दिखाते हैं कि FD पिता के NRE खाते से बनाई गई थी और बेटा केवल जॉइंट होल्डर था. इसलिए इन दस्तावेजों की ठीक से जांच जरूरी है.

ज्यूडिशियल मेंबर बीना पिल्लई और अकाउंटेंट मेंबर अरुण खोदपिया की बेंच ने मामले को असेसिंग ऑफिसर के पास वापस भेज दिया. अधिकारी को नए बैंक दस्तावेजों की जांच करने, FD के मालिकाना हक और पैसे के स्रोत का पता लगाने के बाद कानून के मुताबिक नया फैसला लेने का निर्देश दिया गया है. ट्रिब्यूनल ने टैक्सपेयर को भी जांच में सहयोग करने और जरूरी जानकारी देने को कहा है. अपील को ‘स्टैटिस्टिकल पर्पज’ के लिए मंजूर किया गया है. इसका मतलब है कि मामले की दोबारा जांच होगी, लेकिन बेटे को ₹1.5 करोड़ की रकम पर टैक्स से अंतिम राहत नहीं मिली है.

जॉइंट FD रखने वालों के लिए क्या है इस मामले का मतलब?

यह मामला बताता है कि बैंक FD में जॉइंट होल्डर का नाम होना और उसमें जमा पैसे का असली मालिक होना, दोनों अलग बातें हैं. सिर्फ जॉइंट होल्डर होने से यह अपने आप साबित नहीं होता कि पूरी रकम उसी व्यक्ति ने निवेश की है. लेकिन अगर इनकम टैक्स विभाग निवेश के स्रोत पर सवाल उठाता है, तो परिवार को बैंक के दस्तावेजों से यह साबित करना पड़ सकता है कि पैसा किसका था और कहां से आया था. खासतौर पर NRI परिवारों के लिए NRE खाते के स्टेटमेंट, FD रसीद, बैंक ट्रांसफर रिकॉर्ड और बैंक सर्टिफिकेट संभालकर रखना जरूरी है. अगर माता-पिता अपनी रकम से FD बनाते हैं और सुविधा के लिए बच्चे का नाम जॉइंट होल्डर के तौर पर जोड़ते हैं, तो पैसे के स्रोत और असली मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए. इस मामले में भी बेटे ने अपील के दौरान बैंक स्टेटमेंट और सर्टिफिकेट जमा किए हैं.

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